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'आसियान-भारत फेलोशिप' की शुरुआत, कृषि क्षेत्र में पढ़ाई-रिसर्च की राह होगी आसान

केंद्रीय कृष‍ि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान ने पूसा, द‍िल्ली में आयोज‍ित एक कार्यक्रम में ‘आसियान-भारत फेलोशिप’ लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान इसके प

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Pooja Rai·Correspondent·15 Aug 2024· 3 min read

'आसियान-भारत फेलोशिप' की शुरुआत, कृषि क्षेत्र में पढ़ाई-रिसर्च की राह होगी आसान

'आसियान-भारत फेलोशिप' की शुरुआत, कृषि क्षेत्र में पढ़ाई-रिसर्च की राह होगी आसान

केंद्रीय कृष‍ि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान ने पूसा, द‍िल्ली में आयोज‍ित एक कार्यक्रम में ‘आसियान-भारत फेलोशिप’ लॉन्च किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान इसके प्राण हैं। आज भी हमारी बड़ी आबादी खेती से ही रोजगार प्राप्त करती है। आज कृषि के सामने जलवायु परिवर्तन सहित कई चुनौतियां हैं। भारत ने हमेशा से कृषि को प्रधानता दी है। समस्याओं के समाधान में कृषि शिक्षा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार ने पिछले कुछ समय में कृषि शिक्षा पर बहुत ध्यान दिया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि तथा सम्बद्ध विज्ञान में उच्च शिक्षा के लिए बुधवार को पूसा, द‍िल्ली में आयोज‍ित एक कार्यक्रम में ‘आसियान-भारत फैलोशिप’ लॉन्च की। इसके अंतर्गत शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से कृषि और सम्बद्ध व‍िषयों में मास्टर डिग्री के लिए आसियान सदस्य देशों के छात्रों को 50 फेलोशिप (प्रति वर्ष 10) दी जाएंगी। और पहले बैच के लिए 27 अगस्त अंतिम तारीख़ है। यह परियोजना 5 साल के लिए आसियान-भारत कोष के तहत मंजूर की गई है, जिसमें फेलोशिप, प्रवेश शुल्क और रहने का खर्च शामिल है। ICAR कन्वेंशन सेंटर, पूसा, नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम चौहान ने आसियान देशों का जिक्र करते हुए कहा कि हम सब एक हैं और एक-दूसरे के बिना हमारा काम नहीं चल सकता।
इस फेलोशिप का उद्देश्य आसियान छात्रों को शीर्ष भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में अत्याधुनिक शोध से परिचित कराना है। भारत के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में नेताजी सुभाष फेलोशिप और भारत-अफ्रीका फेलोशिप शामिल हैं। वर्तमान में, लगभग 135 विदेशी छात्र भारतीय कृषि संस्थानों में डिग्री प्राप्त कर रहे हैं।

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कृष‍ि मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले मास्टर्स प्रोग्राम छात्रों को अत्याधुनिक शोध से परिचित कराएंगे, उन्हें भविष्य के इनोवेशन के ल‍िए तैयार करेंगे। यह पहल भारत को कृषि से संबंधित मुद्दों को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है।
कृष‍ि मंत्री ने आगे कहा कि भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि आसियान व भारत कृषि-जलवायु क्षेत्रों के मामले में बहुत समानताएं साझा करते हैं। अब कृषि और वानिकी में आसियान-भारत सहयोग के लिए कृषि व सम्बद्ध विज्ञान में उच्च शिक्षा के लिए आसियान-भारत फेलोशिप आरंभ की जा रही है।

आपको बता दें कि आस‍ियान (ASEAN-Association of Southeast Asian Nations) दस देशों का एक समूह है जिसमें कंबोडिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, लाओस, ब्रुनेई, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर और वियतनाम देश शाम‍िल हैं। फेलोशिप से आसियान राष्ट्रीयता के छात्रों को ICAR व कृषि विश्वविद्यालय प्रणालियों के तहत सर्वश्रेष्ठ भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में, जरूरत अनुसार, पहचाने गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कृषि व सम्बद्ध विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के ल‍िए सहायता दी जाएगी।

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