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पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गई है

पिछले आठ सालों में उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन और कृषि विकास दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले किसानों की स्थिति दयनीय थी, लेकिन अब हमारी सरकार की नीतियो

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News Potli

7 अप्रैल 2025· 3 min read

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पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गई है

पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गई है

पिछले आठ सालों में उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन और कृषि विकास दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले किसानों की स्थिति दयनीय थी, लेकिन अब हमारी सरकार की नीतियों और योजनाओं से कृषि क्षेत्र में क्रांति आई है। किसानों की आय बढ़ी, खाद्यान्न उत्पादन में 20% वृद्धि हुई और गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान किया गया। उन्होंने बताया कि साल 2016-17 में कृषि विकास दर 5.1 प्रतिशत थी। वहीं 2023-24 में यह दर बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गई है।

आंकड़ों से समझें तो 2016-17 में प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन 557 लाख मीट्रिक टन था। वहीं, 2023-24 में यह उत्पादन बढ़कर 669 लाख मीट्रिक टन रिकॉर्ड हो गया है। इतना ही नहीं खाद्यान्न उत्पादकता भी 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है। इसके अलावा राज्य में तिलहन उत्पादन में 128 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 2016-17 में तिलहन उत्पादन 12.40 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2023-24 में 28.31 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में फल और सब्जियों का उत्पादन 400 लाख टन पहुंच चुका है।

कृषि सखियां सिखाएंगी प्राकृतिक खेती के तरीके
अब राज्य की योगी सरकार खेती को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में प्रदेश के 49 जिलों में 85,710 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। बुंदेलखंड के सभी जिलों में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गौ आधारित प्राकृतिक खेती शुरू की गई है। सरकार के मुताबिक़ जल्द ही सभी जिलों में इसे करने की तैयारी है। इसके लिए हर एक ज़िले में दो कृषि सखियां नियुक्त की जायेंगी, जो किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके सिखाएंगी ।

ये भी पढ़ें - उत्तर प्रदेश में कृषि सखियां सिखाएंगी प्राकृतिक खेती, मिलेगा 5,000 रुपये वेतन

तकनीक को बढ़ावा
खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएम कुसुम योजना के तहत 76,189 से अधिक सोलर पंप आवंटित किए गए हैं। साल 2019 में शुरू की गई सीएम कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत 63 हजार से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा है। वहीं, खेती में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एफपीओ और कृषि स्नातकों को ड्रोन पर 40 से 50 प्रतिशत का अनुदान दिया गया है। प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन एग्रीजंक्शन योजना के तहत 6,608 एग्रीजंक्शन स्थापित किए गए, जो किसानों के लिए वन-स्टॉप शॉप की तरह काम कर रहे हैं।

जनवरी 2025 तक 125 मंडियों में 6,999 करोड़ रुपये का डिजिटल व्यापार दर्ज
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है। सीडलिंग उत्पादन से 60 हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। बीते 8 वर्षों में 878,192.23 करोड़ रुपये का फसली ऋण वितरित किया गया है। मुख्यमंत्री कृषक कल्याणकारी योजना के तहत 79,796 किसानों को 134.76 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया।
मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और आधुनिकता लाने के लिए सरकार ने ई-मंडी योजना शुरू की। जनवरी 2025 तक 125 मंडियों में 6,999 करोड़ रुपये का डिजिटल व्यापार दर्ज किया गया। 922 ई-लाइसेंस जारी हुए और 4.18 करोड़ ऑनलाइन पर्चियां दी गईं। वहीं, 27 नई मंडियों का आधुनिकीकरण हुआ है और 85 ग्रामीण हाट बाजारों का निर्माण पूरा किया गया है। किसानों को बाजार भाव और मौसम की जानकारी मुफ्त में देने के लिए यूपी मंडी भाव ऐप शुरू किया गया।

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