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महाराष्ट्र और कर्नाटक में बढ़ता किसान संकट, आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों राज्यों में किसान आत्महत्याओं की स्थिति बेहद गंभीर है। महाराष्ट्र में जनवरी–सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि कर्नाटक में नवंबर 2025 तक 377 मामले दर्ज हु

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Pooja Rai· Correspondent

12 दिसंबर 2025· 3 min read

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महाराष्ट्र और कर्नाटक में बढ़ता किसान संकट, आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र और कर्नाटक में बढ़ता किसान संकट, आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों राज्यों में किसान आत्महत्याओं की स्थिति बेहद गंभीर है। महाराष्ट्र में जनवरी–सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि कर्नाटक में नवंबर 2025 तक 377 मामले दर्ज हुए। दोनों ही जगह आत्महत्याओं की बड़ी वजह कर्ज़, फसल नुकसान और मौसम है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक—दोनों राज्यों से सामने आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में किसान आत्महत्याओं का संकट कितना गहरा और लगातार बना हुआ है। महाराष्ट्र में जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की है। इसकी मुख्य वजहें कर्ज़ का बढ़ता बोझ, फसल का लगातार खराब होना और अत्यधिक बारिश से होने वाला नुकसान बताई गई हैं। यह जानकारी राज्य के राहत व पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव ने विधान परिषद में एक लिखित जवाब में दी।

2025 में अब तक 6,669 किसान आत्महत्याएँ दर्ज
इन नौ महीनों में आत्महत्या करने वाले किसानों में विदर्भ के 296 और मराठवाड़ा के 212 किसान शामिल हैं। NCRB 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में हर 2 किसान आत्महत्याओं में से एक महाराष्ट्र से होती है। वर्ष 2025 में अब तक महाराष्ट्र में 6,669 किसान आत्महत्याएँ दर्ज हुईं, जिनमें 4,150 मामले महाराष्ट्र के किसानों और 2,519 कृषि मज़दूरों से जुड़े हैं। यह संकेत है कि राज्य में कृषि संकट की स्थिति कितनी गहरी हो चुकी है।

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कर्नाटक में भी चिंताजनक तस्वीर
इसी दौरान कर्नाटक की ताज़ा सरकारी रिपोर्ट भी चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार 15 नवंबर 2025 तक राज्य में कुल 377 किसान आत्महत्याओं के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 331 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 46 मामलों की जाँच अभी भी लंबित है। पूरी हुई जांच में से 310 किसानों को मुआवज़े के योग्य पाया गया है। कर्नाटक के कई जिलों में स्थिति अधिक गंभीर है—कलबुर्गी में 40, बेलगावी में 36, रायचूर में 27, मैसूरू में 32, मांड्या में 15 और चित्रदुर्ग में 25 मामले दर्ज हुए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य के अनेक हिस्सों में किसान आज भी गहरे आर्थिक व मानसून-संबंधी संकटों से जूझ रहे हैं।

सरकार क्या कर रही है?
महाराष्ट्र में सरकार ने कहा है कि किसानों पर आर्थिक दबाव कम करने के लिए फसल के उचित दाम, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, फसल नुकसान का समय पर मुआवज़ा और आपदा राहत केंद्रों की सक्रियता जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसी साल मार्च में मराठवाड़ा और विदर्भ में 250 आत्महत्याएँ रिपोर्ट हुई थीं, जिनमें से 102 को मुआवज़े के योग्य पाया गया, 62 को अपात्र माना गया और 86 की जांच जारी है। योग्य पाए गए 102 किसानों में से 77 परिवारों को 1 लाख रुपये का मुआवज़ा मिल चुका है।

मौजूदा उपाय पर्याप्त नहीं
दोनों राज्यों की रिपोर्टें यह स्पष्ट करती हैं कि किसानों पर प्राकृतिक आपदाओं, कर्ज़ और बाज़ार की अस्थिरता का दबाव लगातार बढ़ रहा है। राहत और मुआवज़े के प्रयास जारी जरूर हैं, लेकिन जमीनी हालात यह बताते हैं कि मौजूदा उपाय किसानों की गहरी आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए अभी भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहे।

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