तंबाकू की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार का सीजन आसान नहीं रहने वाला है। तंबाकू की मांग लगातार घट रही है और इसका असर अब किसानों की कमाई पर भी दिखने लगा है। यही वजह है कि तंबाकू बोर्ड ने 2026-27 सीजन के लिए उत्पादन में बड़ी कटौती कर दी है।
आंध्र प्रदेश में तंबाकू उत्पादन की सीमा 142 मिलियन किलोग्राम से घटाकर 81 मिलियन किलोग्राम कर दी गई है। यानी करीब 43 फीसदी की कटौती। वहीं कर्नाटक में भी उत्पादन 100 मिलियन किलोग्राम से घटाकर 51 मिलियन किलोग्राम कर दिया गया है।
लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? दरअसल, बाजार में पहले से ही तंबाकू का बड़ा स्टॉक पड़ा हुआ है। दूसरी ओर ब्राजील और अफ्रीकी देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय तंबाकू की मांग भी कम हुई है। ऐसे में ज्यादा उत्पादन होने से किसानों को सही दाम मिलना मुश्किल हो रहा था। इसी वजह से तंबाकू बोर्ड ने उत्पादन घटाने का फैसला लिया।
हालांकि किसान इस फैसले का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे बाजार की स्थिति समझते हैं, लेकिन अब सरकार को उनके लिए दूसरी लाभदायक फसलों का विकल्प तैयार करना चाहिए, ताकि उनकी आय प्रभावित न हो।
मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उत्पादन कम होगा, लेकिन खर्च उतना ही रहेगा। पहले एक बार्न (करीब 4 एकड़) से 3,600 किलोग्राम तक तंबाकू उगाने की अनुमति थी, जिसे अब घटाकर 2,000 किलोग्राम कर दिया गया है। जबकि बार्न का रखरखाव, मजदूरी और खेती की लागत पहले जैसी ही रहेगी। ऐसे में किसानों की कमाई घटने की आशंका है।
किसानों ने बिना लाइसेंस तंबाकू की खेती करने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अवैध रूप से उगाया गया तंबाकू बाजार में आने से कीमतें बिगड़ती हैं और नियमों का पालन करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
इधर आंध्र प्रदेश सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसानों की मदद के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और बेहतर दाम मिलने तक भंडारण की व्यवस्था पर भी काम किया जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार किसानों को कौन-से नए विकल्प देती है और तंबाकू की घटती मांग के बीच उनकी आय को कैसे सुरक्षित रखा जाता है।





