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अब AI बताएगा चाय के बागानों का हाल, ISRO और NIT Rourkela के साथ Tea Board की बड़ी पहल

Tea Board India ने ISRO के National Remote Sensing Centre (NRSC) और NIT Rourkela के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत चाय के बागानों पर नजर रखने के लिए एक खास AI आधारित सिस्टम तैयार किया जाएगा।

Pooja Rai

Pooja Rai·04 Sep 2026

अब AI बताएगा चाय के बागानों का हाल, ISRO और NIT Rourkela के साथ Tea Board की बड़ी पहल

भारत में सबसे ज्यादा पिए जाने वाले पेय पदार्थों में चाय सबसे आगे है और यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा भी है। लेकिन जिस चाय की पत्तियां हमारी प्याली तक पहुंचती हैं, उसे उगाना किसानों के लिए आसान काम नहीं है। कीट, बीमारियां और मौसम में बदलाव अक्सर चाय की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। अब इन समस्याओं से निपटने के लिए AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट तकनीक की मदद ली जाएगी।

Tea Board India ने ISRO के National Remote Sensing Centre (NRSC) और NIT Rourkela के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत चाय के बागानों पर नजर रखने के लिए एक खास AI आधारित सिस्टम तैयार किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट का नाम ‘CHAAYANKAN’ रखा गया है और यह मार्च 2029 तक चलेगा। इसके तहत देश के प्रमुख चाय उत्पादक इलाकों में सैटेलाइट, ड्रोन और जमीन से जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि चाय के पौधों पर बीमारी, कीट या मौसम का कितना असर हो रहा है।

AI की मदद से चाय के बागानों की मैपिंग की जाएगी और प्रमुख कीट व बीमारियों का पहले से अनुमान लगाने की कोशिश होगी। इसके साथ ही ड्रोन और सैटेलाइट से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर चाय की हरी पत्तियों की पैदावार का भी अनुमान लगाया जाएगा।

इससे चाय उत्पादकों को फसल में होने वाली परेशानी का समय रहते पता लगाने और सही कदम उठाने में मदद मिल सकती है। Tea Board जमीन से मिलने वाली जानकारी और तकनीकी सहयोग देगा। सरकार को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से चाय की पैदावार बढ़ाने, लागत घटाने और खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

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