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बदलते मौसम में पूसा की किसानों को सलाह, हवा की गति कम होने पर सुबह या शाम को करें सिंचाई

दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ता जा रहा है। अभी से लोगों को गर्मी सताने लगी है। इस मौसम में किसानों के लिए अपनी फसलों का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में पूसा ने किसानों को खड़ी फसलों और सब्जियों म

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Pooja Rai·Correspondent·07 Apr 2025· 3 min read

बदलते मौसम में पूसा की किसानों को सलाह, हवा की गति कम होने पर सुबह या शाम को करें सिंचाई

बदलते मौसम में पूसा की किसानों को सलाह, हवा की गति कम होने पर सुबह या शाम को करें सिंचाई

दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ता जा रहा है। अभी से लोगों को गर्मी सताने लगी है। इस मौसम में किसानों के लिए अपनी फसलों का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में पूसा ने किसानों को खड़ी फसलों और सब्जियों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। सलाह में ये भी कहा है कि किसान हवा की गति कम होने पर सुबह या शाम को फसलों में सिंचाई करें।

मूंग किसानों के लिए पूसा ने सलाह दी है कि किसान मूंग की फसल की बुवाई के लिए उन्नत बीजों का उपयोग करें, जैसे पूसा विशाल, पूसा रत्ना, पूसा-5931, और अन्य बीजों को राईजोबीयम और फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से उपचारित करना न भूलें।
किसान अपनी कटाई हुई फसलों को अच्छे से बांधकर और ढककर रखें। ऐसा न करने पर तेज हवा या तूफान से फसल एक खेत से दूसरे खेत में फैल सकती है, जिससे नुकसान हो सकता है। इसके अलावा कटाई के बाद किसान अपने फसलों को भण्डारित करने से पहले उन्हें अच्छी तरह सुखा लें ताकि नमी के कारण फसल सड़ न जाए। यदि नमी के कारण फसलों को बंद रखा जाए तो फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

ये भी पढ़ें - उत्तर प्रदेश में कृषि सखियां सिखाएंगी प्राकृतिक खेती, मिलेगा 5,000 रुपये वेतन

गेहूं की देर से बुवाई करने वाले किसान ये करें
गेहूं की देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए पूसा ने कहा है कि तापमान में वृद्धि से बचाव के लिए किसान पछेती गेहूं की फसल में 2% पोटेशियम नाइट्रेट या 0.2% म्यूरेट ऑफ पोटाश उर्वरक का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। इसके अलावा सब्ज़ी किसान अपने फसल को अधिक तापमान से बचाने के लिए, टमाटर, मिर्च और बैंगन की फसलों में 2% नेफथालिन एसीटिक एसिड (NAA) का घोल छिड़कें इससे फलों का विकास नहीं रुकेगा और नुकसान कम होगा।

सब्ज़ी किसान इन बातों का रखें ध्यान
टमाटर, मटर, बैंगन और चना की फसलों को फल छेदक/फली छेदक कीट से बचाने के लिए किसान खेत में पक्षी का घोसला लगाएं. इसके अलावा, कीट की निगरानी के लिए फिरोमोन प्रपंश का उपयोग करें यदि कीटों की संख्या अधिक हो, तो बी.टी. कीटनाशी का छिड़काव करें। इसके अलावा अधिक तापमान से बचाने के लिए, टमाटर, मिर्च और बैंगन की फसलों में 2% नेफथालिन एसीटिक एसिड (NAA) का घोल छिड़कें इससे फलों का विकास नहीं रुकेगा और नुकसान कम होगा। इस मौसम में इन सरल उपायों को अपनाकर किसान अपनी फसलों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं।

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