गोंडा (उत्तर प्रदेश)। धान खरीफ सीजन की मुख्य फसल है। देश के ज्यादातर राज्यों में धान की रोपाई की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। कुछ किसानों ने नर्सरी भी कर दी है। अगर आप कम पानी और कम लागत में धान की खेती करना चाहते हैं तो आपको धान की सीधी बिजाई यानि DSR विधि को अपना सकते हैं।
धान की सीधी बुवाई में नर्सरी लगाने की जरुरत नहीं होती है किसान सीधे खेत में इसकी बुवाई कर सकते हैं। इस विधि को पानी, जुताई, खाद, और मजदूरों की जरुरत कम होती है, इसिलए उत्तर प्रदेश समेत देश के ज्यादातर धान उत्पादक राज्यों में सरकारें सीधी बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही हैं। जगह-जगह पर कृषि विज्ञान केंद्रों में इसके लिए ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है।
केवीके के वैज्ञानिकों ने बताए सीधी बिजाई के तरीके
यूपी के गोंडा के मनकापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को धान की सीधी बुवाई के किसानों के लिए प्रशिक्षित करना शुरु किया है।
धान की सीधी बुवाई खेत में नमी होने पर हल्की जुताई करके या बिना जोते हुए खेतों में आवश्यकतानुसार खरपतवारनाशी का प्रयोग कर जीरो टिल मशीन से की जाती है।
गोंडा में मनकापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार पांडेय ने बताया, "धान की सीधी बुवाई से रोपाई एवं लेव लगाने की लागत में बचत होती है एवं फसल समय से तैयार हो जाती है । अगली फसल की बुवाई उचित समय में होने से दोनों फसलों की उत्पादकता बढ़ जाती है।
मानसून आने से पहले करें सीधी बिजाई
इसी कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. रामलखन सिंह के मुताबिक धान की सीधी बुवाई मध्य जून से पहले (मानसून आने के पूर्व) अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि बाद में अधिक नमी या जल जमाव से पौधे प्रभावित न हो। इसके लिए सर्वप्रथम खेत में हल्का पानी देकर उचित नमी आने पर आवश्यकतानुसार हल्की जुताई या बिना जोते जीरो टिल मशीन से बुवाई करनी चाहिए। जुताई यथासंभव हल्की एवं डिस्क हैरो से करनी चाहिए या नानसेलेक्टिव खरपवतवारनाशी जैसे ग्लाईफोसेट या पैराक्वाट या ग्रेमेक्जोन का प्रयोग करके खरपतवारों को नियन्त्रित करना चाहिए।
तीसरे दिन करें खरपतवारनाशी का प्रयोग
डॉ सिंह आगे बताते हैं, "खरपतवारनाशी प्रयोग के तीसरे दिन बाद पर्याप्त नमी होने पर बुवाई करनी चाहिए। जहां पहले ही खेत में पर्याप्त नमी मौजूद हो, वहां आवश्यकतानुसार खरपतवार नियंत्रण हेतु हल्की जुताई या प्रीप्लान्ट नानेसेलेक्टिव खरपवनारनाशी जैसे ग्लाइसेल या ग्रेमेकसोन 2.0 से 2.50 ली. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए इसके बाद 2-3 दिन बाद मशीन से बुवाई कर देनी चाहिए।"
नाली की गहराई 3-4 सेंटीमीटर से ज्यादा न हो
धान की बुवाई करने से पहले जीरो टिल मशीन की सफाई करनी चाहिए, जिसमें बीज की मात्रा 20 से 25 किग्रा. एवं डीएपी की मात्रा 120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करें। बुवाई करते समय इस बात का ध्यान रखें की नाली की गहराई तीन से चार सेंटीमीटर अधिक ना हो। किसानों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सीधी बुवाई करते समय पाटा लगाने की जरुरत नही पड़ती है।
ऐसे करें खरपतवार नियंत्रण
सीधी बुवाई में खरपतवार अधिक आते है । बुवाई के पश्चात 48 घंटे के अन्दर पेन्डीमीथिलिन 30 ईसी की 3.30 लीटर मात्रा को प्रति⁄हे.की दर से 600 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिट्टी में पर्याप्त नमी हो। दवा खरपतवारों के जमने के पूर्व ही उन्हें मार देती है। बाद में यदि चौड़ी पत्ती के खरपतवार दिखाई दें तो 2, 4–डी 80% सोडियम साल्ट की 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए।
मानसून से पहले करें धान की सीधी बुवाई, अच्छी होगी पैदावार: वैज्ञानिक
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