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मध्य प्रदेश: बारिश से अंकुरित होने लगी सोयाबीन, किसान बोले- मुआवजा और फसल बीमा से भरपाई करे सरकार

मध्य प्रदेश के मंदसौर, रतलाम, देवास और नीमच समेत कई जिलों में 28-30 सितंबर तक कई इलाकों में सोयाबीन की फसलें डूबी नजर आईँ। किसान घुटने-घुटने तक पानी में फसल को बचाने के लिए जद्दोजहद करते दिखाई दिए। अं

Arvind Shukla

Arvind Shukla·Founder & Editor-in-Chief·30 Sep 2024· 4 min read

मध्य प्रदेश: बारिश से अंकुरित होने लगी सोयाबीन, किसान बोले- मुआवजा और फसल बीमा से भरपाई करे सरकार

मध्य प्रदेश: बारिश से अंकुरित होने लगी सोयाबीन, किसान बोले- मुआवजा और फसल बीमा से भरपाई करे सरकार

अशोक परमार की रिपोर्ट
मंदसौर (मध्य प्रदेश)। “बारिश से सोयाबीन की वैल्यू आधी रह गई है। मेरे खेत में 50-60 फीसदी सोयाबीन अंकुरित हो गई है। मंडी में उसे 2000 रुपए कुंटल का भाव मिलेगा।” मध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के किसान दशरथ सिंह ने न्यूज पोटली से कहा।
सितंबर के आखिरी हफ्ते में हुई भीषण बारिश कई राज्यों में खरीफ फसलों के लिए तबाही लेकर आई। मध्य प्रदेश के मंदसौर में पकने को तैयार सोयाबीन की फसल का बड़ा हिस्सा जलभराव से प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के चलते कई जगह खेतों में ही सोयाबीन की फसल अंकुरित भी हो गई।

मध्य प्रदेश के मंदसौर, रतलाम, देवास और नीमच समेत कई जिलों में 28-30 सितंबर तक कई इलाकों में सोयाबीन की फसलें डूबी नजर आईँ। किसान घुटने-घुटने तक पानी में फसल को बचाने के लिए जद्दोजहद करते दिखाई दिए। अंचल क्षेत्र के किसानों का कहना है उनकी 80 फीसदी फसल का नुकसान हो चुका है।

मध्य प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में खरीफ सीजन में लगभग 53.00 लाख हेक्टेयर सोयाबीन की खेती होती है। जिसमें मालवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 25-25 लाख हेक्टेयर की है। अगर मंदसौर की बात करें तो यहां करीब 3 लाख 32 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल अनुमानित थी।

मंदसौर के डूब एरिया में अपनी बर्बाद फसल को दिखाते हुए युवा खाखराई गांव के किसान राजेंद्र सिंह ने कहा, “बारिश में जो सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई है, उसके लिए अभी कोई सर्वे शुरु नहीं हुआ है। ग्राम सेवक भी देखने नहीं आया है। बीमारी आदि से पहले ही सोयाबीन फसल कम नहीं रही थी। किसी खेत में डेढ किसी बीघे में 2 बोरी उत्पादन हो रहा है, जबकि लागत 25 हजार प्रति बीघा की आई थी।”
किसान रामेश्वर राठौर कहते हैं, “पिछले 3 दिनों में बहुत बारिश हुई है। सोयाबीन काली पड़ने लगी है। सरकार को चाहिए किसानों को मुआवजा और बीमा राशि देखकर उसकी भरपाई करे। सरकार को चाहिए जैसे कमलानाथ सरकार ने बिना सर्वे मुआवजा दिया था डॉ मोहन सिंह सरकार को भी वैसी करना चाहिए।”

मध्य प्रदेश में मानसून में 18 फीसदी ज्याद बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश में इस मानसून में 18 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। प्रदेश में सामान्य 37.3 इंच के मुकाबले 43.9 इंच बारिश हो चुकी है। एक जून से 30 सितंबर तक मंदसौर में सामान्य से 8 फीसदी ज्याद बारिश दर्ज की गई है। मंदसौर में बारिश का आंकड़ा 34 इंच पहुंच चुका है। मंदसौर में स्थित गांधी सागर बांध भी लबालब हो चुका है। बांध की कुल क्षमता 1313 फीट है, जिसका लेबल 29 सितंबर तक 1311.9 फीट था।

मध्य प्रदेश है सोयाबीन उत्पादन में सबसे आगे

कभी पीला सोना कहे जाने वाले सोयाबीन के उत्पादन में मध्य प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है। किसान कल्याण, कृषि विकास विभाग मध्य प्रदेश, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिशएन ऑफ इंडिया (SOPA) के मुताबिक खरीफ सीजन 2023 के खरीफ सीजन में 52.05 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई थी और 52.470 मिलियन टन का उत्पादन मिला था। सोयाबीन की खेती की बढ़ती लागत और फसल पर बीमारियों के प्रकोप के साथ बदली जलवायु में नुकसान को देखते हुए किसान सोयाबीन से मुंह भी मोड़ रहे हैं। साल 2023 के अगस्त-सितंबर महीने में हुई बारिश से भी किसानों का नुकसान हुआ था।

सोयाबीन की कीमत 6000 रुपए प्रति कुंटल की मांग को लेकर

मध्य प्रदेश के किसान पिछले करीब 1 महीने से सोयाबीन का भाव 6000 रुपए प्रति कुंटल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इल्ली का प्रकोप, बढ़ती खाद-कीटनाशक की लागत को देखते हुए सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है, इसलिए सरकार को 6000 रुपए प्रति कुंटल का दाम करना चाहिए। अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान रैली निकाल चुके हैं, हजारों ट्रैक्टर के साथ मार्च कर चुके हैं, डिजिटल चौपाल लगा चुके हैं।

सोयाबीन का भाव 6000 रुपए प्रति कुंटल करने की मांग

किसान राजेंद्र सिंह कहते हैं, सोयाबीन का भाव 3000-4000 रुपए प्रति कुंटल चल रहा है, इससे ज्यादा हमारी लागत आती है। कम से कम सरकार 6000-7000 रुपए का भाव करना चाहिए। साथ ही जिनका नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।”
दशरथ सिंह कहते हैं, कटाई करने वाले मजदूर खेतों से वापस जा रहे हैं, थ्रेसर मशीन भी नहीं चल पा रही है।” वो आगे कहते हैं, “अभी जो हालात हैं, उसे देखते समस्या ये है कि ये फसल तो गई ही, किसान अगली फसल कैसे लगाएगा?”
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