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मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा कदम, एक बीघा से एक लाख कमाने की योजना लागू

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब लक्ष्य “लखपति बीघा” होगा, यानी एक बीघा में 1 लाख की कमाई। सरकार ने उर्वरक वितरण, ई-मंडी, फसल बी

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Pooja Rai·Correspondent·07 Dec 2025· 4 min read

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा कदम,  एक बीघा से एक लाख कमाने की योजना लागू

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा कदम, एक बीघा से एक लाख कमाने की योजना लागू

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब लक्ष्य “लखपति बीघा” होगा, यानी एक बीघा में 1 लाख की कमाई। सरकार ने उर्वरक वितरण, ई-मंडी, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम किया है। आने वाले तीन साल में सरकार हाईटेक मंडियां, जैविक हाट बाजार, ड्रिप सिंचाई बढ़ाना और पराली जलाना 80% तक कम करना चाहती है। नई योजनाओं से किसानों को सही दाम, बेहतर तकनीक और ज्यादा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कई बड़े उद्देश्य बताए और सटीक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में “लखपति बीघा” का लक्ष्य रखा गया है। यानी ऐसे किसानों को भी सम्मानित किया जाएगा जो एक बीघा से 1 लाख रुपये कमाई कर लेते हैं, ठीक वैसे ही जैसे पहले “लखपति दीदी” योजना थी। इसका मकसद छोटे किसानों को प्रेरित करना और उनकी आय बढ़ाना है।

बिचौलियों से बचाकर सीधे बाजार से जोड़ना
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बिचौलियों से बचाकर सीधे बाजार से जोड़ना ज़रूरी है ताकि उनको सही दाम मिले। इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएँ बनाई जाएँगी। साथ ही उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने, ग्राम स्तर पर सघन (इंटेंसिव) गतिविधियाँ चलाने और हर संभाग की नर्सरी को आदर्श रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। नरवाई (पराली) प्रबंधन के लिए तीन साल की कार्ययोजना भी बनाने को कहा गया। उर्वरक की आसान उपलब्धता के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कार्ययोजना बनानी होगी।बैठक में विभाग ने पिछले दो वर्षों की उपलब्धियाँ और नवाचार प्रस्तुत किए और आने वाले तीन वर्षों की योजनाएँ बतायीं।

उर्वरक वितरण
बताया गया कि 2024–25 में कुल 38.10 लाख मेट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मेट्रिक टन DAP + NPK वितरित किए गए।वहीं 2025–26 में अब तक 29.77 लाख मेट्रिक टन यूरिया और (30 नवम्बर तक) 19.42 लाख मेट्रिक टन DAP + NPK दिया गया है।

फसल बीमा और किसान सहायता
प्रधानमंत्री फसल बीमा (PMFBY) के तहत 2023–24 में 1.77 करोड़ किसानों को मिलाकर ₹961.68 करोड़ के दावे भुगतान किए गए।जबकि 2024–25 में 1.79 करोड़ बीमित कृषकों को ₹1,275.86 करोड़ के दावे दिए गए।अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 2023–24 में ₹4,687 करोड़, 2024–25 में ₹4,849 करोड़ और 2025–26 में अब तक ₹3,374 करोड़ किसानों को दी जा चुकी है।

डिजिटल और मार्केटिंग पहलें
प्रदेश की सभी 259 मंडियों में e-mandi लागू कर दी गई है। इस उपलब्धि के लिए Skotch Gold Award भी मिला।मंडी बोर्ड का MP Farm Gate App किसानों को अपने खेत/खलिहान/गोदाम से सीधे उपज बेचने की सहूलियत देता है। इस नवाचार को Skotch Silver Award मिला।

पराली (नरवाई) प्रबंधन
पराली निपटान के लिए 2023–24 में 1,312, 2024–25 में 1,757 और 2025–26 में अब तक 2,479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए हैं।कृषि यंत्रीकरण में भी प्रगति है। भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल शुरू किए गए।राज्य में उर्वरक वितरण के लिए e-Vikas पोर्टल का पायलट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में चल रहा है। इसे पूरे प्रदेश में फैलाने की योजना है।

ये भी पढ़ें - भारत में यूरिया नीति पर बड़ी समीक्षा, केंद्र सरकार ने संसद में कही ये बात

आगामी योजनाएँ (2025–26 से 2027–28 तक मुख्य लक्ष्य)
साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार — अगले तीन वर्षों में प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका/नगरपालिकाओं में साप्ताहिक हाट लगा दिए जाएंगे, जिससे लोकल जैविक उपज की मार्केटिंग आसानी से हो सके।
Per Drop More Crop (ड्रिप/प्रेशर सिंचाई) — वर्ष 2025–26 में 25,000 हेक्टेयर, 2026–27 में 1,00,000 हेक्टेयर, और 2027–28 में 2,00,000 हेक्टेयर पर लक्ष्य।
पराली जलाने में भारी कमी — 2027–28 तक पराली जलाने की घटनाओं को 80% तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
सभी मंडियों का हाईटेककरण — अगले दो वर्षों में सभी मंडियों को हाई-टेक बनाने की योजना है।
तिलहन व दलहन में आत्मनिर्भरता — इन फसलों के क्षेत्र का विस्तार कर राज्य आत्मनिर्भर बनाना।
कृषि अनुसंधान को जमीन के करीब लाना — प्रयोगशालाओं और खेत के बीच दूरी कम की जाएगी ताकि शोध का फायदा़ सीधे किसानों तक पहुंचे।
हाईटेक नर्सरी और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ — उद्यानिकी और प्रसंस्करण में छोटे उद्यमियों और कृषकों की क्षमता बढ़ाना।

मुख्यमंत्री ने कहा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इन योजनाओं को ज़मीन पर तेज़ी से लागू किया जाए और किसानों तक किसी तरह की देरी या असुविधा न हो। बैठक में किसान कल्याण व कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन व डेयरी राज्यमंत्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव अनुराग जैन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।यह व्यापक पैकेज छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती में नई तकनीक लाने, बाज़ार से जोड़ने और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है।

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