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गेहूं की खेती के लिए ICAR की नई गाइडलाइन, हर जोन के हिसाब से किस्में तय

ICAR करनाल ने 2 से 15 नवंबर 2025 के बीच गेहूं की बुआई के लिए सलाह जारी की है। किसानों को अपनी जलवायु के अनुसार सही किस्में चुनने, मिट्टी की जांच करवाने और “Happy Seeder” से बुआई करने की सलाह दी गई है।

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Pooja Rai·Correspondent·03 Nov 2025· 4 min read

गेहूं की खेती के लिए ICAR की नई गाइडलाइन, हर जोन के हिसाब से किस्में तय

गेहूं की खेती के लिए ICAR की नई गाइडलाइन, हर जोन के हिसाब से किस्में तय

ICAR करनाल ने 2 से 15 नवंबर 2025 के बीच गेहूं की बुआई के लिए सलाह जारी की है। किसानों को अपनी जलवायु के अनुसार सही किस्में चुनने, मिट्टी की जांच करवाने और “Happy Seeder” से बुआई करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में उर्वरक, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण के तरीके बताए गए हैं। साथ ही पराली न जलाने और पर्यावरण सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

यह रिपोर्ट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल की ओर से जारी की गई है। इसमें 2 से 15 नवंबर 2025 के बीच गेहूं की बुआई और अन्य कृषि कार्यों के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को सलाह दी गई है।

गेहूं की बुआई के लिए मौसम अनुकूल
संस्थान ने बताया है कि इस समय देशभर में तापमान गेहूं की समय पर बुआई के लिए बेहद अनुकूल है। इस वजह से किसान तेजी से बुआई कर रहे हैं। मशीनों की मदद से बुआई करने से समय, श्रम और बीज की बचत होती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार सही किस्म का चुनाव करें और विश्वसनीय स्रोत से ही बीज खरीदें।

किसानों के लिए सामान्य सुझाव

अपने क्षेत्र और मिट्टी के अनुसार उपयुक्त गेहूं की किस्म चुनें।

हार्वेस्टर से काटी गई धान की फसल वाले खेत में “Happy Seeder” या “Smart Seeder” की मदद से सीधे गेहूं की बुआई करें।

बुआई में देरी न करें, क्योंकि इससे गर्मी और सूखे का असर पड़ सकता है।

दूसरे क्षेत्रों की किस्में अपने खेत में न लगाएँ, इससे रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार और फफूंदनाशक का सही और संतुलित उपयोग करें ताकि अधिक उपज मिल सके।

पानी और लागत बचाने के लिए सिंचाई का प्रबंधन सोच-समझकर करें।

बुआई से पहले मिट्टी की जांच (Soil Testing) करवा लें ताकि उर्वरक का सही उपयोग किया जा सके।

फसल के अवशेष (पराली) न जलाएँ, इससे मिट्टी की सेहत और पर्यावरण दोनों को नुकसान होता है।

ये भी पढ़ें - भारत में छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद ‘Agroforestry’, मुनाफा और पर्यावरण दोनों का संतुलन

विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनुशंसित गेहूं की किस्में

उत्तरी, पूर्वी और मध्य भारत के लिए

जल्दी बोई जाने वाली किस्में (Early Sown Varieties)

पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, राजस्थान (कुछ भाग):
DBW 187, DBW 303, WH 1270, DBW 327, PBW 872, DBW 370, DBW 371, DBW 372

मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान (उदयपुर और कोटा):
DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 377, GW 543

समय पर बोई जाने वाली किस्में (Timely Sown Varieties)

पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, राजस्थान (कुछ भाग):
DBW 187, DBW 222, HD 3406, PBW 826, PBW 3226, HD 3086, HD 3093, WH 1105, DBW 296

पूर्वी यूपी, बिहार, बंगाल, झारखंड:
DBW 187, PBW 826, HD 3411, DBW 222, HD 3086, DBW 386, DBW 252

पश्चिमी और दक्षिण भारत के लिए

मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान (उदयपुर और कोटा):
DBW 303, HI 1636, HI 1650, GW 366, MACS 6768, WH 1106

महाराष्ट्र, कर्नाटक:
DBW 168, MACS 6478, UAS 304, PBW 891, WH 1306

बीज की मात्रा और उर्वरक की सिफारिशें

क्षेत्रबुआई की स्थितिबीज की मात्राउर्वरक की मात्रा

उत्तर-पश्चिम भारतसिंचित, जल्दी बुआई100 किग्रा/हेक्टेयर225:90:60 किग्रा NPK/हेक्टेयर

मध्य भारतसिंचित, जल्दी बुआई100 किग्रा/हेक्टेयर180:90:40 किग्रा NPK/हेक्टेयर

उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारतसमय पर सिंचित100 किग्रा/हेक्टेयर150:60:40 किग्रा NPK/हेक्टेयर

मध्य और दक्षिण भारतसमय पर सिंचित100 किग्रा/हेक्टेयर120:60:40 किग्रा NPK/हेक्टेयर

सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रसमय पर बुआई100 किग्रा/हेक्टेयर90:60:40 किग्रा NPK/हेक्टेयर

उर्वरक का एक-तिहाई हिस्सा और पूरा P एवं K बुआई के समय दें, बाकी दो भाग पहली और दूसरी सिंचाई के समय दें।

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार और फालारिस माइनर (कनकनी/गुल्ली डंडा) जैसी घास को रोकने के लिए Pyroxasulfone 85 WG 60 ग्राम प्रति एकड़ (या Pendimethalin के साथ) बुआई के 0–3 दिन के भीतर छिड़कें।

इसके विकल्प के रूप में Aclonifen + Diflufenican + Pyroxasulfone (Mateno More) का 800 मिली प्रति एकड़ 150–200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

ध्यान रहे ड्यूरम गेहूं (Kathiya गेहूं) में Pyroxasulfone का उपयोग न करें।

मुख्य संदेश

इस समय गेहूं की बुआई का सबसे अच्छा समय है।

किसान सही किस्म चुनें और समय पर बुआई करें।

मिट्टी जांच, उर्वरक प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें।

पराली न जलाएँ।इससे मिट्टी और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहेंगे।

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