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क्यों गिरे आलू के दाम? सही वजह अब पता चली

ये दुख पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के किसानों का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के हर उस किसान का है, जिसने आलू उगाया, कोल्ड स्टोरेज में रखा और अब मंडी में औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। खेत में पसीना

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Pooja Rai· Correspondent

2 अगस्त 2025· 5 min read

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क्यों गिरे आलू के दाम? सही वजह अब पता चली

क्यों गिरे आलू के दाम? सही वजह अब पता चली

ये दुख पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के किसानों का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के हर उस किसान का है, जिसने आलू उगाया, कोल्ड स्टोरेज में रखा और अब मंडी में औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। खेत में पसीना बहाया, अब आंखों से आंसू बह रहे हैं।

ये हैं कन्नौज के आलू किसान और व्यापारी सौरभ सिंह। सौरभ हमेशा से आलू की खेती करते आ रहे और कई सालों से इसका कारोबार भी कर रहे हैं। कन्नौज के किसान की मानें तो, जुलाई में आलू का रेट गिरने की एक नहीं, कई वजह हैं।

न्यूज़ पोटली को सौरभ सिंह कुशवाहा ने बताया,
"पहली वजह पूर्वांचल से लेकर बिहार तक में बारिश का ना होना। वहां बिक्री नहीं हो पा रही है हरी सब्जियों की वजह से हरी सब्जी वहां बहुत सस्ती है इस वजह से वहां बिक्री नहीं हो पा रही है। दूसरा कारण है बंगाल और पंजाब में भरपूर मात्रा में आलू है। इस वजह से यहां से वहां आलू जा नहीं रहा है। आधे बिहार में बंगाल का आलू जा रहा है, नेपाल भी जा रहा ह बंगाल का आलू। नेपाल भी खपत नहीं कर पा रहा है। वहां कोई डिमांड नहीं बन पा रही है"

गुजरात के आलू में क्या है खास?
न्यूज़ पोटली ने जब सौरभ से जानना चाहा कि, गुजरात के आलू में क्या खास है, तो उन्होंने बताया कि, गुजरात के किसान बड़ी तादाद में आलू की हॉलैंड वैरायटी उगाते हैं, ये एक साइज़ का और बड़ा होता है, जबकि यूपी के ज्यादातर किसान जिस आलू की वैरायटी लगाते हैं, वो गुजरात के आलू की तुलना में कम बेहतर होता है। सौरभ खुद आलू काठमांडू एक्सपोर्ट करते थे, लेकिन इस बार नहीं कर पा रहे हैं।

सौरभ सिंह कुशवाहा ने बताया,
"गुजरात में बेस्ट आलू निकल रहा है, वहां के किसान क्वालिटी का आलू निकाल रहे हैं। टेक्निकल हैं। ये जैसे छोट-छोटा दिख रहा है, ये वहां नहीं दिख रहा है। वो सब एक साइज का आलू रखते हैं हॉलैंड। नेपाल में काठमांडू में मोटा आलू की डिमांड है। इस वजह से गुजरात से वहां आलू एक्सपोर्ट हो रहा है। किसान अस वक्त सन्नाटे में वो आलू बेचना नहीं चाह रहा है। सरकार एक्सपोर्ट खोल दे पाकिस्तान और भूटान यही रहा तो ज्यादा दिन नहीं लगेगा आलू फेंका जाएगा सड़कों पर। गुजरात का आलू बहुत अच्छा निकल रहा है। यूपी का आलू डिमांड नहीं पकड़ पा रहा है। काठमांडू में जो क्वालिटी चलती है। लोग गुजरात का आलू ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कंडीशन ये है कि जो 18 में आलू बिक रहा था अब 12-13 में रह गया है।"

ये है रेट गिरने की वजह
किसानों से बातचीत के दौरान जो एक कॉमन बात सामने आई वो ये कि, इस बार रेट गिरने की वजह डिमांड में कमी है, ना कि ज़्यादा पैदावार।

यूपी के कन्नौज के एक और किसान धर्मेंद्र कुमार कटिहार ने न्यूज़ पोटली से बताया कि,
"इस साल खपत नहीं है इस वजह से आलू का रेट गिर रहा है। पहले 50 गाड़ी बिकती थी इस बार 5 बोरी बिक रही है। थोड़ा बहुत बाहर जाता था इस बार वो भी नहीं जा रहा है। पिछली बार से आलू थोड़ा ज्यादा पैदावार है।एक बीघे में 35 हजार की लागत के बदले 8 हजार की ही निकासी हो रही है।"

क्या बोले कोल्ड स्टोरेज कर्मचारी और एक्सपर्ट्स?
आपको बता दें कि 500 रुपये क्विंटल की लागत वाला आलू अब 300 में भी नहीं निकल रहा। जो रेट जुलाई में 14-15 रुपये से लेकर 18 रुपये के बीच होना चाहिए, वो फिलहाल 10-11 रुपये में बिक रहा है।
किसानों ने हमें जो बताया, उनकी बातों में कितना दम है, क्या जो किसान समझ और बता रहे वही सच्चाई है, ये जानने के लिए हमने कई कोल्ड स्टोरेज कर्मचारियों के साथ ही कुछ एक्सपर्ट से भी बात की। समझिए उनका क्या कहना है?

एसएस कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर पदम कांत कटिहार ने न्यूज़ पोटली को बताया कि,
"इस बार बिचौलिया ज्यादा खा रहा है। रिटेल में आपको आलू महंगा मिल रहा है, जबकि थोक में वो 10 रुपये में मिलेगा। कोल्ड स्टोरेज से जो आलू जा रहा है वो 850-1000 तक जा रहा है। सन 23 में 48 लाख मिट्रिक टन हुआ था। सन 24 में यही 37 लाख था। इस बार दोनों के बीच का हुआ है। लेकिन जो 23 की बाजार थी वो 14-15 रुपये थी। उस हिसाब से देखें तो बाजार डाउन है 25 में। खपत की कमी है।मौसम की मार मिली है। मेरे कोल्ड स्टोरेज में इस बार 8 फीसदी कम रही है। इस बार निकाली कम रही।"

वहीं वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज असोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट सुभजीत साहा ने बताया कि,
'बाजार में कोई जान नहीं बची है। ना बिहार, ना असम, ना नेपाल। आलू यहीं फंस गया है। पूरा सीज़न बर्बाद हो गया।"
बांकुरा के Kundu Cold Storage के मालिक जयंत उपाध्याय ने बताया कि,
“बाजार करीब 40 हजार रुपये नीचे चला गया है। पंजाब, ओडिशा और बंगाल में इस बार उत्पादन ज्यादा हुआ है। ओडिशा में खुद किसान आलू उगा रहे हैं। जिससे बंगाल का मार्केट सिकुड़ गया।”

'ये मंदी आई नहीं बल्कि लाई गई है'
हालांकि कई किसानों का मानना है कि, ये मंदी आई नहीं बल्कि लाई गई है, कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए किसानों को मुसीबत में डाल दिया है।

यूपी के कन्नौज एक किसान व्यापारी भंवरपाल सिंह ने कहा कि,
"साजिशन हवा बनाई गई कि आलू बहुत ज्यादा है, लोग डर के मारे मंडी ले आए, रेट गिरा दिया गया"

देश के करोड़ों आलू किसान इस वक्त सरकार की तरफ उम्मीद भरी नज़रों से देख रहे हैं। निर्यात खोला जाए, डिमांड बढ़ाई जाए, और बिचौलियों पर लगाम लगे तभी जाकर उनके खेतों की मेहनत को सही कीमत मिल सकेगी। वरना ये आलू बस सड़कों पर बिखरेगा और किसान फिर एक बार कर्ज़ में डूबेगा।

देखिए पूरी रिपोर्ट -

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