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देश की 89% चीनी सिर्फ तीन राज्यों से, NFCSF के आंकड़ों का खुलासा

2025-26 चीनी सीजन में 15 जनवरी तक भारत का चीनी उत्पादन 158.85 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले साल से 22% अधिक है। महाराष्ट्र में उत्पादन 50% बढ़ा है, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सीमित बढ़ोतरी हुई ह

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Pooja Rai· Correspondent

17 जनवरी 2026· 3 min read

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देश की 89% चीनी सिर्फ तीन राज्यों से, NFCSF के आंकड़ों का खुलासा

2025-26 चीनी सीजन में 15 जनवरी तक भारत का चीनी उत्पादन 158.85 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले साल से 22% अधिक है। महाराष्ट्र में उत्पादन 50% बढ़ा है, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सीमित बढ़ोतरी हुई है। बेहतर रिकवरी रेट और ज्यादा पेराई से उत्पादन मजबूत रहा, वहीं सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात के तहत कोटे का तीसरा री-अलॉटमेंट भी जारी किया है।

देश में चालू 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर–दिसंबर) के दौरान चीनी उत्पादन में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी तक देश का कुल चीनी उत्पादन 158.85 लाख टन तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि के 130.60 लाख टन से करीब 22 प्रतिशत अधिक है।

महाराष्ट्र बना ग्रोथ का इंजन
चीनी उत्पादन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी महाराष्ट्र में दर्ज की गई है। राज्य में उत्पादन 64.60 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 43.05 लाख टन के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है।वहीं उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, वहां उत्पादन में अपेक्षाकृत मामूली बढ़ोतरी हुई है। यूपी में चीनी उत्पादन 42.85 लाख टन से बढ़कर 45.70 लाख टन हो गया है, यानी करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी।कर्नाटक में भी उत्पादन 27.10 लाख टन से बढ़कर 30.70 लाख टन पहुंचा है, जो लगभग 13 प्रतिशत अधिक है।

कुछ राज्यों में उत्पादन घटा
NFCSF के मुताबिक, इस सीजन में अब तक देश के कुल चीनी उत्पादन का करीब 89 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं तीन राज्यों—महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक—से आया है।हालांकि सभी राज्यों में हालात एक जैसे नहीं रहे। बिहार, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में इस बार पिछले साल की तुलना में चीनी उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।

ये भी पढ़ें - 19 जनवरी से कपास बिक्री शुरू करेगा CCI, बाजार की नजर सरकारी दामों पर

बेहतर रिकवरी रेट से बढ़ी पेराई
बिज़नेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक NFCSF ने बताया कि 15 जनवरी तक देश की 519 शुगर मिलों ने कुल 1,763.74 लाख टन गन्ने की पेराई की है। इस दौरान औसत रिकवरी रेट 9.01 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल इसी समय 514 मिलों ने 8.80 प्रतिशत रिकवरी के साथ 1,484.04 लाख टन गन्ने की पेराई की थी।रिकवरी रेट का मतलब है 100 किलो गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा। यानी 9 प्रतिशत रिकवरी का अर्थ है 100 किलो गन्ने से करीब 9 किलो चीनी।
राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश में रिकवरी रेट 9.05 प्रतिशत से बढ़कर 9.80 प्रतिशत हो गया है, जबकि महाराष्ट्र में यह 8.80 प्रतिशत से बढ़कर 9 प्रतिशत पर पहुंचा है। वहीं कर्नाटक में रिकवरी रेट पिछले साल के 8.50 प्रतिशत से घटकर 8.05 प्रतिशत रह गया है।

निर्यात कोटा का तीसरा री-अलॉटमेंट
इस बीच सरकार ने मौजूदा सीजन में चीनी के निर्यात कोटे के री-अलॉटमेंट का तीसरा आदेश जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस आदेश के तहत 16 मिलों ने 13 फैक्ट्रियों के घरेलू कोटे के साथ एक्सचेंज कर 52,270 टन का निर्यात कोटा सरेंडर किया है।
इससे पहले जारी दो आदेशों में सरकार ने क्रमशः 29,174 टन और 85,315 टन के एक्सचेंज की अनुमति दी थी।आपको बता दें कि खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2025 में मिल-वार तय फॉर्मूले के आधार पर 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। मिलों को इस कोटे के तहत 30 सितंबर तक शिपमेंट पूरा करने की छूट दी गई है।

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