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साल 2024 में मक्के का निर्यात पिछले चार साल में सबसे कम क्यों हो गया है, इसके साथ ही दिनभर की और ज़रूरी खबरें भी जानें

दिनभर की खेती किसानी से जुड़ी खबरों की न्यूज पोटली में आपका स्वागत है। चलिए देखते हैं आज की पोटली में किसानों के लिए क्या क्या नया है। 1.साल 2024 में मक्के का निर्यात पिछले चार साल में सबसे कम रहा

Pooja Rai

Pooja Rai·01 Jun 2024· 4 min read

साल 2024 में मक्के का निर्यात पिछले चार साल में सबसे कम क्यों हो गया है, इसके साथ ही दिनभर की और ज़रूरी खबरें भी जानें

दिनभर की खेती किसानी से जुड़ी खबरों की न्यूज पोटली में आपका स्वागत है। चलिए देखते हैं आज की पोटली में किसानों के लिए क्या क्या नया है।

1.साल 2024 में मक्के का निर्यात पिछले चार साल में सबसे कम रहा है।घरेलू कीमतों में वृद्धि होना इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है।


अगर हम आंकड़ों की बात करें तो साल 2023-24 में देश का मक्का निर्यात 14.42 लाख टन है जबकि पिछले साल का निर्यात 34.53 लाख टन था। बताया जा रहा है कि फ़सल की कम उपज के साथ साथ इथेनॉल, पॉल्ट्री और स्टार्च उद्योग में मक्का की मांग बढ़ने के वजह से घरेलू बाजार में इसकी कीमतें काफी ऊपर चल गयी है। इस वजह से निर्यात में कमी आई है।













2.RBI ने मोटे अनाज के उपज को लेके एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि देश में मोटे अनाज ( रागी, बाजरा, ज्वार ) का उत्पादन स्थिर हो गया है। इसका उत्पादन ना तो बढ़ रहा है ना ही घट रहा है।

आपको बता दें कि भारत, एशिया का 80 फीसद और पूरी दुनिया का 20 फीसद मोटा अनाज पैदा करता है। लेकिन अभी हमारे देश में किसान मोटा अनाज बड़े पैमाने पर नहीं उगा रहे हैं क्योंकि अभी इसकी माँग कम है और सरकार की तरफ़ से कोई इंसेंटिव भी नहीं मिलता जैसे की MSP जो की चावल गेहूं पर मिलता है।










3.बिहार के मिथिला में प्रमुखता से उगाए जाने वाला "मिथिला मखाना" का दाम पिछले छह महीने में बढ़कर दोगुना हो गया है। वहाँ के कृषि विभाग का कहना है कि मखाने को "मिथिला मखाना" के नाम से GI टैग मिलने के बाद देश-विदेश में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।


कृषि विभाग के रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 30 से 35 हजार हेक्टेयर में मखाने की खेती की जाती है और 40 से 45 लाख क्विंटल मखाना का उत्पादन होता है। मखाना को GI टैग मिलने के बाद राज्य सरकार किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है।











और अब किसानों से लिए सबसे उपयोगी मौसम की जानाकरी

4. मौसम अपडेट :




मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी दिल्‍ली में 31 मई, शुक्रवार को भी लू की स्थिति बनी रही और पारा 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो कि सामान्य से छह डिग्री ज्‍यादा है। मौसम विभाग ने यह भी कहा कि राष्‍ट्रीय राजधानी में इस मई में सिर्फ दो दिन बारिश हुई है जो 10 सालों में सबसे कम है।

मानसून की खबर की बात करें तो विभाग के अनुसार तय समय पर मॉनसून केरल में आ गया है। आपको बता दें कि मौसम विभाग ने 30 मई को ही केरल में मॉनसून आने की बात कही थी और ऐसा ही हुआ। मानसून आने से केरल के कई इलाकों में जलभराव देखने को मिल रहा है। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।




और आखिर में न्यूज पोटली की ज्ञान पोटली

5. हर साल 1 जून यानी आज के दिन विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक भोजन के रूप में दूध के महत्व को सामने लाने और डेयरी फार्मिंग और डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।




हम दूध और दूध उत्‍पादन के आकड़ों की बात करें तो भारत दूध उत्‍पादन के मामले में दुन‍िया में पहले नंबर पर है, प‍िछले कुछ वर्षों के दौरान देश ने मात्रा और गुणवत्ता के मामले में खूब तरक्‍की की है। वर्ष 2021-22 में पूरी दुन‍िया के दूध उत्पादन में भारत का योगदान सबसे ज्‍यादा 24.64 फीसदी रहा तो वहीं 2022-23 में दूध उत्पादन 230.58 मिलियन टन तक पहुँच गया।
और पिछले नौ वर्षों के दौरान यह बढ़ोतरी लगभग 58% है। ऐसे में देखा जाए तो भारतीय कृष‍ि में डेयरी का योगदान बेहद महत्‍वर्पूण तो है ही, देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5 फीसदी के योगदान के साथ ये सेक्‍टर बेहद जरूरी हो जाता है।

खेती किसानी की रोचक जानकारी और जरुरी मुद्दों, नई तकनीक, नई मशीनों की जानकारी के लिए देखते रहिए न्यूज पोटली।




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