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किसान किराये पर ले सकेंगे कृषि उपकरण, सरकार प्रदेश में खोलेगी 267 नए कस्टम हायरिंग सेंटर

बिहार सरकार राज्य के हर पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करेगी, जिससे किसानों को अपने गांव में कम कीमत में ट्रैक्टर, थ्रेशर, रोलर, सीड ड्रिलर, रीपर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण मिलेंगे. किसान चाहे तो

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Pooja Rai·Correspondent·12 Jul 2025· 3 min read

किसान किराये पर ले सकेंगे कृषि उपकरण, सरकार प्रदेश में खोलेगी 267 नए कस्टम हायरिंग सेंटर

किसान किराये पर ले सकेंगे कृषि उपकरण, सरकार प्रदेश में खोलेगी 267 नए कस्टम हायरिंग सेंटर

बिहार सरकार राज्य के हर पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करेगी, जिससे किसानों को अपने गांव में कम कीमत में ट्रैक्टर, थ्रेशर, रोलर, सीड ड्रिलर, रीपर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण मिलेंगे. किसान चाहे तो किराए पर भी कृषि उपकरण ले सकता है. सरकार का 267 नए केंद्र बनाए जाने का लक्ष्य है, जिसपर 40% तक की सब्सिडी भी दी जाएगी.

किसानों की खेती में लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य के उपमुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के सभी पंचायतों में कस्टम हायरिंग सेंटर बनाये जाने की घोषणा की है. सरकार का मानना है इससे किसानों को आसानी से कम कीमत और कम किराए पर कृषि उपकरण उपलब्ध होंगे.

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है. इसका सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो महंगे कृषि यंत्र खरीदने में सक्षम नहीं हैं. अब बुआई, रोपाई, कटाई से लेकर मड़ाई तक की सभी जरूरतें पंचायत स्तर पर पूरी हो सकेंगी. इस साल राज्य में 267 नए सीएचसी की स्थापना की जाएगी.

40 फीसदी तक का अनुदान भी मिलेगा
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ना बताया कि हर कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर लगभग 10 लाख रुपये की लागत आंकी गई है. सरकार इसमें 40 फीसदी तक अनुदान दे रही है. 35 बीएचपी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर पर अधिकतम 1.60 लाख रुपये और अन्य उपकरणों पर 4 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी.

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रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे
मंत्री ने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर से किसानों को खेती के लिए जरूरी जैसे रोटावेटर, रीपर, थ्रेशर, लेजर लैंड लेवलर और मेज शेलर जैसे यंत्र उपलब्ध होंगे. स्थानीय फसल चक्र के अनुसार, एक-एक उपकरण की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता में इजाफा होगा. इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसानों को नहीं. बल्कि, जीविका समूह, ग्राम संगठन, एफपीओ, एफआईजी, स्व सहायता समूह, पैक्स और क्लस्टर फेडरेशन जैसे संगठनों को भी मिलेगा. इससे सामुदायिक स्तर पर खेती की तकनीकी जरूरतें पूरी होंगी और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे.

अब तक बन चुके हैं 950 सेंटर
अब तक राज्य में 950 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हो चुके हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 267 नए सेंटर खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर उद्यमिता का नया अवसर भी मिलेगा. डिप्टी सीएम ने कहा कि यह महज कृषि योजना नहीं. बल्कि बिहार के गांवों को तकनीकी रूप से समृद्ध बनाने की शुरुआत है.

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