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देश में चीनी उत्पादन 10.50 लाख टन, जानिए क्या है वजह?

इस साल चीनी उत्पादन तेज शुरुआत के साथ 10.50 लाख टन पहुंच गया है, क्योंकि ज्यादा मिलों ने जल्दी क्रशिंग शुरू की। 2025-26 में कुल 350 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद 20–25 लाख

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Pooja Rai·Correspondent·18 Nov 2025· 3 min read

देश में चीनी उत्पादन 10.50 लाख टन, जानिए क्या है वजह?

देश में चीनी उत्पादन 10.50 लाख टन, जानिए क्या है वजह?

इस साल चीनी उत्पादन तेज शुरुआत के साथ 10.50 लाख टन पहुंच गया है, क्योंकि ज्यादा मिलों ने जल्दी क्रशिंग शुरू की। 2025-26 में कुल 350 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद 20–25 लाख टन अतिरिक्त चीनी बचेगी जिसे निर्यात किया जा सकता है। मिलें MSP और एथेनॉल की कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं, जबकि किसानों को AI आधारित गन्ना खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है।

भारत में इस साल चीनी उत्पादन की शुरुआत अच्छी रही है। 1 अक्टूबर से शुरू हुए मौजूदा शुगर सीजन में 15 नवंबर तक देश में 10.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 7.1 लाख टन था। इसका कारण है कि इस बार ज्यादा शुगर मिलों ने जल्दी क्रशिंग शुरू कर दी और गन्ने से रस निकलने की रिकवरी दर भी बेहतर रही।

औसत रिकवरी 8.2% रही
हालांकि, महाराष्ट्र में बारिश और कर्नाटक–महाराष्ट्र में गन्ने के दाम को लेकर विरोध के चलते कुछ जगहों पर क्रशिंग की रफ्तार धीमी हुई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फ़ैक्ट्रीज़ (NFCSF) के मुताबिक, इस बार 325 मिलें क्रशिंग शुरू कर चुकी हैं, जबकि पिछले साल इसी दौरान केवल 144 मिलें चल रही थीं। अब तक 128 लाख टन गन्ना पेरा जा चुका है, और औसत रिकवरी 8.2% रही है, जो पिछले साल के 7.8% से अधिक है।

कुल चीनी उत्पादन 350 लाख टन तक
पिछले साल महाराष्ट्र में चुनावों के कारण क्रशिंग नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई थी, इस वजह से उत्पादन भी कम था।NFCSF का अनुमान है कि 2025-26 सीज़न में कुल चीनी उत्पादन 350 लाख टन तक पहुंच सकता है। इसमें महाराष्ट्र से 125 lt, उत्तर प्रदेश से 110 lt और कर्नाटक से 70 lt उत्पादन आने की उम्मीद है। ये तीनों राज्य मिलकर देश की 75–80% चीनी देते हैं।

ये भी पढ़ें - रबी फसलों की बुवाई में तेजी, इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद

15 lt चीनी के निर्यात की मंजूरी
देश के पास पिछले सीजन से 50 lt स्टॉक बचा हुआ है। इसमें से लगभग 35 lt चीनी एथेनॉल उत्पादन में जाएगी और 290 lt चीनी घरेलू खपत में चलेगी। इसके बाद भी भारत के पास 20-25 lt का ट्रेडेबल सरप्लस रहेगा। सरकार ने अभी तक 15 lt चीनी के निर्यात की मंजूरी दे दी है। आगे सीजन के अंत में 10 lt अतिरिक्त निर्यात की अनुमति भी मिल सकती है। समय पर घोषणा से बाज़ार में स्थिरता आएगी और मिलों को राहत मिलेगी।

हालांकि चीनी मिलें MSP न बढ़ने से परेशान हैं। 2019 से चीनी का MSP 31 रुपये/किलो ही तय है। मिलों का कहना है कि जब तक चीनी का MSP और एथेनॉल खरीद मूल्य नहीं बढ़ेगा, उनके लिए गन्ने का भुगतान और अन्य खर्च पूरे करना मुश्किल है।

खेती में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की अपील
NFCSF के अधिकारी प्रकाश नाइकनवरे और हर्षवर्धन पाटील ने कहा कि चीनी का MSP बढ़ाया जाए, एथेनॉल का खरीद मूल्य बढ़ाया जाए और एथेनॉल उत्पादन का कोटा बढ़ाया जाए। ये तीन फैसले उद्योग को संभलने में बड़ी मदद करेंगे।पाटील ने गन्ना किसानों से अपील की कि वे खेती में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएँ। इससे उत्पादन 40% तक बढ़ा है और खेती की लागत 30% तक कम हुई है।

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