Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

पटना, रायपुर और देहरादून में खुलेंगे APEDA के नए ऑफिस, किसानों को होगा फायदा

एपीडा (APEDA) पटना, रायपुर और देहरादून में नए रीजनल ऑफिस खोल रहा है ताकि कृषि निर्यातकों को मदद मिल सके। भारत का कृषि निर्यात 2024-25 में 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। एपीडा जीआई टैग वाले, ऑर्गेनिक औ

NP

Pooja Rai· Correspondent

23 अगस्त 2025· 2 min read

पटना, रायपुर और देहरादून में खुलेंगे APEDA के नए ऑफिस, किसानों को होगा फायदा

पटना, रायपुर और देहरादून में खुलेंगे APEDA के नए ऑफिस, किसानों को होगा फायदा

एपीडा (APEDA) पटना, रायपुर और देहरादून में नए रीजनल ऑफिस खोल रहा है ताकि कृषि निर्यातकों को मदद मिल सके। भारत का कृषि निर्यात 2024-25 में 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। एपीडा जीआई टैग वाले, ऑर्गेनिक और प्रोसेस्ड उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए खास कदम उठा रहा है। साथ ही, पैकेजिंग सुधार, शोध और किसानों को ट्रेनिंग देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा मजबूत की जा रही है।

एपीडा (APEDA), जो वाणिज्य मंत्रालय का हिस्सा है, अब पटना, देहरादून और रायपुर में अपने तीन नए रीजनल ऑफिस खोलने जा रहा है। इनका उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यातकों को मदद देना और उनके शिपमेंट को आसान बनाना है। अभी तक एपीडा के देशभर में 16 दफ्तर हैं, जैसे बेंगलुरु, मुंबई, श्रीनगर, गुवाहाटी और भोपाल।

एपीडा का काम कृषि उत्पादों के निर्यात से जुड़ी उद्योगों का विकास करना, निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन करना, क्वालिटी स्टैंडर्ड तय करना, पैकेजिंग सुधारना और मार्केटिंग में मदद करना है।

2024-25 में कृषि निर्यात 50 अरब डॉलर से ज्यादा
बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का कृषि निर्यात 2024-25 में 50 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। इसे और बढ़ाने के लिए एपीडा खास कदम उठा रहा है, जैसे जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देना, परंपरागत उत्पादों (जैसे अनाज और भैंस का मांस) का निर्यात बढ़ाना और नए उत्पाद (जैसे ऑर्गेनिक फसलें, प्रोसेस्ड फल और जूस) को प्रमोट करना।

ये भी पढ़ें - नकली केमिकल से सोयाबीन की फसल को नुकसान, कंपनी का लाइसेंस निलंबित

एपीडा इसपर कर रहा है काम
निर्यात को और मजबूत करने के लिए एपीडा जल्दी ख़राब होने वाले उत्पादों के लिए समुद्री प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है, ताकि इन्हें सस्ते और टिकाऊ तरीके से विदेश भेजा जा सके। साथ ही, बाजरा और चावल से बने वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स पर शोध भी किया जा रहा है। पैकेजिंग को बेहतर बनाया जा रहा है, जिससे शेल्फ लाइफ बढ़े और क्वालिटी बनी रहे। इसके अलावा किसानों और निर्यातकों को ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के हिसाब से काम कर सकें।

ये देखें -

NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min