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बिहार सरकार का चौथा कृषि रोड मैप: तिलहन फसलों को बढ़ावा

बिहार सरकार ने चौथे कृषि रोड मैप के तहत तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 25.85 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाना, तेल आयात पर निर्भरता

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Pooja Rai· Correspondent

7 अक्टूबर 2025· 2 min read

बिहार सरकार का चौथा कृषि रोड मैप: तिलहन फसलों को बढ़ावा

बिहार सरकार का चौथा कृषि रोड मैप: तिलहन फसलों को बढ़ावा

बिहार सरकार ने चौथे कृषि रोड मैप के तहत तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 25.85 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाना, तेल आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। योजना के तहत बीज वितरण, उर्वरक, प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे तिलहन फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों बढ़ेंगे और कृषि क्षेत्र में समग्र विकास होगा।

बिहार सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और देश में खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए चौथा कृषि रोड मैप तैयार किया है। इस रोड मैप में खासतौर पर तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में तिलहन फसलों के उत्पादन और क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए 2585.031 लाख रुपये (लगभग 25.85 करोड़ रुपये) की धनराशि मंजूर की गई है। इस योजना का उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना बल्कि देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करना भी है।

तिलहन फसलों का महत्व
तिलहन फसलें किसानों की आय और देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। इनमें सोयाबीन, सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली प्रमुख हैं। इन फसलों का बढ़ता उत्पादन खाद्य तेल की मांग को पूरा करने, तेल के दाम नियंत्रित करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा। तेलहन फसलें लाभकारी होने के कारण किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं।

ये भी पढ़ें - राजस्थान में अनार की फसल पर रोग का असर, केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन
इस योजना को राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन के तहत लागू किया जाएगा। मंजूर धनराशि का उपयोग बीज वितरण, उर्वरक सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रम, आधुनिक उपकरण और कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इससे किसानों को तिलहन फसलों का बेहतर प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

योजना से किसानों को लाभ
इस योजना से न केवल तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ेगा बल्कि उत्पादन में भी सुधार होगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे। साथ ही, देश का तेल आयात कम होगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। तिलहन फसलों की बढ़ोतरी से कृषि क्षेत्र में समग्र विकास और खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ेगी।

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