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बढ़ती गर्मी से महंगा हुआ च‍िकन, फ‍िर भी क‍िसान और व्‍यापारी दोनों को हो रहा नुकसान

लखनऊ। दक्षिण और पूर्वी भारत में भीषण गर्मी, पानी की कमी के कारण चिकन 25% से अधिक महंगा हो चुका है। ज्‍यादा गर्मी की वजह से उत्‍पादन भी प्रभावित हुआ है। इस महीने की शुरुआत से अब तक चीकन की कीमत 15 रुपए

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NP· Correspondent

7 जून 2024· 3 min read

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बढ़ती गर्मी से महंगा हुआ च‍िकन, फ‍िर भी क‍िसान और व्‍यापारी दोनों को हो रहा नुकसान

बढ़ती गर्मी से महंगा हुआ च‍िकन, फ‍िर भी क‍िसान और व्‍यापारी दोनों को हो रहा नुकसान

लखनऊ। दक्षिण और पूर्वी भारत में भीषण गर्मी, पानी की कमी के कारण चिकन 25% से अधिक महंगा हो चुका है। ज्‍यादा गर्मी की वजह से उत्‍पादन भी प्रभावित हुआ है। इस महीने की शुरुआत से अब तक चीकन की कीमत 15 रुपए प्रत‍ि क‍िलो तक बढ़ चुकी है। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में च‍िकन की खुदरा कीमत 250 से 270 रुपए प्रत‍ि क‍िलो तक पहुंच गई जो अप्रैल महीने में 220 से 240 रुपए के बीच में थी। मानसून की बारिश शुरू होने के बाद ही चिकन की कीमतों में नरमी आने की संभावना है।

च‍िकन की सबसे ज्‍यादा कीमत बेंगलुरु में बढ़ी है। इसकी वजह से वहां च‍िकन बेचने वाले दुकानदारों की कमाई भी प्रभावित हुई है। "व्यापार ठीक नहीं चल रहा है। आमतौर पर रविवार को हम 400 से 500 किलो चिकन बेचते थे और अब यह घटकर 150 से 200 किलो रह गया है। गर्मी के मौसम के कारण फार्म में चिकन की मात्रा कम हो गई है और इसलिए आपूर्ति कम हो गई है। खुदरा मूल्य 300 से 320 रुपए हो गया है और ग्राहक नहीं हैं। थोक में यह छिलके सहित 220 रुपए प्रति किलो और बिना छिलके के 255 रुपए है, फिर भी ग्राहक नहीं आ रहे हैं,"। एक अन्य दुकान मालिक ने कहा कि आपूर्ति कम है और यह बाहर से आ रही है इसलिए दर बढ़ गई है।

एक दूसरे दुकान मालिक बताया क‍ि जो लोग एक किलो खरीदते थे, वे अब आधा किलो खरीद रहे हैं। ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं। पहले बहुत ग्राहक आते थे। 150 से 180 रुपए किलो तक का भाव सही रहता था। बारिश की कमी और गर्मी के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है। 40 दिन में बढ़ने वाला मुर्गा 60 दिन में बड़ा हो रहा है। मुर्गे कम हो रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण फार्मिंग कम हो गई है। फार्मिंग 50 फीसदी रह गई है। बारिश शुरू हो जाए तो दाम कम हो जाएंगे।"

महाराष्ट्र के पोल्ट्री ब्रीडर वसंतकुमार शेट्टी बताते हैं, "ज्‍यादा गर्मी की वजह से मुर्गी पालक क‍िसानों को नुकसान हो रहा है। 10 से 15% मुर्गियों की मौत हो जा रही है।" पिछले साल पोल्ट्री किसानों को लंबे समय तक घाटा उठाना पड़ा था क्योंकि कीमतें उत्पादन लागत से कम थीं।

तेलंगाना पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन के महासचिव जी रमेश बाबू कहते हैं क‍ि फरवरी से चिकन की कीमतों में सुधार आना शुरू हुआ। गर्मियों में पक्षियों का वजन धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे आपूर्ति कम हो जाती है, जबकि इस गर्मी में चुनावों के कारण मांग अधिक थी।" आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में चिकन की कीमतें फार्म गेट पर 135-140 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं और खुदरा में 300 रुपए प्रति किलोग्राम को पार कर गई थीं। क्योंकि ज्‍यादा तापमान ने पक्षियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला था।

महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई किसानों ने पानी की कमी की आशंका के चलते अपने च‍िकन की संख्या में लगभग 20% की कमी की है। खडकेश्वर हैचरी के अध्यक्ष संजय नलगिरकर कहते हैं , "एक पक्षी को सफाई, पीने और फॉगर्स का उपयोग करके तापमान को ठंडा रखने के लिए औसतन 1.5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।"

भारतीय पोल्ट्री संघ के उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता का कहना है क‍ि उत्तर भारत में पोल्ट्री किसानों ने पक्षियों की संख्या में कमी नहीं की क्योंकि उनके पास पर्याप्त पानी उपलब्ध है। हालांकि गर्मी में कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। तापमान में वृद्धि के कारण मृत्यु मुर्गियों की मृत्‍यु दर बढ़ी है। ऐसे में अगर तापमान कम नहीं हुआ तो आने वाले द‍िनों में कीमत और बढ़ सकती है।

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