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कर्ज, मौसम और बाजार की मार से टूट रहे किसान, किसानों की आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जनवरी से सितंबर 2025 के बीच यह संख्या 1,700 से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। अकेले मराठवाड़ा में 520 और सिर्फ बीड जिले में 120 से अधिक किस

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Pooja Rai·Correspondent·19 Sep 2025· 3 min read

कर्ज, मौसम और बाजार की मार से टूट रहे किसान, किसानों की आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक

कर्ज, मौसम और बाजार की मार से टूट रहे किसान, किसानों की आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जनवरी से सितंबर 2025 के बीच यह संख्या 1,700 से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। अकेले मराठवाड़ा में 520 और सिर्फ बीड जिले में 120 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। सरकार के मुताबिक 1,546 किसानों की आत्महत्या के मामलों में 517 परिवारों को मुआवजा मंजूर हुआ है, जबकि कई मामले जांच में हैं।

महाराष्ट्र में किसानों का संकट गहराता जा रहा है। आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से मार्च 2025 के बीच 767 किसानों ने आत्महत्या की। वहीं, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच यह आंकड़ा 1,000 से भी ज्यादा पहुंचने का अनुमान है। सिर्फ मराठवाड़ा क्षेत्र में जनवरी से जून 2025 तक 520 किसानों ने जान दी, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20% अधिक है।

इन जिलों में सबसे ज़्यादा मामले
सबसे ज्यादा मामले बीड, नांदेड, संभाजीनगर (औरंगाबाद) और विदर्भ के जिलों यवतमाल, अमरावती, आकोला, बुलढाणा और वाशिम से सामने आए। अकेले बीड जिले में छह महीने के भीतर 120 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की।

सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार राज्य के 36 जिलों में से 14 जिलों (ज्यादातर विदर्भ और मराठवाड़ा) में अब तक 1,546 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 517 किसानों के परिवारों को मुआवजे का पात्र माना गया, 279 मामलों को अपात्र बताया गया, जबकि 488 मामले अभी जांच में हैं। सरकार का कहना है कि 516 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है और 44 मामलों पर फैसला होना बाकी है। वाशिम जिले का उदाहरण लें तो यहां 88 किसानों ने आत्महत्या की, जिनमें से 29 परिवारों को मुआवजा मिला और 15 मामलों की जांच चल रही है।

आत्महत्या के मुख्य कारण
विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि किसान कई समस्याओं के दबाव में टूट रहे हैं। जैसे
बैंकों और साहूकारों से लिया कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है।
मौसम की मार और लगातार बारिश से सोयाबीन, उड़द, मूंग और कपास जैसी फसलें बर्बाद हो रही हैं।
खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन बाजार में दाम कम मिल रहे हैं।
सामाजिक दबाव और प्रशासन की अनदेखी से किसान मानसिक तनाव में आ जाते हैं।

ये भी पढ़ें- महाराष्ट्र में बाढ़ और अतिवृष्टि से तबाही, करीब 18 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद

किसान संगठनों और विपक्ष का विरोध
बढ़ती आत्महत्याओं को लेकर किसान संगठन और विपक्ष लगातार आवाज उठा रहे हैं। किसान नेता राजू शेट्टी, सदाभाऊ खोत और बच्चू कडू सरकार से MSP बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत राहत नहीं दी तो हालात और बिगड़ेंगे। हाल ही में शरद पवार की एनसीपी ने नासिक में आंदोलन किया और कर्ज माफी, फसल मुआवजा और सर्वे की मांग रखी।

किसान संगठनों की प्रमुख मांगें
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो आत्महत्या की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं।किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। बेमौसम बारिश और आपदा से प्रभावित किसानों को तुरंत मुआवजा मिले।और फसलों को बेहतर दाम दिलाए जाएं।

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