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भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025: ‘मेड इन इंडिया राइस’ को मिला नया वैश्विक पहचान

भारत मंडपम में हुई भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025 में देश-विदेश से बड़ी भागीदारी रही। कुल 30,435 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए और ऑर्गेनिक चावल के निर्यात में 30% बढ़ोतरी पर चर्चा हुई।कॉन्फ्रेंस

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Pooja Rai·Correspondent·01 Nov 2025· 3 min read

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025: ‘मेड इन इंडिया राइस’ को मिला नया वैश्विक पहचान

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025: ‘मेड इन इंडिया राइस’ को मिला नया वैश्विक पहचान

भारत मंडपम में हुई भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025 में देश-विदेश से बड़ी भागीदारी रही। कुल 30,435 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए और ऑर्गेनिक चावल के निर्यात में 30% बढ़ोतरी पर चर्चा हुई।कॉन्फ्रेंस में गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स और किसानों की स्थिर आय जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।

भारत मंडपम में दो दिन तक चली भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2025 का समापन शुक्रवार को हुआ। यह आयोजन भारत के चावल उद्योग के लिए बेहद खास रहा। इससे भारत के चावल निर्यात को नई रफ्तार मिली और प्रसंस्करण तकनीक के क्षेत्र में नई दिशा दिखाई दी।

यह कॉन्फ्रेंस एपीडा (APEDA) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से आयोजित की गई थी। इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कुल 10,854 आगंतुकों में 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 154 प्रदर्शक (exhibitors) शामिल थे। कार्यक्रम के आखिरी दिन 30,435 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए। इससे यह साफ संकेत मिला कि भारत के चावल उद्योग पर वैश्विक भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आयोजकों ने बताया कि अगला आयोजन 2026 में होगा, जिसकी तारीखें जल्द घोषित की जाएंगी।

ट्रैसेबल सप्लाई चेन पर चर्चा
दूसरे दिन चार अहम पैनल चर्चाएं हुईं। पहले सत्र में “क्वालिटी सर्टिफिकेशन और फूड सेफ्टी” पर बात हुई। एसजीएस के सौमिक मंडल ने बताया कि डिजिटल टैगिंग से हर खेप को ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे सप्लाई चेन पारदर्शी बनेगी।क्यूसीआई की डॉ. प्रियंका सरकार ने छोटे मिल यूनिट्स में गुणवत्ता सुधार की जरूरत बताई, जबकि एपीडा के तरुण बजाज ने किसानों को फसल सुरक्षा और गुणवत्ता के लिए ट्रेनिंग देने की रूपरेखा साझा की।

ऑर्गेनिक चावल का निर्यात 30 प्रतिशत बढ़ा
दूसरे सत्र का विषय “ऑर्गेनिक राइस और उससे जुड़े उत्पाद” रहा।एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि पिछले साल ऑर्गेनिक चावल के निर्यात में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।डॉ. गगनेश शर्मा ने पंजाब में मिट्टी सुधार के प्रयोगों के नतीजे साझा किए और अनिल जाधव ने ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की लागत कम करने की जरूरत पर जोर दिया।

ये भी पढ़ें - गन्ना किसानों के लिए ICAR की नई तकनीक, अब रोपाई होगी आसान, मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा

लॉजिस्टिक्स, क्रेडिट और इंश्योरेंस पर सत्र
तीसरे सत्र में “लॉजिस्टिक्स, क्रेडिट और इंश्योरेंस” से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।ड्रिप कैपिटल के दीपक गांधी ने एक्सपोर्टर्स को सस्ते लोन के विकल्प बताए।वहीं ईसीजीसी की अर्पिता सेन ने ऐसे इंश्योरेंस प्लान की जानकारी दी जो बड़े सौदों में प्रीमियम खर्च को कम करते हैं।

विकसित भारत 2047 में चावल की भूमिका
अंतिम सत्र का विषय था “विकसित भारत 2047 में चावल की भूमिका”।इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के देव गर्ग ने कहा कि किसानों की स्थिर आय के लिए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को स्थिर और संतुलित रखना जरूरी है।वहीं EY इंडिया के सत्यम शिवम सुंदरम ने बताया कि आने वाले समय में कम पानी में होने वाली जलवायु-स्मार्ट खेती और कार्बन क्रेडिट किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते है।

इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस ने भारत के चावल उद्योग को नई दिशा दी।निर्यात बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। इससे किसानों और चावल उद्योग से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है।

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