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अप्रैल में खाद्य तेल आयात 26 फीसदी बढ़ा, सरसों की कम पैदावार का आगे क्या होगा असर?

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। सरसों की कटाई सीजन गुजरे अभी कुछ दिन ही हुए हैं लेकिन देश में खाद्य तेलों का आयात पिछले साल से 26 फीसदी अधिक हुआ है। क्या इस बार तिलहनी फसलों का उत्पादन कम हुआ है? खाद्य तेल संगठन

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Indal· Correspondent

17 मई 2024· 4 min read

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अप्रैल में खाद्य तेल आयात 26 फीसदी बढ़ा, सरसों की कम पैदावार का आगे क्या होगा असर?

अप्रैल में खाद्य तेल आयात 26 फीसदी बढ़ा, सरसों की कम पैदावार का आगे क्या होगा असर?

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। सरसों की कटाई सीजन गुजरे अभी कुछ दिन ही हुए हैं लेकिन देश में खाद्य तेलों का आयात पिछले साल से 26 फीसदी अधिक हुआ है। क्या इस बार तिलहनी फसलों का उत्पादन कम हुआ है? खाद्य तेल संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक अप्रैल 2024 में भारत ने 13.04 लाख मीट्रिक टन तेल का आयात किया है, जो पिछले साल की तुलना में 26 फीसदी अधिक है।

क्या कम पैदावार है आयात बढ़ने की वजह?

सरसों की खेती करने वाले प्रमुख राज्यों में बीते सरसों के सीजन में पैदावार कम हुई है।राजस्थान के बीकानेर जिले में रहने वाले किसान आसूराम गोदारा ने न्यूज पोटली की टीम को फोन पर बताया " इसबार मैने 15 एकड़ में सरसों की बुवाई की थी, पैदावार सिर्फ 30 कुंतल ही हुई है। हमारे यहां 7 कुंतल प्रति एकड़ के हिसाब से उत्पादन होता है इस हिसाब से खेत में 100 कुंतल सरसों निकलनी चाहिए थी।

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के बरहानपुर गांव में रहने वाले किसान जयदेव ने न्यूज पोटली फोन पर बताया"इस बार हमने 3.5 एकड़ खेत में काली सरसों की बुवाई की थी। इतने खेत में मात्र 14 कुंतल सरसों निकली है। जबकि हमारे यहां औसतन एकड़ में 8 कुंतल सरसों निकलती है। हमने समय से पानी लगाया खाद डाली फिर भी पैदावार कम हुई।"

सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं सरसों उगाने वाले प्रमुख राज्यों राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश भी कम पैदावार हुई है।

हरियाणा के भिवानी जिले के भवानीखेड़ा गांव में रहने वाले किसान अनिल कुमार ने न्यूज पोटली, "हमारी 2 एकड़ काली सरसों में 8 कुंटल पैदावार हुई। अधिक ठंड़ के चलते पौधों की बढ़वार अच्छे से नहीं हुई और फलियों में दाने भी नहीं बने।"
अनिल कुमार के मुताबिक ये लगभग आधी पैदावार थी, क्योंकि उनके यहां प्रति एकड़ किसान 8-9 कुंटल की उपज लैते हैं। अनिल कुमार इसके लिए मौसम में बदलाव को जिम्मेदार बनाते हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक 2023-24 में खरीफ तिलहन- 228.42 लाख मीट्रिक टन ,रबी तिलहन- 137.56 लाख मीट्रिक टन, सोयाबीन - 125.62 लाख मीट्रिक टन, रेपसीड और सरसों - 126.96 लाख मीट्रिक टन पैदावार होने का अनुमान था। पैदावार से जुड़े अंतिम आंकड़ों का इंतजार है।

भारत सरकार के एक आंकड़े के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-2021 में देश ने तकरीबन 13.3 मीट्रिक टन खाने का तेल आयात किया था, जबकि 2021-22 जिसमे भारत को 117 हज़ार करोड़ (विदेशी मुद्रा) का खर्च आया था। भारत में औसतन 8-9 मीट्रिक टन का उत्पादन होता है।

तिलहन क्षेत्र के विशेषज्ञ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व निदेशक डॉ. मुक्ति सधन बसु के मुताबिक भारत दुनिया सबसे बड़ा तिलहनी फसलों का उत्पादक है। और विश्व का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है। जो कि हृदय के लिए स्वस्थ माने जाने वाले मूंगफली व तिल तेल का निर्यात करता है जबकि पाम आयल का आयात करता है जो कि अस्वस्थ माना जाता है।हालाँकि, 7 तिलहन फसलें एमएसपी के अंतर्गत आती हैं लेकिन कुल तिलहन (36 मिलियन टन) का मुश्किल से 5% ही खरीदा जाता है।"

कम पैदावार, मौसम का असर और एमएसपी पर कम खरीद के चलते किसान की रुचि भी कम हो जाती है। तिलहन, मूंगफली, सूरजमुखी आदि का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार तिलहन मिशन के तहत किसानों को मुफ्त बीज किट भी बटवा चुकी है।
पिछले साल से सस्ता है सरसों का तेल?

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक बीते वर्ष की अपेक्षा सरसों का तेल लगभग 14 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। बीते वर्ष 15 मई 2023 को सरसों के तेल का खुदरा भाव 149.23 रुपये था जबकि 15 मई 2024 के भाव 135.89 रुपये था।

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