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पोषण और स्वाद से भरपूर लीची की बागवानी करें किसान, बिहार सरकार दे रही है 50 फीसदी की सब्सिडी

अगर आप बिहार के निवासी हैं और लीची की बागवानी करना चाहते हैं तो ये आपके लिये अच्छा मौका है. बिहार सरकार राज्य में लीची का उत्पादन बढ़ाने और किसानों को इसकी बागवानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सब्सि

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Pooja Rai· Correspondent

21 अप्रैल 2025· 2 min read

पोषण और स्वाद से भरपूर लीची की बागवानी करें किसान,  बिहार सरकार दे रही है 50 फीसदी की सब्सिडी

पोषण और स्वाद से भरपूर लीची की बागवानी करें किसान, बिहार सरकार दे रही है 50 फीसदी की सब्सिडी

अगर आप बिहार के निवासी हैं और लीची की बागवानी करना चाहते हैं तो ये आपके लिये अच्छा मौका है. बिहार सरकार राज्य में लीची का उत्पादन बढ़ाने और किसानों को इसकी बागवानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी दे रही है. एकीकृत बागवानी मिशन के तहत किसानों को लीची की खेती के लिए 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है. लीची की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर कुल 2 लाख रुपये की लागत आती है. इसमें 50 फीसदी का अनुदान मिलेगा. यानी किसानों को 1 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा. ऐसे में लीची की कमर्शियल खेती मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लीची उत्पादक देश है. देश में कुल लीची उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा बिहार में ही होता है. शाही लीची न केवल बिहार में बल्कि देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध है. यहाँ उत्पादित लीची को विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है.

ये भी पढ़ें - अमेरिका के न्यूयॉर्क में भारतीय भगवा अनार की धूम, APEDA ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से 14 टन अनार किया निर्यात

बाग लगाने के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सही
उत्तर भारत में जुलाई-अगस्त का महीना लीची का बाग लगाने के सही समय है.पूरे पौधे को उगाने के लिए पौधों को 15 दिनों तक रोजाना पानी देने की जरूरत होती है। एक बार पौधा लग जाने के बाद जरूरत के हिसाब से सिंचाई की जा सकती है। पौधों के चारों ओर सूखी घास या पॉलीथीन फर्श बिछा दिया जाता है।
अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. योजना से संबंधित अधिक जानकारी हासिल करना चाहते हैं, तो स्थानी उद्यान अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं.

सूक्ष्म सिंचाई के लिए भी मिल रही सब्सिडी
इसके अलावा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को 80 फीसदी तक अनुदान मिलेगा. यह तकनीक न केवल जल उपयोग की दक्षता को बढ़ाती है, बल्कि इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार होता है.

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