आलू और शकरकंद की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारत अब इन दोनों फसलों की नई और बेहतर किस्में विकसित करने के साथ-साथ खेती की आधुनिक तकनीक पर भी तेजी से काम करने की तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित किया जा रहा है। इस केंद्र के जरिए ऐसी किस्मों और तकनीकों पर काम होगा, जो किसानों की पैदावार बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकें।
दरअसल, 7 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में आगरा में बन रहे CSARC केंद्र, नई ब्रीडिंग तकनीक, उन्नत बीज और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
आगरा केंद्र में क्या होगा काम?
आगरा में बनने वाला यह केंद्र सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ा वैज्ञानिक केंद्र होगा। यहां भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के लिए भी आलू और शकरकंद से जुड़ी रिसर्च की जाएगी।
केंद्र में हाइब्रिड आलू तकनीक, बेहतर जर्मप्लाज्म, बायोफोर्टिफाइड फसल और जलवायु के अनुकूल किस्मों पर काम होगा। इसका मकसद ऐसी नई किस्में तैयार करना है, जो भारतीय मौसम और खेती की परिस्थितियों में अच्छी पैदावार दे सकें।
ICAR और CIP के काम अलग-अलग होंगे
बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि ICAR और CIP एक ही काम को दोहराएं नहीं। दोनों संस्थाओं के बीच काम का स्पष्ट बंटवारा होना चाहिए, ताकि संसाधनों का सही इस्तेमाल हो और किसानों के लिए कुछ नया विकसित किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आगरा केंद्र के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बेहतर जर्मप्लाज्म और नई तकनीक भारत में लाई जाए, ताकि देश की परिस्थितियों के हिसाब से नई किस्में तैयार की जा सकें और इसका सीधा फायदा आलू किसानों को मिले।
हाइब्रिड आलू से बीज उत्पादन में आएगी तेजी
CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने बताया कि आगरा का केंद्र हाइब्रिड आलू तकनीक पर भी काम करेगा। इससे आलू के बीज तैयार करने की प्रक्रिया को ज्यादा तेज और सटीक बनाने में मदद मिल सकती है। इससे निजी क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
शकरकंद को 'सुपरफूड' बनाने की तैयारी
बैठक में शकरकंद को लेकर भी खास चर्चा हुई। खासतौर पर ऑरेंज-फ्लेश्ड बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। ये किस्में आयरन, जिंक और विटामिन-A जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि शकरकंद को सिर्फ पारंपरिक फसल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसे आधुनिक 'सुपरफूड' के तौर पर बाजार में बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे इसकी मांग बढ़ सकती है और छोटे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकता है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
आगरा में बनने वाले इस केंद्र से किसानों को नई किस्मों, बेहतर बीज और आधुनिक खेती की तकनीक मिलने की उम्मीद है। खासकर ऐसी किस्मों पर काम होगा जो बदलते मौसम को सहन कर सकें और बेहतर उत्पादन दें। सरकार का लक्ष्य है कि रिसर्च का फायदा सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे किसानों के खेत तक पहुंचे और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद करे।





