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मध्य प्रदेश में सोया पंचायत करेंगे किसान संगठन, सोयाबीन की MSP ₹6000 करने की मांग ने पकड़ा जोर

भोपाल। मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती करने वाले किसान बेहाल हैं। स्थिति यह है कि किसानों को मंडी में वह कीमत मिल रही जो उन्हें 10-12 साल पहले मिलती थी। सही कीमत के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने के ब

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Ashok·Correspondent·31 Aug 2024· 4 min read

मध्य प्रदेश में सोया पंचायत करेंगे किसान संगठन, सोयाबीन की MSP ₹6000 करने की मांग ने पकड़ा जोर

मध्य प्रदेश में सोया पंचायत करेंगे किसान संगठन, सोयाबीन की MSP ₹6000 करने की मांग ने पकड़ा जोर

भोपाल। मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती करने वाले किसान बेहाल हैं। स्थिति यह है कि किसानों को मंडी में वह कीमत मिल रही जो उन्हें 10-12 साल पहले मिलती थी। सही कीमत के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने के बाद किसानों ने अब सरकार के सामने खड़े होने का मन बना लिया है। किसान सरकार से 6 हजार या 8 हजार के बीच न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) की मांग कर रहे हैं जबकि सोयाबीन की मौजूदा MSP 4,892 प्रति क्‍विंटल है। अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश में किसान संगठन अब सोयाबीन पंचायत करने जा रहे हैं। इसको लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को किसान नेता राकेश टिकैत ने पत्र लिखकर सोयाबीन की एमएसपी 6,000 रुपए से अधिक किए जाने की मांग की है।

मंदसौर के किसान विनोद पाटीदार बताते हैं क‍ि सोयाबीन की पूरी फसल इल्‍ली खत्‍म कर दे रही है। ऐसे में उत्‍पादन बहुत कम हो गया। इसके बाद जब मंडी जा रहे हैं कि तो हमें 10 साल पुराना दाम म‍िल रहा। हमें मंडी में 3800 से 400 रुपए प्रति क्‍विंटल का भाव म‍िल रहा है। ऐसे में सोयाबीन की खेती करने से कोई फायदा नहीं है। जबकि इस दौरान दवाई, ट्रैक्‍टर और अन्य खर्चे सहित लागत दोगुनी हो गई और उत्पादन आधा।

मध्यप्र देश जिसका एक नाम सोयाप्रदेश भी है। लेकिन यहां के किसानों ने फसल आने के करीब एक महीने पहले ही सरकार का विरोध शुरू कर दिया है और मांग एक ही है कि दाम बढ़ाए जाएं।

देश में करीब 12 मिलियन हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती होती है। सोयाबीन अनुसंधान केंद्र इंदौर की रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में सोयाबीन का उत्पादन करीब 14.9 मिलियन टन हुआ था। खबर का एक पहलू यह भी है कि देश में सोयाबीन किसानों में निराशा बढ़ती जा रही है। इससे आने वाले सालों में उत्पादन कम होने की आशंका भी है। ऐसे में दुनियां के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक देश और दुनियां की एक बड़ी आबादी वाले देश के सामने तेल का एक संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

मध्‍य प्रदेश के किसानों ने पंचायतों में ज्ञापन सौंपने का भी मन बनाया है। आने वाले द‍िनों में प्रदेश की 20 हजार से ज्यादा पंचायतों में सोयाबीन के दामों को लेकर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। मध्यप्रदेश के रतलाम में किसान नेता डीपी धाकड़ इस मूवमेंट को लीड कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों को साेयाबीन के दाम तो मिलना ही चाहिए। जब देश में हर चीज का दाम उसका उत्पादक तय करता है तो किसानों के साथ अन्याय क्याें।

किसान आंदोलन के प्रमुख नेता रहे राकेश टिकैत ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। महाराष्ट्र में भी मांग तेज हो उठी है। रतलाम के सैलाना विधायक, मंदसौर के विधायक विपिन जैन ने भी किसानों की मांग को समर्थन दिया है।

किसान नेता डीपी धाकड़ ने बताया कि किसानों की एक बीघा में सोयाबीन उत्पादन की लागत 10 हजार से 12 हजार रुपए आती है। ऐसे में सोयाबीन के मौजूदा भाव में किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6000 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए। इसके लिए मध्य प्रदेश में सभी सोयाबीन उत्पादक किसान और संयुक्त किसान मोर्चा बड़ा आंदोलन करने जा रहा है।

सोयाबीन किसानों की आपबीती सुन‍िये

“राकेश टिकैत और पूनम पंडित समेत संयुक्त किसान मोर्चा के बड़े नेताओं और अन्य नेताओं ने मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों की इस मांग का समर्थन किया है और उन्हें इस आंदोलन के लिए मालवा क्षेत्र में आमंत्रित किया जाएगा। धाकड़ ने आगे बताया।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को मांग की कि सोयाबीन की फसल का मूल्य बढ़ाकर 6,000 रुपए प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए।

भारत के कुल सोयाबीन का 50% से अधिक उत्पादन करने वाले राज्य से आने वाले दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

उन्‍होंने दावा किया है कि सोयाबीन की फसल का खरीद मूल्य अभी भी 2011 के 4,300 रुपए के आसपास है। उन्‍होंने सिंह ने कहा, “देश के 50% से अधिक सोयाबीन का उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है, लेकिन 2011 से लागत दोगुनी और तिगुनी हो गई है। लेकिन सोयाबीन की कीमत वही बनी हुई है। 2011 में यह 4,300 रुपए प्रति क्विंटल थी और अब भी लगभग उसी के आसपास है।”

‘सोयाबीन की फसल का मूल्य अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन उत्पादन पर निर्भर करता है और संभावना है कि इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन का मूल्य वैसा ही रहेगा जैसा अब तक 4,000 या 4,300 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, हो सकता है वह भी न मिले।’’ उन्होंने सरकारों से अपील की कि सोयाबीन की फसल का एमएसपी 6,000 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं होना चाहिए।

र‍िपोर्ट- गोविंद पाटीदार

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