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'रेड डायमंड' अमरूद से सालाना 40 -50 लाख रुपये की कमाई करते हैं रतलाम के डीपी धाकड़

रतलाम (मध्य प्रदेश )। न्यूज़ पोटली से बात करते हुए डीपी धाकड़ ने बताया कि, 'रेड डायमंड' अमरूद का टेस्ट बहुत ही लाजवाब है। इसमें कच्चा और पक्का दोनों का स्वाद अलग-अलग होता है। अपने स्वाद की वजह से ये ल

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Thamir· Correspondent

11 जनवरी 2025· 4 min read

'रेड डायमंड' अमरूद से सालाना 40 -50 लाख रुपये की कमाई करते हैं रतलाम के डीपी धाकड़

'रेड डायमंड' अमरूद से सालाना 40 -50 लाख रुपये की कमाई करते हैं रतलाम के डीपी धाकड़

रतलाम (मध्य प्रदेश )। न्यूज़ पोटली से बात करते हुए डीपी धाकड़ ने बताया कि, 'रेड डायमंड' अमरूद का टेस्ट बहुत ही लाजवाब है। इसमें कच्चा और पक्का दोनों का स्वाद अलग-अलग होता है। अपने स्वाद की वजह से ये लोगों को बहुत पसंद आता है। राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह को भी इस अमरूद का टेस्ट काफी पसंद है। इस अमरूद की बड़ी खासियत ये है कि, बीपी और शुगर के मरीजों के लिए भी बेहतर है। पाचन क्रिया में भी यह बहुत सहायक होता है। इस अमरूद में बीज न के बराबर होते हैं।

अमरूद की इकोनॉमिक्स
डीपी. धाकड़ के भाई जेपी धाकड़ ने न्यूज़ पोटली को अमरूद की इकोनॉमिक्स समझाई। उन्होंने बताया कि 'रेड डायमंड' अमरूद का पौधा लगाने के 18 महीने बाद फल लेना चाहिए। शुरू में फल कम लेना चाहिए, धीरे-धीरे फल ज्यादा लेना चाहिए। अभी हमारा पौधा तीन साल का हो गया है, हमने प्रति पौधा 100 फल लिए हैं। अगले साल 150 फल लेंगे। एक पौधे से लगभग 20-25 किलो अमरूद निकलता है।

हर साल अमरूद का उत्पादन बढ़ता है। एक पौधा लगभग 2-3 हजार रुपये का अमरूद देता है। एक एकड़ में 3 लाख रुपये लागत आती है। लागत निकालकर प्रति एकड़ 4 लाख रुपये का मुनाफा होता है। इस साल 10 एकड़ से 'रेड डायमंड' अमरूद बेचकर 70 लाख तक कि कमाई करेंगे। अगर लागत निकाल दिया जाए तो 40 से 50 लाख रुपये की बचत हो जाएगी।

'रेड डायमंड' अमरूद के लिए कैसे तैयार करें पौधे?

जेपी. धाकड़ कहते हैं, “हमने मई महीने में खेत की गहरी जुताई की, रोटावेटर से जमीन को समतल किया, और बेड बनाए। इसके बाद रॉ से रॉ 12 फीट और पौधों से पौधों की दूरी सात फीट रखकर गड्ढा किया। गड्ढों को पांच-छह दिन सूखने दिया। पौधों को निमटोड की दवाई से ट्रीट किया। सभी पौधों के गड्ढों में गोबर की खाद, नीम, सरसों, अरंडी की खली और कीटनाशक दवाई डाली, ताकि जमीन और गोबर में जो कीड़े हों, वे पौधों में न लगें। मई महीने में पौधों को लगाया था। हमने 10 एकड़ में 4600 पौधे लगाए हैं, प्रत्येक पौधा 165 रुपये का पड़ा है।"

ये भ पढ़े - प्याज और लहसुन की खेती से लाखों की कमाई

जेपी. धाकड़ बताते हैं कि, फूल से लेकर फल आने तक सबके लिए अलग-अलग न्यूट्रीशन देते हैं, ताकि फल अच्छा आए। वो सिंचाई के लिए ऑटोमेशन भी कर चुके हैं, और पौधों में साफ पानी देने के लिए इज़राइल का वाटर फिल्टर लगाया है। 'रेड डायमंड' अमरूद की सुरक्षा तीन लेयर में की जाती है। जब फल 50 ग्राम का होता है, तो एक फोम चढ़ाते हैं, फिर उसे पेपर के लिफाफे से ढकते हैं और झिल्ली से पैक कर देते हैं, ताकि इसमें कीट और मच्छर न लगें और फल सड़ ना जाए। फल को कीट से बचाने का खर्च लगभग 22-23 रुपये प्रति फल आता है।

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आपको बता दें भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटका, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा अमरूद की खेती की जाती है। 2021-22 के हॉर्टिकल्चर के एडवांस क्रॉप रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अमरूद की खेती में वृद्धि हो रही है। 2021-22 में 307 हजार हेक्टेयर में अमरूद की बागवानी की गई, जिससे 4361 हजार मैट्रिक टन उत्पादन हुआ।

PIB की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमरूद के निर्यात में 2013 से अब तक 260% की वृद्धि दर्ज की गई है। अमरूद का निर्यात अप्रैल-जनवरी 2013-14 के 0.58 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अप्रैल-जनवरी 2021-22 में 2.09 मिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।

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