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राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों को जैविक खाद बनाने के लिए दी जाएगी 50 फीसदी की सब्सिडी

राजस्थान सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को जोर सोर से बढ़ावा दे रही है। सरकार बैलों से खेती करने के लिए किसानों को सालाना 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है. वहीं, अब जैविक खाद के लिए एक नयी य

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Pooja Rai· Correspondent

18 अप्रैल 2025· 3 min read

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राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों को जैविक खाद बनाने के लिए दी जाएगी 50 फीसदी की सब्सिडी

राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों को जैविक खाद बनाने के लिए दी जाएगी 50 फीसदी की सब्सिडी

राजस्थान सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को जोर सोर से बढ़ावा दे रही है। सरकार बैलों से खेती करने के लिए किसानों को सालाना 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है. वहीं, अब जैविक खाद के लिए एक नयी योजना 'गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना' शुरू की है. इसके तहत जैविक खाद बनाने वाले किसानों को 10 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी.

राज्य में गौवंश से जैविक खाद उत्पादन करने के लिए कृषि विभाग ने 'गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना' शुरू की है. इसके तहत वर्मी कम्पोस्ट इकाई लगाकर वर्मी कम्पोस्ट को जैविक खेती के लिए उपयोग लिया जाएगा. कम्पोस्ट इकाई लगाने के लिए किसानों को लागत का 50 फीसदी या अधिकतम 10,000 रुपये प्रति इकाई का अनुदान मिलेगा. लाभ लेने के लिए किसानों के लिए कुछ शर्तें रखीं गई है. जैसे आवेदक किसान के पास कम से कम 3 गौवंश होने चाहिए. किसान के पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व होना जरूरी. नाम भूमि न होने पर भू-स्वामित्व में नोशनल शेयरधारक का प्रमाण पत्र हो.

ये भी पढ़ें - भारत में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने सहित प्रोसेसिंग के क्षेत्र में ब्राजील के साथ मिलकर काम करेंगे – कृषि मंत्री चौहान

ऐसे कर सकते हैं आवेदन
ई-मित्र अथवा खुद किसान राजकिसान साथी पोर्टल पर आवेदन आवेदन कर सकते हैं. किसान जन आधार नंबर अथवा SSO आईडी के जरिए आवेदन कर सकेंगे. किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. आवेदन पत्र के ऑनलाइन स्क्रूटनी के समय कोई भी त्रुटि पाई जाती है तो आवेदक मोबाइल पर SMS भेजा जाएगा और कमी पूर्ति के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा. आवेदनकर्ता किसानों की वर्मी कम्पोस्ट इकाई का जिलाधिकारी या उसके प्रतिनिधि फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे.

प्रोसेस समझिए

ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद अधिकारी 7 दिन में ऑनलाइन स्क्रूटनी करेंगे.

'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर आवेदनों का निस्तारण किया जाएगा.

पात्र किसान का प्री वेरिफिकेशन कर 10 दिन में पत्रावली प्रस्तुत करनी होगी.

वर्मी कम्पोस्ट इकाई बनाए जाने की लोकेशन भी पोर्टल पर उपलब्ध करनी होगी.

प्री वेरिफिकेशन के 10 दिन में प्रशासनिक मंजूरी जारी करने होगी.

अगर 45 दिन में काम पूरा नहीं होता है तो प्रशासनिक मंजूरी निरस्त होगी.

सहायक निदेशक कृषि विस्तार सभी निर्देशों की पालना के लिए जवाबदेह होंगे.

इकाई के फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद जिला परिषद राशि का भुगतान खाते में करेगी.

हर जिल में कितने किसान लाभान्वित होंगे, इसके लिए लक्ष्य भी आवंटित किए गए हैं. कुल मिलाकर राज्य सरकार की कोशिश है कि एक बार फिर से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, जिससे भूमि की उर्वरकता बढ़ाने के साथ ही रासायनिक उर्वरकों से होने वाले नुकसान से बचा जा सके.

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