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अरहर की खेती में छोटा बदलाव, 20% तक बढ़ेगी पैदावार

इक्रिसैट के अनुसार अरहर (तूर) की खेती में अगर सीधे बुवाई की बजाय नर्सरी में पौधे तैयार कर रोपाई की जाए, तो पैदावार करीब 20% तक बढ़ सकती है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5 टन से बढ़कर लगभग 3 टन हो जात

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Pooja Rai·Correspondent·24 Jan 2026· 3 min read

अरहर की खेती में छोटा बदलाव, 20% तक बढ़ेगी पैदावार

अरहर की खेती में छोटा बदलाव, 20% तक बढ़ेगी पैदावार

ICRISAT के अनुसार अरहर (तूर) की खेती में अगर सीधे बुवाई की बजाय नर्सरी में पौधे तैयार कर रोपाई की जाए, तो पैदावार करीब 20% तक बढ़ सकती है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5 टन से बढ़कर लगभग 3 टन हो जाता है। यह तरीका पौधों को मजबूत बनाता है, फसल की अवधि 12–18 दिन कम करता है और अनियमित बारिश व सूखे के खतरे को घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है।

अरहर (तूर/रेडग्राम) की खेती में अगर बुवाई का तरीका थोड़ा बदल दिया जाए, तो पैदावार में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान इक्रिसैट (ICRISAT) के मुताबिक, बीज सीधे खेत में बोने की बजाय नर्सरी में पौधे तैयार कर उन्हें खेत में रोपने से प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5 टन से बढ़कर करीब 3 टन तक पहुंच सकता है। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ती है।

बुवाई से अच्छा रोपाई
इक्रिसैट के खेत परीक्षणों में पाया गया कि रोपाई से की गई अरहर की फसल हर तरह के मौसम में सीधे बोई गई फसल से बेहतर रही। इस तरीके में पहले छोटे पौधे नर्सरी में तैयार किए जाते हैं और फिर सही समय पर उन्हें खेत में लगाया जाता है।

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पौधे बनते हैं मजबूत
इस विधि से पौधे मजबूत बनते हैं, जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं और मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही, अनियमित बारिश और शुरुआती सूखे का असर फसल पर कम पड़ता है। इक्रिसैट के वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे फसल की अवधि भी 12 से 18 दिन तक कम हो जाती है, जिससे फसल जल्दी पक जाती है और बाद के सूखे से नुकसान की संभावना घट जाती है।

जलवायु बदलाव के दौर में ये तरीका कारगर
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तरीका नया नहीं है, बल्कि पहले से अपनाई जा रही तकनीक है, जैसे धान की रोपाई। खास बात यह है कि इसे अपनाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च या नई मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती। इसी वजह से यह तरीका जलवायु बदलाव के दौर में किसानों के लिए एक आसान और कारगर समाधान साबित हो सकता है।

बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक इक्रिसैट ने ओडिशा में अरहर की टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में किसानों और अन्य हितधारकों के साथ भी चर्चा की है।

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