भावनगर, गुजरात। केसर की खेती का नाम आते ही सबसे पहले जम्मू-कश्मीर का ख्याल आता है। लेकिन गुजरात के भावनगर के एक युवा किसान ने इस सोच को बदलने की कोशिश की है। भावनगर के छोटे से गांव टीमाणा के रहने वाले 21 वर्षीय जयपालभाई रोहितभाई पंड्या ने कश्मीर से केसर के बल्ब लाकर आधुनिक तकनीक से अपने गांव में इसकी खेती शुरू की। खास बात यह है कि उन्होंने बिना मिट्टी के Aeroponic Farming के जरिए केसर उगाया और करीब 3 महीने में पहली फसल से लाखों रुपये की कमाई की।
जयपालभाई ने आर्ट्स से ग्रेजुएशन किया है। खेती करने की इच्छा उन्हें हमेशा से थी, लेकिन करीब चार साल पहले सोशल मीडिया पर केसर की खेती से जुड़ा एक वीडियो देखने के बाद उन्होंने इसे नए तरीके से करने का फैसला किया। इसके बाद वे जम्मू-कश्मीर के पंपोर पहुंचे और वहां के किसानों से केसर की खेती और इसके लिए जरूरी तकनीक को समझा।
12×15 फीट के सेटअप से शुरू किया काम
कश्मीर से लौटने के बाद जयपालभाई ने अपने गांव में करीब 12×15 फीट का Controlled Environment Setup तैयार किया। इस सेटअप को बनाने में करीब 18 लाख रुपये का खर्च आया। केसर की खेती के लिए उन्होंने करीब 10 लाख रुपये के केसर के बल्ब कश्मीर से खरीदे।
उन्होंने इस सेटअप में Aeroponic Technology का इस्तेमाल किया। इसमें मिट्टी के बिना पौधों को नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। जयपालभाई ने अपने सेटअप में पंपोर जैसा तापमान और वातावरण तैयार करने की कोशिश की, ताकि गुजरात जैसे गर्म इलाके में भी केसर की फसल ली जा सके।
करीब तीन महीने बाद केसर में Flowering शुरू हुई और पहली फसल से उन्हें अच्छी कमाई हुई। उनके मुताबिक, स्थानीय बाजार में केसर को करीब 1,000 से 1,200 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर बेचा गया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी Marketing की और ग्राहकों तक सीधे पहुंच बनाई।
साल में दो बार लेते हैं केसर की फसल
जयपालभाई के मुताबिक, उनके केसर फार्म में एक Crop Cycle करीब 6 महीने का होता है और साल में दो बार फसल लेने की कोशिश की जाती है। पहला Cycle अगस्त से शुरू होता है और नवंबर के आसपास Flowering आती है। इसके बाद दिसंबर में Multiplication का काम होता है और फरवरी में दोबारा Multiplication की प्रक्रिया होती है। इसके बाद मई के आसपास फिर से Flowering का Cycle आता है।
इस तरह Controlled Environment में फसल का Cycle मैनेज करके साल में दो बार उत्पादन लेने की कोशिश की जा रही है।
जयपालभाई बताते हैं कि मौजूदा सेटअप में बिजली का खर्च करीब 5,000 से 7,000 रुपये प्रति माह आता है। करीब चार साल से वे इस मॉडल पर काम कर रहे हैं और अब इसे बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
अब 3 करोड़ रुपये से बनेगा बड़ा सेटअप
जयपालभाई अब केसर की खेती को छोटे सेटअप से निकालकर बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। इसके लिए करीब 20×30 मीटर का नया सेटअप तैयार किया जा रहा है। इस नए प्रोजेक्ट पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नए सेटअप में करीब 8,000 किलो केसर के बीज रखने की क्षमता होगी। इसकी ऊंचाई करीब 15 फीट रखी जाएगी, ताकि ज्यादा संख्या में रैक लगाकर कम जगह में ज्यादा उत्पादन लिया जा सके।
जयपालभाई के मुताबिक, मौजूदा सेटअप में करीब 14 क्विंटल केसर के बीज हैं, जबकि नए सेटअप में क्षमता काफी ज्यादा होगी। नए सेटअप से औसतन करीब 8 किलो केसर उत्पादन का लक्ष्य है। अगर इसे करीब 1,000 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर बेचा जाए तो इसकी कीमत लगभग 80 लाख रुपये बैठती है।
अब केसर के साथ दूसरे हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट पर भी काम
जयपालभाई सिर्फ केसर की खेती तक सीमित नहीं रहना चाहते। नए सेटअप के साथ वे Solar System लगाने की भी तैयारी कर रहे हैं, जिससे बिजली की लागत को कम किया जा सके।
इसके अलावा वे Microgreens, Himalayan Keedajadi और Guchchi Mushroom जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट की Controlled Environment में खेती के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं।
जयपालभाई को इस काम में उनके किसान पिता का भी पूरा सहयोग मिला। उनका कहना है कि उनके पिता ने बेटे के नए प्रयोग पर भरोसा किया और इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।
आज जयपालभाई खुद केसर की खेती कर रहे हैं और दूसरे किसानों और युवाओं को भी इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। उनका मानना है कि खेती को सिर्फ पारंपरिक तरीके से करने की जरूरत नहीं है। अगर युवा Modern Technology, Controlled Environment और Scientific Farming को अपनाएं, तो कम जगह में भी हाई-वैल्यू फसलों की खेती कर नई कमाई के रास्ते बनाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट- चारडिया हर्षदीपभाई विक्रमभाई





