Skip to content
News Potli
तकनीक से तरक्की

कुली से करोड़पति तक: महाराष्ट्र के अनार किसान की कहानी

ये केदार जाधव हैं, ग़रीब परिवार जन्मे केदार नाशिक के मालेगाँव में कुली का काम करते थे। इनके दूर रिश्तेदारी में एक शख़्स चीनी मिल में सीनियर अधिकारी था, परिवार की स्थिति देख जाधव उनसे काम माँगने गये। य

NP

Arvind· Correspondent

2 नवंबर 2024· 3 min read

कुली से करोड़पति तक: महाराष्ट्र के अनार किसान की कहानी

कुली से करोड़पति तक: महाराष्ट्र के अनार किसान की कहानी

ये केदार जाधव हैं, ग़रीब परिवार जन्मे केदार नाशिक के मालेगाँव में कुली का काम करते थे। इनके दूर रिश्तेदारी में एक शख़्स चीनी मिल में सीनियर अधिकारी था, परिवार की स्थिति देख जाधव उनसे काम माँगने गये। ये वो दौर था जब सरकारी नौकरियों में उतनी क़िल्लत नहीं थी, जाधव को भरोसा था एक दिन उनकी नौकरी लग जाएगी। लेकिन सामने वाले शख़्स को एक घरेलू नौकर मिल गया था।

साल बीतते गये, बहुतो की नौकरी उनके हाथों लगी लेकिन केदार की नहीं। केदार बाक़ी काम करने के अलावा उस अधिकारी के बाग बगीचे की देखभाल करते थे, इसी दौरान महाराष्ट्र सरकार ने एक योजना के तहत फल की बाग़वानी को बढ़ावा देना शुरू किया। जिसमें अनार (दाड़िम) प्रमुख था। Mahatma Phule Krishi Vidyapeeth Rahuri की तरफ़ से चीनी मिलों के कुछ अधिकारी और मैनेजमेंट के लोगों को भी ट्रायल के तौर पर पेड़ मिले थे। केदार जाधव को अपने मालिक के यहाँ उन पेड़ों की देखभाल की ज़िम्मेदारी मिली। University के अधिकारी हर महीने वहाँ आते, पौधों की ग्रोथ देखते और टिप्स देते. कुछ वर्ष ये सिलसिला चला और केदार जाधव इतने पारंगत हो गये कि चीनी मिल से जुड़े (गन्ना के अलावा अनार की खेती) अनार किसान उनसे सलाह लेने आने लगे। समय अपनी गति बदलता है और केदार जाधव के संघर्ष का चक्र पूरा हो गया था, कुली से माली बने केदार जाधव अब कंसल्टेंट हो गये थे, अनार की पैदावार से लेकर रोग तक लोग उनसे सलाह लेने आने लगे थे। इसी बीच केदार ने एक किसान के साथ मिलकर साझेदारी में बाग लगाया, क्योंकि वो भूमिहीन थे, अनार अच्छा फला और लाखों की आमदनी हुई।

नाशिक और उसके आसपास के किसानों में केदार का क़द इतना बड़ा हो गया था कि शेतकरी उन पर आँख मूँद कर भरोसा करते थे। इसी भरोसे का कमाल था कि कुछ पैसे वाले किसानों ने उन्हें अपने पैसे से ज़मीन खरीदवा दी, क्योंकि वो जानते थे, बाग से पैसे कमाकर केदार वापस कर देंगे। और हुआ भी ऐसा ही। केदार ने खूब पैसा कमाया और दूसरों को भी कमाने के लिए प्रेरित किया। ट्रैक्टर लिया, ज़मीन ख़रीदी, घर बनवाया। महाराष्ट्र में अनार की खेती ने लाखों किसानों को नया जीवन और तरक़्क़ी दी है। एक दौर ये भी कि लोग नौकरियों छोड़कर अनार की खेती में पैसे लगाते थे। किसानों के मुताबिक़ एक एकड़ में 10 लाख रुपये तक की कमाई होती थी।

लेकिन 10-15 साल पहले लाल अनार पर तेलिया और निमोटोड समेत कई रोगों और बीमारियों की काली साया पड़ गई। बाग के बाग सूखने लगे। हताश किसानों को मजबूरी में बाग काटने पड़ रहे। ज़्यादातर किसान उस दौर में अनार की बूटी (कलम) लगाते थे। नर्सरी चलाने वाले लालची लोग रोग वाले पौधे धड़ल्ले से बेचकर पूरे महाराष्ट्र में फैला रहे थे। रोग का असर केदार जाधव पर भी आया। भारी नुक़सान हुआ, कर्ज में डूबे, ट्रेक्टर तक बिक गया।

केदार ने हार नहीं मानी, अनार की खेती का रोगों का इलाज उन्होंने अपने तरीक़ों से निकाल लिया था। उनकी बाग भी बच गई थी। टिश्यु कल्चर पौधों में ऐसी तमाम दिक़्क़तें नहीं होती हैं। केदार फिर अनार से पैसे कमाने लगे हैं। तमाम मुश्किलों के बाद भी वो कहते हैं कि खेती से अच्छा कोई रोज़गार नहीं है। लेकिन खेती ऐसे करो, इनका समझ कर करो कि उसमें समझो डाक्टरी हो गई है। क़रीब डेढ़ साल पहले NewsPotli की टीम उनके घर पहुँची वो ऐसे जोश से भरे और खेती में रमे मिले।

केदार का पूरा वीडियो यहाँ देखें:

खेती किसानी की रोचक जानकारियों के लिए News Potli के Youtube को सब्सक्राइब करें

NP

About the Author

Arvind

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल, प्रीमियम रेट पर बिक रहा राजस्थान का अनार
तकनीक से तरक्की

ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल, प्रीमियम रेट पर बिक रहा राजस्थान का अनार

पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में अनार की खेती किसानों के लिए आमदनी का बड़ा जरिया बन गई है। ड्रिप इरिगेशन, टिशू कल्चर पौधों और सरकारी सब्सिडी की मदद से बालोतरा, बाड़मेर और जालौर जैसे क्षेत्रों

Pooja Rai·27 दिस॰ 2025·4 min
5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर
तकनीक से तरक्की

5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

चंदौली के युवा किसान अनिल मौर्य ने सिर्फ 5 बिस्वा से शुरुआत कर आज 50 बीघा में आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा किया है। बागवानी, ड्रिप सिंचाई, स्मार्ट मार्केटिंग और फसल कैलेंडर के जरिए उन्होंने नई फसलों क

Pooja Rai·24 दिस॰ 2025·3 min
साइंस-बेस्ड इंटरक्रॉपिंग: तरबूज से लागत निकाली, केला शुद्ध मुनाफा, टर्नओवर 60 लाख रुपये
तकनीक से तरक्की

साइंस-बेस्ड इंटरक्रॉपिंग: तरबूज से लागत निकाली, केला शुद्ध मुनाफा, टर्नओवर 60 लाख रुपये

मध्यप्रदेश के केले के गढ़ बुरहानपुर के किसान राजेंद्र गंभीर पाटिल हमेशा से केले की खेती करते आ रहे हैं। केले के साथ वो तरबूज की सहफसली खेती भी करते हैं। नई तकनीक से खेती कर रहे इस किसान का टर्नओवर 45-

Jalish·20 नव॰ 2025·5 min