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बहराइच के किसान जय सिंह का केले की खेती का खास तरीका

खेती शुरू करने से पहले वह खेत की गहरी जुताई पर जोर देते हैं। इससे केले की जड़ों को फैलने के लिए अच्छी जगह मिलती है।

Pooja Rai

Pooja Rai·11 Sep 2026

बहराइच के किसान जय सिंह का केले की खेती का खास तरीका

उत्तर प्रदेश के बहराइच के किसान जय सिंह साल 1983 से केले की खेती कर रहे हैं। खेती में नए प्रयोगों के लिए उन्हें सम्मान भी मिल चुका है। उनकी खासियत यह है कि वह केले की खेती में मिट्टी को स्वस्थ रखने और फसल को कीटों से बचाने के लिए प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

उठी हुई क्यारियों पर लगाते हैं केले

जय सिंह केले के पौधे 4 से 6 इंच ऊंची उठी हुई क्यारियों पर लगाते हैं। पौधों की लाइन पूर्व-पश्चिम दिशा में रखते हैं और करीब 5.75 फीट की दूरी रखते हैं। इससे पौधों को अच्छी धूप और हवा मिलती है।

वह केले के पौधे शाम के समय लगाते हैं और रात में पानी देते हैं। उनका मानना है कि इससे पौधों को तेज गर्मी से बचाने और नई जगह पर जल्दी जमने में मदद मिलती है।

खाद के लिए गोबर की खाद और ढैंचा

जय सिंह रासायनिक खाद की जगह पौधों के पास नम गोबर की खाद (FYM) डालते हैं। इससे पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व मिलते रहते हैं और मिट्टी की सेहत भी बेहतर रहती है।

इसके अलावा वह ढैंचा की हरी खाद भी खेत में इस्तेमाल करते हैं। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद मिलती है।

गहरी जुताई और मिट्टी का सोलराइजेशन

खेती शुरू करने से पहले वह खेत की गहरी जुताई पर जोर देते हैं। इससे केले की जड़ों को फैलने के लिए अच्छी जगह मिलती है।

मिट्टी को कीट और रोगों से बचाने के लिए वह सोलराइजेशन भी करते हैं। इसमें मिट्टी को कुछ समय तक धूप के संपर्क में रखा जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद कई हानिकारक रोगजनक कम करने में मदद मिलती है।

मई के बाद आने वाले गुच्छों पर खास ध्यान

जय सिंह के मुताबिक, 15 मई के बाद जिन केले के पौधों में फूल आते हैं, उनमें आमतौर पर ए-ग्रेड फल मिलने की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे फलों की लंबाई करीब 19 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा हो सकती है।

फसल करीब 75 से 80 दिन में तैयार हो जाती है और इसके बाद केले के गुच्छों की कटाई की जा सकती है।

कीटों से बचाने के लिए पहले से तैयारी

केले में लगने वाले प्यूपोस्टेम वीविल (banana beetle) से बचाव के लिए जय सिंह मार्च से जून के बीच निचली सकर्स की छंटाई के बाद 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से फोलियर स्प्रे करने की सलाह देते हैं।

इसके साथ ही वह खेत को साफ रखने और पौधों के बीच सही दूरी रखने पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि खेत में सफाई और सही दूरी रखने से बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिलती है।

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