खेती-किसानी में सबसे बड़ी जरूरतों में से एक समय पर सस्ता कर्ज मिलना है। बीज, खाद, सिंचाई और दूसरी कृषि जरूरतों के लिए किसानों को अक्सर कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में बिहार के किसानों के लिए राहत की खबर है। बिहार कृषि विभाग और NABARD के बीच हुए समझौते (MoU) के तहत ₹3 लाख तक के कृषि ऋण पर 1% अतिरिक्त ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इसका फायदा पात्र किसानों को फसल ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण पर मिलेगा।
किन किसानों को मिलेगा फायदा?
इस योजना का लाभ लघु, सीमांत और अन्य पात्र किसानों को मिलेगा। खास बात यह है कि इसके दायरे में बटाईदार, मौखिक पट्टेदार और संयुक्त देयता समूह (JLG) के पात्र सदस्य भी शामिल हैं। यानी जिन किसानों के नाम जमीन नहीं है, लेकिन वे खेती करते हैं, उन्हें भी पात्रता के आधार पर संस्थागत कृषि ऋण लेने और ब्याज सहायता का लाभ मिल सकता है।
₹3 लाख तक के कर्ज पर 1% अतिरिक्त अनुदान
योजना के तहत ₹3 लाख तक के फसल ऋण, KCC ऋण और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण पर 1% अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलेगा। ये ऋण वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों से लिए जा सकते हैं।
दरअसल, किसानों को कृषि ऋण पर केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली ब्याज सहायता के अलावा बिहार सरकार की तरफ से 1% अतिरिक्त ब्याज सहायता दी जाएगी। इससे पात्र किसानों पर कर्ज की लागत कम करने में मदद मिलेगी।
समय पर कर्ज चुकाना जरूरी
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने कृषि ऋण का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर करना होगा। यानी समय पर कर्ज चुकाने वाले पात्र किसानों को ही अतिरिक्त ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। इसलिए किसानों के लिए ऋण की शर्तों और भुगतान की समय सीमा का ध्यान रखना जरूरी होगा।
सरकार ने ₹5 करोड़ का किया प्रावधान
बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को संस्थागत स्रोतों से कम ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराना और खेती के लिए जरूरी पूंजी की जरूरत को आसान बनाना है।
बटाईदार किसानों के लिए भी अहम योजना
बिहार में कई किसान अपनी जमीन के बजाय बटाई या पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। ऐसे किसानों के लिए भी योजना में प्रावधान किया गया है। पात्र बटाईदार, मौखिक पट्टेदार और JLG सदस्य भी नियमों के मुताबिक इसका लाभ ले सकते हैं। इससे ऐसे किसानों को बैंकिंग व्यवस्था से जुड़कर खेती के लिए कर्ज लेने का अवसर मिल सकता है।
खेती की लागत कम करने में मिलेगी मदद
कम ब्याज पर मिलने वाला कृषि ऋण किसानों को खेती की जरूरतों के लिए समय पर पैसा जुटाने में मदद कर सकता है। किसान इस राशि का इस्तेमाल बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक और दूसरी कृषि गतिविधियों के लिए कर सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों की महंगे अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता कम होगी और संस्थागत कृषि ऋण को बढ़ावा मिलेगा।





