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मछलियों को दाना खिलाना होगा अब और आसान, ICAR ने बनाई सोलर से चलने वाली स्मार्ट फिश फीडर मशीन

देश में मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। ICAR ने एक स्मार्ट फिश फ़ीडर मशीन(Smart fish feeder machine) बनायी है जो सोलर एनर्जी से चलती है।

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Pooja Rai· Correspondent

19 जुलाई 2024· 4 min read

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मछलियों को दाना खिलाना होगा अब और आसान, ICAR ने बनाई सोलर से चलने वाली स्मार्ट फिश फीडर मशीन

मछलियों को दाना खिलाना होगा अब और आसान, ICAR ने बनाई सोलर से चलने वाली स्मार्ट फिश फीडर मशीन

देश में मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। ICAR ने एक स्मार्ट फिश फ़ीडर मशीन(Smart fish feeder machine) बनायी है जो सोलर एनर्जी से चलती है।इस तकनीक के इस्तेमाल से किसान अब सोलर एनर्जी से मछलियों को दाना खिला सकते हैं। ICAR ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दिया है।

भारत में मछली पालन तटीय राज्यों का एक प्रमुख उद्योग है, जो 15 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। देश में पश्चिम बंगाल के बाद आंध्र प्रदेश सबसे बड़ा मछली उत्पादक है।किसान खेती के साथ-साथ बड़े पैमाने पर मछली पालन कर रहे हैं। इससे किसानों की अच्छी कमाई भी हो रही है। केंद्र और राज्य सरकारें भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी देकर मदद कर रही है। मछली पालन में मछलियों को सही से दाना मिले ये बहुत ज़रूरी है, तभी उनमें वृद्धि होगी। इसके लिए ही ICAR ने एक स्मार्ट फिश फीडर मशीन बनाई है, जिसकी मदद से किसान आसानी से मछलियों को दाना खिला सकते हैं। ये मशीन किसानों को मछली पालन में काफ़ी मदद करेगा।सबसे ज़रूरी बात ये है कि ये मशीन सोलर एनर्जी से चलेगी, मतलब मछली पलकों को इसके लिए बिजली या दूसरी पॉवर सोर्स की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। आइये इस स्मार्ट फिश फीडर मशीन की खासियत जानते हैं।

फिश फीडर मशीन का उपयोग
सोलर एनर्जी से चलने वाली ये स्मार्ट फिश फीडर मशीन मछली पलकों के लिए काफ़ी उपयोगी है।इस मशीन में ऐसी प्रोग्रामिंग की गयी है जिसके प्रयोग से किसान निर्धारित अंतराल पर मछलियों को दाना खिला सकते हैं। साथ ही इस मशीन को चलाने के लिए किसानों को बिजली पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस मशीन के उपयोग से मछलियों को समय पर दाना मिलेगा। इसके अलावा ये मशीन किसानों को मछली के व्यवहार और फीडिंग गतिविधि की निगरानी करने में भी मदद करेगी। वहीं, इस मशीन के उपयोग से दाने की बर्बादी को भी कम किया जा सकता है।
इस मशीन को किसान कही दूर बैठे या अपने घर से भी ऑपरेट कर सकते हैं। एक बार किसान मशीन में मछलियों का दाना खाने का समय फीड कर देंगे फिर मशीन उसी टाइम पर तालाब में दाने का छिड़काव कर देगी। इस मशीन को चलाने के लिए सोलर प्लेट लगी होगी जिससे पैदा हुई बिजली मशीन को ऑपरेट करेगी। ख़ास बात ये है कि इस मशीन को चलाने के लिए किसी बिजली के खंबे या बिजली कनेक्शन से जोड़ने की जरूरत नहीं है।

ये भी पढ़ें -पूसा के वैज्ञान‍िक का कमाल…ग्रीनहाउस में कीटनाशकों के छ‍िड़काव के ल‍िए बनाया रोबोट‍िक मशीन

मछलियों का ख़ान पान
मछलियों के पूर्ण विकास के लिए प्राकृतिक आहार के साथ-साथ पूरक आहार भी देना चाहिए। यदि तालाब में प्राकृतिक चारे की मात्रा संतोषजनक नहीं है तो उर्वरक डालें और पूरक आहार की मात्रा बढ़ा दें। इसके लिए किसानों को चावल की खली और सरसों की खली को आधा-आधा के अनुपात में खिलाना चाहिए। वहीं, सरसों के छिलके की जगह मूंगफली के छिलके भी दे सकते हैं। इसके साथ ही भोजन में एक प्रतिशत की दर से मिनरल्स भी देना चाहिए।

देश में मछली पालन का दृश्य
आपको बता दें कि विश्व स्तर पर भारत तीसरे सबसे बड़े मछली उत्पादक और दूसरे सबसे बड़े एक्वाकल्चर उत्पादक है। इसलिए देश में मछली पालन और एक्वाकल्चर उद्योग का बहुत महत्त्व है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार यह वर्ष 1980 के दशक के मध्य मछली उत्पादन में 36% से हाल के दिनों में 70% के साथ प्रमुख योगदानकर्ता बन गया है।
देश में मछली पालन और उससे जुड़ी दूसरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 5 मार्च, 2022 को मांडवी, गुजरात से सागर परिक्रमा एक विकासवादी यात्रा की शुरुआत की थी जिसका उद्देश्य मछुआरों और अन्य हितधारकों के मुद्दों को हल करना तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनका आर्थिक उत्थान करना है। इस यात्रा का उद्देश्य मछुआरा समुदायों की अपेक्षाओं में अंतर को पाटने, मत्स्यन गाँवों को विकसित करने और मत्स्यन केंद्रों जैसे बुनियादी ढाँचे को उन्नत करना भी है।

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