मॉनसून सीजन से पहले भारत ने यूरिया आयात बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। घरेलू उत्पादन पर पश्चिम एशिया संकट का असर पड़ने के बाद भारत ने वैश्विक सप्लायर्स से 17 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है।
सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड ने बुधवार को जारी नोटिस में बताया कि 9 लाख टन यूरिया भारत के पश्चिमी तट के लिए खरीदा जाएगा, जबकि बाकी मात्रा पूर्वी तट के लिए मंगाई जाएगी। सभी शिपमेंट 20 जुलाई तक लोडिंग पोर्ट से रवाना होने चाहिए।
भारत में यूरिया की खपत कितनी है?
भारत हर साल किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए वैश्विक बाजार से यूरिया खरीदता है। लेकिन इस बार खरीद ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के कारण पश्चिम एशिया में गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे घरेलू यूरिया उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है।
दरअसल, दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक भारत प्राकृतिक गैस पर काफी निर्भर है। मध्य-पूर्व से आयात होने वाली गैस का इस्तेमाल अमोनिया बनाने में होता है, जो यूरिया उत्पादन का मुख्य कच्चा माल है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने और एलएनजी की कमी के कारण मार्च में दक्षिण एशिया के कई प्लांट बंद करने पड़े, जिससे उत्पादन घट गया।
वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। फारस की खाड़ी से होकर दुनिया की करीब 45% यूरिया सप्लाई गुजरती है। संघर्ष शुरू होने के बाद कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत ने पिछले टेंडर में 25 लाख टन यूरिया खरीदा था, जिसकी कीमतें संघर्ष से पहले के स्तर से लगभग दोगुनी थीं।
अब खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने वाली है। अगले महीने से धान, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई शुरू होगी। ऐसे में उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
केंद्र सरकार के उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, जून से सितंबर के बारिश वाले सीजन में देश को करीब 3.9 करोड़ टन उर्वरक की जरूरत होगी। फिलहाल देश के पास लगभग 2 करोड़ टन का स्टॉक मौजूद है।

