इस साल देश में बासमती चावल का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रह सकता है। इसकी बड़ी वजह बासमती की खेती का घटता रकबा है। इंडस्ट्री के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, 2026 में बासमती का रकबा करीब 1 लाख हेक्टेयर घटकर 23.9 लाख हेक्टेयर रह सकता है। यानी 2025 के मुकाबले करीब 4 फीसदी की कमी है। बासमती के रकबे में सबसे ज्यादा कमी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बताई जा रही है।
लगातार दूसरे साल घटा रकबा
2024 में देश में करीब 27.5 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती हुई थी, जो 2025 में घटकर करीब 24.9 लाख हेक्टेयर रह गई। अब 2026 में भी इसमें करीब 1 लाख हेक्टेयर की कमी बताई जा रही है। यानी बासमती का खेती क्षेत्र लगातार दूसरे साल घट रहा है।
हालांकि, पंजाब में बासमती का रकबा पिछले साल के आसपास रहने की बात कही जा रही है। 2025 में भारी बारिश और बाढ़ से पंजाब में बासमती की फसल को नुकसान हुआ था, इसलिए इस साल यहां उत्पादन पिछले साल से बेहतर रह सकता है।
MP में भी चावल का रकबा घटा
मध्य प्रदेश में भी इस साल चावल की खेती का क्षेत्र घटा है। 4 सितंबर तक राज्य में चावल का रकबा पिछले साल से करीब 1.75 लाख हेक्टेयर कम था। इंडस्ट्री के अनुसार, मध्य प्रदेश में करीब 6-7 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती होती है। कम बारिश और घटते चावल रकबे का असर यहां बासमती की खेती पर भी पड़ा है।
देशभर में इस साल चावल का रकबा भी घटा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ 2026 में धान का क्षेत्र करीब 4 फीसदी घटकर 4.218 करोड़ हेक्टेयर रह गया है।
बासमती के दाम 15-20% ऊपर
रकबा घटने के बीच भारतीय बासमती की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। मौजूदा समय में भारतीय बासमती का निर्यात भाव करीब 1,160 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है, जो पिछले साल से करीब 15-20 फीसदी ज्यादा है।
अगर नई फसल का उत्पादन कम रहा और घरेलू व विदेशी बाजार में मांग बनी रही, तो आगे बासमती के दाम पर इसका असर पड़ सकता है।





