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पराली जलाने के सीजन की शुरुआत: पहले हफ्ते में 64 मामले दर्ज, पंजाब सबसे आगे

पराली जलाने के सीज़न के पहले हफ़्ते में 64 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 15% कम हैं। इनमें सबसे ज्यादा 56 मामले पंजाब से आए। पिछले पूरे सीज़न में घटनाएं 34% घटी थीं। सरकार जागरूकता अभियान और मशीनरी

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Pooja Rai· Correspondent

24 सितंबर 2025· 3 min read

agriculture newsCAQM (Commission for Air Quality Management)CREAMS (Consortium for Research on Agroecosystem Monitoring and Modeling from Space)
पराली जलाने के सीजन की शुरुआत: पहले हफ्ते में 64 मामले दर्ज, पंजाब सबसे आगे

पराली जलाने के सीजन की शुरुआत: पहले हफ्ते में 64 मामले दर्ज, पंजाब सबसे आगे

पराली जलाने के सीज़न के पहले हफ़्ते में 64 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 15% कम हैं। इनमें सबसे ज्यादा 56 मामले पंजाब से आए। पिछले पूरे सीज़न में घटनाएं 34% घटी थीं। सरकार जागरूकता अभियान और मशीनरी उपलब्ध करा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इस सीज़न (15 सितंबर से 30 नवंबर) के पहले हफ़्ते में 64 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले साल के 75 मामलों से लगभग 15% कम हैं।

किस राज्य में कितने मामले?
IARI के तहत काम कर रहे CREAMS (Consortium for Research on Agroecosystem Monitoring and Modeling from Space) के अनुसार, इस साल पंजाब से 56 मामले सामने आए हैं (पिछले साल 52), हरियाणा में 3 (पिछले साल 16), उत्तर प्रदेश में 4 (पिछले साल 3), राजस्थान में 1 (पिछले साल 0), जबकि दिल्ली में कोई मामला नहीं मिला। मध्यप्रदेश में भी इस बार कोई घटना नहीं हुई, जबकि पिछले साल 4 मामले थे।

सबसे ज्यादा मामले पंजाब से
पिछले पूरे सीज़न (2024) में पराली जलाने की कुल घटनाएं 37,602 रहीं, जो 2023 के मुकाबले 34% कम थीं। इनमें सबसे ज्यादा मामले पंजाब (10,909) से आए थे। इसके अलावा हरियाणा (1,406), उत्तर प्रदेश (6,142), दिल्ली (13), राजस्थान (2,772) और मध्यप्रदेश (16,360) में पराली जलाने के मामले दर्ज हुए थे। इन सभी घटनाओं की निगरानी सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और CAQM (Commission for Air Quality Management) के तय प्रोटोकॉल से की गई।

ये भी पढ़ें - उपज खरीद को लेकर बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश और गुजरात में उड़द, तूर, मूंग, मूंगफली, तिल और सोयाबीन की खरीद को मंजूरी

गेहूं की बुवाई के लिए समय पर्याप्त
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के पास गेहूं की बुवाई (जो आमतौर पर नवंबर के पहले हफ़्ते से शुरू होती है) से पहले पर्याप्त समय है, इसलिए अभी पराली जलाने की कोई ज़रूरत नहीं है। सरकार ने भी भरोसा दिलाया है कि खेत समय पर गेहूं की बुवाई के लिए तैयार कर दिए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसान पहले से ही खेतों से रेत हटाने का काम कर रहे हैं।
आमतौर पर यह तर्क दिया जाता है कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय मिलने के कारण किसान पराली जलाने को मजबूर होते हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना दिल्ली-एनसीआर की वायु प्रदूषण समस्या का एक बड़ा कारण माना जाता है।

पंजाब में क्या हो रहा?
इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के बीच जागरूकता अभियान चला रही है और उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी उपलब्ध करा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब सरकार से पूछा था कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई क्यों न की जाए। इस पर मान ने उम्मीद जताई कि ऐसी नौबत नहीं आएगी कि अन्नदाता पर एफआईआर दर्ज करनी पड़े, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सभी को अदालत के फैसले का पालन करना होगा।

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