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विकास से कोसों दूर हैं मध्य प्रदेश के ये गांव

मध्यप्रदेश का अलीराजपुर जो भारत के सबसे ग़रीब जिलों में से एक है। यहां लगभग 90% आदिवासी रहते हैं, जो आज भी बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। जिले की साक्षरता दर 37.21 % है, जो देश में सबसे कम है। अल

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Thamir·Correspondent·05 Feb 2025· 4 min read

विकास से कोसों दूर हैं मध्य प्रदेश के ये गांव

विकास से कोसों दूर हैं मध्य प्रदेश के ये गांव

मध्यप्रदेश का अलीराजपुर जो भारत के सबसे ग़रीब जिलों में से एक है। यहां लगभग 90% आदिवासी रहते हैं, जो आज भी बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। जिले की साक्षरता दर 37.21 % है, जो देश में सबसे कम है। अलीराजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर नर्मदा घाटी के किनारे अंजनबाड़ा समेत कई ऐसे गांव हैं, जो विकास की रफ्तार से बहुत पीछे छूट गए हैं। इनके पास मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। इन गांवों के लोग बताते हैं कि हालात इतने बुरे हैं कि ज्यादातर वक्त उन्हें दोनों वक्त खाने में सिर्फ बाजरे की रोटी और चटनी से ही पेट भरना पड़ता है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 2019-21 में जिले में 40.25% आबादी गरीब है। यूनाइटेड नेशन्स मल्टी-डायमेंशनल पावर्टी इंडेक्स (MPI) 2018 की रिपोर्ट कहती है कि, ये देश का सबसे गरीब जिला है। यहां के 76.5% लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। यहां की 90% आबादी आदिवासी है।

न्यूज़ पोटली की टीम जब इन गांवों में रिपोर्टिंग के लिए पहुंची तो पाया कि हालात बहुत खराब हैं। यहां बोरवाला गांव में हमारी मुलाकात आदिवासी महिला रोमी रावत से हुई। इस गांव में करीब 10 घर होंगे। रोमी रावत को प्रधानमंत्री आवास मिला है, लेकिन पैसों की वजह से छत नहीं बना पाई। इस गांव के जिन लोगों को प्रधानमंत्री आवास मिला है, उनके घरों से छत गायब है। छत ना होने के सवाल पर रोमी का कहना है कि, यहां तक समान लाने में दिक्कत होती है। घर बनाने के लिए सभी समान नीचे से सिर पर ढोकर लाना पड़ता है, जिससे मजदूर रखने से ज्यादा खर्च होता है। सरकार की तरफ से 1.20 लाख रुपये मिलते हैं, जिसमें घर बनवा पाना मुश्किल है।

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बोरवाला में ही रहने वाली एक और महिला धौकी के 7 बच्चे हैं, घर में नाम मात्र एक टूटी मिट्टी की तवा है। ये लोग अपने पति के साथ मजदूरी करने के लिए गुजरात जाते हैं। जब हमने उनसे पीरियड्स के दौरान होने वाली दिक्कतों के बारे में जानना चाहा कि वो इस दौरान कैसे काम करती हैं, तो इस पर उनका जवाब हैरान करने वाला था। उन्हें तो ये भी नहीं मालूम कि पीरियड्स क्या होता है? रही बात डॉक्टर और अस्पताल की, तो वहां तक पहुंचना भी इनके लिए किसी जंग से कम नहीं।

अलीराजपुर का बोरवाला अकेला ऐसा गांव नहीं है, जहां सरकार की योजनाएं नहीं पहुंची हों। इस इलाके में सैकड़ों ऐसे गांव हैं, जहां सरकारी योजनाओं का कोई असर नहीं हुआ। हम दूसरे दिन अंजनबाड़ा के लिए रवाना हुए। नदी पार करने के लिए हमने नाव का सहारा लिया, नाव प्रवीण चला रहे थे, जिनकी उम्र सिर्फ 8 साल की थी। प्रवीण बताते हैं कि वो गांव के सेटेलाइट स्कूल अंजनबाड़ा में पढ़ते हैं। गांव के शिक्षक के घर में ही स्कूल संचालित होता है, क्योंकि वहां स्कूल के लिए भवन नहीं है।

अलीराजपुर जिले का एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां सरकार की मूलभूत सुविधाएं पहुंची हों। इन इलाकों में दर्जनों ऐसे गांव हैं। हमें यहां ज्यादातर वो लोग मिले जिनके पास योजनाओं का फायदा लेने के लिए आधार कार्ड तक नहीं था, या किसी भी तरह का सरकारी दस्तावेज़, जिससे यह साबित हो सके कि ये इसी देश के नागरिक हैं।

हालांकि जब हमने इसकी तस्दीक करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट खंगाली, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखी। वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक राशन आपके द्वार योजना में 24 वाहनों से 244 गांवों में राशन पहुंचाया जा रहा है। उज्ज्वला योजना में 10 हजार महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए गए हैं। पानी की आपूर्ति भी जरूरतमंद गांवों तक पहुंचाई जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है।

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सामाजिक संस्था से जुड़कर काम कर रहे भगत सिंह बताते हैं कि, इन गांवों के लोग पहाड़ों की चोटी में रहते हैं। उन्हें पानी के लिए 2-3 किलोमीटर नीचे आना पड़ता है। अशिक्षा के कारण वो सरकारी सुविधाओं का फायदा नहीं उठा पाते हैं।

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