देश की अर्थव्यवस्था में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों की अहम भूमिका है, लेकिन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इनकी रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। अप्रैल से जून 2026 के बीच कृषि और संबद्ध गतिविधियों का GVA ग्रोथ 3.6 फीसदी रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 4.4 फीसदी था। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाढ़ और भीषण गर्मी की वजह से पशुपालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होने का असर भी इस आंकड़े पर पड़ा है।
पशुपालन और डेयरी पर पड़ा मौसम का असर
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अप्रैल-जून के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में खेती की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहती हैं। इस समय मुख्य रूप से पिछली फसल बाजार में आती है। ऐसे में इस तिमाही में कृषि GVA पर पशुपालन और दूसरे संबद्ध क्षेत्रों का असर ज्यादा हो सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के मुताबिक, अप्रैल से जून के दौरान बाढ़ और अत्यधिक गर्मी ने पशुपालन क्षेत्र को प्रभावित किया, जिसका असर कृषि और संबद्ध गतिविधियों के GVA पर दिख सकता है।
कमजोर मानसून का असर आगे दिख सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का पूरा असर अभी कृषि क्षेत्र के आंकड़ों में दिखाई नहीं दिया है। इसका प्रभाव आने वाली तिमाहियों में ज्यादा साफ हो सकता है।
मदन सबनवीस के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि और संबद्ध गतिविधियों की GVA ग्रोथ करीब 3.5 से 4 फीसदी रह सकती है। हालांकि, इसमें गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
इसकी बड़ी वजह खरीफ फसलों का रकबा है। बारिश में बाद में सुधार होने के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई होना मुश्किल है। यानी देर से हुई बारिश से फसलों को कुछ फायदा जरूर मिल सकता है, लेकिन बुवाई में जो कमी रह गई है, उसे पूरी तरह वापस पाना मुश्किल होगा।
जून की कम बारिश से खरीफ बुवाई पर असर
इस साल मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून में देशभर में सामान्य से करीब 36 फीसदी कम बारिश हुई। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा।
हालांकि, जुलाई में बारिश ने तेजी पकड़ी, जिससे बारिश की कुल कमी कुछ कम हुई। फिर भी 30 अगस्त तक देशभर में मानसून सामान्य से करीब 14 फीसदी कम रहा।
पूर्वी भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में स्थिति और खराब रही। 1 जून से 30 अगस्त के बीच इन क्षेत्रों में बारिश सामान्य से क्रमशः करीब 26 फीसदी और 24 फीसदी कम रही।
खरीफ फसलों का रकबा करीब 1.7% कम
कृषि विभाग के 28 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 10.9 करोड़ हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 1.7 फीसदी कम है। वहीं, सामान्य रकबे की तुलना में यह करीब 3 फीसदी कम है।
ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई अब लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में शुरुआती मानसून की कमी से जो रकबा कम हुआ है, उसकी पूरी भरपाई अब मुश्किल है।
मौजूदा कीमतों पर GVA में बढ़ोतरी
हालांकि, अगर मौजूदा कीमतों यानी करंट प्राइस के आधार पर देखें तो कृषि और संबद्ध गतिविधियों का GVA पहली तिमाही में 7.5 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल इसी अवधि में यह बढ़ोतरी 4.7 फीसदी थी।
वहीं, जनवरी से मार्च 2026 की पिछली तिमाही में कृषि और संबद्ध गतिविधियों का GVA स्थिर कीमतों पर 3.9 फीसदी बढ़ा था।
कृषि क्षेत्र की ग्रोथ में मामूली गिरावट का असर आने वाले महीनों में फसलों के उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है। खासकर अगर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी बनी रहती है, तो खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, आगे का असर मानसून के बाकी दिनों और फसलों की वास्तविक पैदावार पर निर्भर करेगा।
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