Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?
एग्री बुलेटिन

फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फसलों और लोगों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए खाद की कीमतों में सुधार, ज़मीन और फसल के अनुसार सही खाद के इस्तेमाल और बे

NP

Pooja Rai· Correspondent

19 जनवरी 2026· 3 min read

agriculture newsICRIER (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस)kheti kisani
फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फसलों और लोगों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना बेहद ज़रूरी है। इसके लिए खाद की कीमतों में सुधार, ज़मीन और फसल के अनुसार सही खाद के इस्तेमाल और बेहतर खेती के तरीकों पर ज़ोर दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि देश में अनाज की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद बच्चों में कुपोषण बड़ी समस्या बना हुआ है, जिसका एक अहम कारण मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है।

भारत में फसलों की सेहत और लोगों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए अब मिट्टी की सेहत सुधारना बेहद ज़रूरी हो गया है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए खाद की कीमतों को लेकर सही नीतियाँ बनानी होंगी और किसानों को फसल व ज़मीन के अनुसार सही खाद देने पर ज़ोर देना होगा।

यह रिपोर्ट ICRIER (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस) की एक पॉलिसी ब्रीफ का हिस्सा है, जिसे कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी समेत चार विशेषज्ञों ने तैयार किया है। रिपोर्ट में खेती को सुधारने के लिए तीन ‘P’ मॉडल की बात की गई है — नीति (Policy), उत्पाद (Products) और खेती के तरीके (Practices)।

खाद नीति में बदलाव क्यों ज़रूरी?
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर खाद की कीमतें तर्कसंगत हों और किसानों को सही तरह से सहायता मिले, तो ज़मीन की जांच के आधार पर, फसल के अनुसार और ज़रूरत जितनी ही खाद देने वाली तकनीकें तेज़ी से अपनाई जा सकती हैं। इससे मिट्टी की जैविक, रासायनिक और भौतिक सेहत सुधरेगी और फसलें भी बेहतर होंगी।

सिर्फ पेट भरना काफी नहीं
रिपोर्ट कहती है कि जब तक मिट्टी में पूरे पोषक तत्व नहीं होंगे, तब तक वह पोषण से भरपूर भोजन नहीं दे सकती।
इसलिए मिट्टी की सेहत सिर्फ खेती का नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा है।

ये भी पढ़ें - देश की 89% चीनी सिर्फ तीन राज्यों से, NFCSF के आंकड़ों का खुलासा

भारत में खाना भरपूर, लेकिन पोषण की कमी
भारत ने पिछले कई दशकों में खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी छलांग लगाई है।1960-61 में जहाँ उत्पादन 82 मिलियन टन था।वहीं 2024-25 में यह बढ़कर करीब 358 मिलियन टन हो गया।भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मुफ्त अनाज भी देता है।इसके बावजूद, बच्चों में कुपोषण एक बड़ी समस्या बनी हुई है।NFHS-5 के अनुसार 35.5% बच्चे ठिगने हैं, 32.1% बच्चे कम वज़न के हैं और 19.3% बच्चे बहुत कमज़ोर हैं।

मिट्टी और कुपोषण का सीधा संबंध
रिपोर्ट बताती है कि मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी फसल और भोजन दोनों की गुणवत्ता को घटा देती है।
उदाहरण के लिए अगर मिट्टी में जिंक की कमी हो तो गेहूं और चावल जैसे अनाजों में भी जिंक कम हो जाता है।इससे बच्चों में लंबाई न बढ़ना और मानसिक विकास प्रभावित होना जैसी समस्याएँ होती हैं।

रिपोर्ट साफ़ कहती है कि अब भारत में खाद्य सुरक्षा का मतलब सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर भोजन देना होना चाहिए, और इसकी शुरुआत होती है — स्वस्थ मिट्टी से।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs