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उत्तराखंड में सेब की अति सघन बागवानी पर ज़ोर, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज़ी से लागू कर रही है। किसानों को क्लस्टर आधारित खेती से जोड़कर सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया ज

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Pooja Rai· Correspondent

17 जनवरी 2026· 3 min read

उत्तराखंड में सेब की अति सघन बागवानी पर ज़ोर, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

उत्तराखंड में सेब की अति सघन बागवानी पर ज़ोर, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज़ी से लागू कर रही है। किसानों को क्लस्टर आधारित खेती से जोड़कर सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, नर्सरी अपग्रेड और दीर्घकालिक उत्पादन लक्ष्यों (2030–2050) के तहत योजनाएँ लागू की जाएंगी।

उत्तराखंड में फल उत्पादन को किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनाने के लिए सरकार सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज़ी से लागू करने पर काम कर रही है। इसका मकसद किसानों की आय में लंबे समय तक बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।

इस संबंध में शुक्रवार को सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को क्लस्टर आधारित खेती के लिए प्रेरित किया जाए। इससे उत्पादन बढ़ेगा, किसानों को तकनीकी मदद आसानी से मिलेगी और फलों की मार्केटिंग भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।

सेब के साथ कीवी और ड्रैगन फ्रूट पर भी फोकस
बैठक में प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही देश की कुल उत्पादन क्षमता और अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति की समीक्षा भी की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि अति सघन बागवानी योजना के तहत नई और उन्नत किस्मों के सेब के बागान बड़े पैमाने पर लगाए जाने चाहिए। इसके लिए किसानों को जिलेवार क्लस्टर में जोड़कर काम किया जाए, ताकि तकनीकी सलाह, पौध उपलब्धता और बाजार तक पहुँच आसान हो।

ये भी पढ़ें - नया सीड्स बिल: खराब बीज बेचने पर 30 लाख जुर्माना, किसानों के अधिकार सुरक्षित

भविष्य को ध्यान में रखकर लक्ष्य तय होंगे
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उत्तराखंड की वास्तविक क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। इसके बाद हर जिले के लिए 2030, 2040 और 2050 को ध्यान में रखते हुए उत्पादन लक्ष्य तय किए जाएं और उसी हिसाब से योजनाओं को लागू किया जाए।

कोल्ड स्टोरेज और नर्सरी पर भी ज़ोर
उन्होंने हर्षिल (उत्तरकाशी) के झाला क्षेत्र में बने कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य इलाकों में भी कोल्ड स्टोरेज विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही नर्सरियों को अपग्रेड करने, बड़े स्तर पर पौध उत्पादन और किसानों को लगातार तकनीकी सहायता देने के लिए पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) गठित करने पर भी ज़ोर दिया।सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड में आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाई जाए और राज्य को फल उत्पादन का मजबूत केंद्र बनाया जाए।

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