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देश में पशु चारे की 23 से 32 फीसदी तक की कमी, केंद्र सरकार ने कहा- राज्‍यों के साथ म‍िलकर दूर करेंगे कमी

भारत में पशु चारे की कमी है। सरकार ने खुद माना है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने बुधवार को संसद में बताया कि ये बात ब‍िल्‍कुल सही है क‍ि देश चारे की कमी का सामना कर रहा है। उन्‍हो

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Indal· Correspondent

1 अगस्त 2024· 3 min read

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देश में पशु चारे की 23 से 32 फीसदी तक की कमी, केंद्र सरकार ने कहा- राज्‍यों के साथ म‍िलकर दूर करेंगे कमी

देश में पशु चारे की 23 से 32 फीसदी तक की कमी, केंद्र सरकार ने कहा- राज्‍यों के साथ म‍िलकर दूर करेंगे कमी

भारत में पशु चारे की कमी है। सरकार ने खुद माना है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने बुधवार को संसद में बताया कि ये बात ब‍िल्‍कुल सही है क‍ि देश चारे की कमी का सामना कर रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

इस सवाल पर कि क्या सरकार किसानों के सामने पशु चारे की कमी से अवगत है? ललन सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, "हां सर। देश में चारे की कमी है"। उन्होंने कहा आगे कहा कि आईसीएआर-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) झांसी ने अनुमान लगाया है कि देश में हरे और सूखे चारे की क्रमशः 11.24-32 प्रतिशत और 23 प्रतिशत कमी है।"

यह भी पढ़ें- बिहार के 10,000 गांवों में होगा Digital crop survey, लेकिन इससे क‍िसानों का क्‍या फायदा होगा?

उन्होंने बताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग 2014-15 से चारा और चारा विकास पर उप मिशन के साथ केंद्र प्रायोजित योजना राष्ट्रीय पशुधन मिशन को लागू करके राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग कर रहा है।

जुलाई 2021 में इस योजना को निम्नलिखित घटकों के साथ चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से पुनर्गठित किया गया था-

(i) गुणवत्ता वाले चारा बीज उत्पादन के लिए सहायता

(ii) चारे पर उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम

(iii) गैर वन बंजर भूमि/रेंजलैंड/चारागाह/गैर-कृषि योग्य भूमि से चारा उत्पादन

(iv) वन भूमि से चारा उत्पादन। इसके अलावा कृषि विभाग राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से केंद्रीय क्षेत्र की योजना '10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन और संवर्धन' को एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में लागू कर रहा है ताकि 100 एफपीओ, मुख्य रूप से चारा-केंद्रित एफपीओ का गठन और प्रचार किया जा सके।

भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई झांसी-आईसीएआर) ने भी 25 राज्यों के लिए चारा संसाधन विकास योजना तैयार की है, ताकि राज्यों में उनके फसल पैटर्न और पशुधन प्रजातियों के आधार पर चारे की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

एक अलग प्रश्न का उत्तर देते हुए सिंह ने कहा कि देश में दूध का उत्पादन 2018-19 में 187.7 मिलियन टन से बढ़कर 2022-23 में 230.6 मिलियन टन हो गया है। सबसे अधिक दूध उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश है। उन्होंने कहा कि ये राज्य मिलकर देश के कुल दूध उत्पादन में 53.08 प्रतिशत का योगदान करते हैं। उन्‍होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है जो वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। मंत्री ने कहा, "पिछले 9 वर्षों में दूध उत्पादन लगभग 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, प्रति व्यक्ति उपलब्धता 459 ग्राम प्रति दिन है और घरेलू मांग को पूरा करने में आत्मनिर्भर है।"

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