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पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न, बागवानी और दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि, दलहन-तिलहन के उत्पादन बढ़ाने में रिसर्च की जरूरत

पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न, बागवानी और दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि है। लेकिन दलहन और तिलहन में उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए वैज्ञानिक रिसर्च करें।आईसीएआर का 97वां स्थापना दिवस कार्यक्रम क

Pooja Rai

Pooja Rai·17 Jul 2025· 6 min read

पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न, बागवानी और दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि, दलहन-तिलहन के उत्पादन बढ़ाने में रिसर्च की जरूरत

पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न, बागवानी और दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि, दलहन-तिलहन के उत्पादन बढ़ाने में रिसर्च की जरूरत

पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न, बागवानी और दूध उत्पादन में लगातार वृद्धि है। लेकिन दलहन और तिलहन में उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए वैज्ञानिक रिसर्च करें।आईसीएआर का 97वां स्थापना दिवस कार्यक्रम के संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के जरिए 500 शोध के विषय सामने आए हैं, जिन पर गंभीरता से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छोटी जोत के किसानों के लिए बड़ी नहीं, छोटी मशीनें बनाने का काम करेंगे। जबरन गैर उपयोगी कृषि उत्पाद बेचने वालों को भी फटकार लगायी।इस मौके पर मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक आधुनिक महर्षि हैं, खुद से ज्यादा दूसरों को महत्व देते हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 97वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम, एन.ए.एस.सी. कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए चौहान ने संपूर्ण भारतवासियों की तरफ से पूरी आईसीएआर की टीम को बधाई दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईसीएआर के साथ जिन देशों ने समझौता किया है और जिन देशों में भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात हो रहा है, उनकी तरफ से भी आईसीएआर को बधाई। देश के जिन 80 करोड़ लोगों को राशन उपलब्ध हो रहा है, उनकी तरफ से भी आईसीएआर बधाई का पात्र है। स्थापना दिवस गर्व का विषय है। स्थापना दिवस उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए।

खाद्यान्न उत्पादन में ढाई से तीन गुना बढ़ा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों को आधुनिक महर्षि की संज्ञा देते हुए कहा कि हमारे वैज्ञानिकों की बौद्धिक क्षमता अतुलनीय है। अपनी कार्य क्षमता के बल पर हमारे वैज्ञानिक किसान कल्याण व विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौरान वर्ष 1966 से 1979 तक हमारा खाद्यान्न उत्पादन प्रति वर्ष 2.7 मिलियन टन बढ़ा। वर्ष 1980 से 1990 तक उत्पादन में 6.1 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन में वृद्धि हुई। वर्ष 2000 से 2013-14 तक खाद्यान्न उत्पादन में 3.9 मिलियन टन प्रति वर्ष बढ़ोतरी देखी गई। लेकिन 2013-14 से 2025 तक खाद्यान्न उत्पादन में 8.1 मिलियन टन बढ़ोतरी हुई है। पिछले 11 सालों में खाद्यान्न उत्पादन में ढाई से तीन गुना वृद्धि देखी गई।

बागवानी में भी रिकॉर्ड वृद्धि
उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में भी हुई वृद्धि को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 1966-1980 तक 1.3 मिलियन टन प्रति वर्ष बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1980-1990 में 2 मिलियन टन वृद्धि हुई। वर्ष 1990 से 2000 के दौरान 6 मिलियन टन वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में बागवानी क्षेत्र में 7.5 मिलियन टन की बढ़ोतरी के साथ फल और सब्जियों का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में भी नवीन प्रौद्योगिकियों के साथ उत्पादन में वृद्धि हो रही है। दूध उत्पादन में वर्ष 2000 से 2014 तक 4.2 मिलियन टन की वृद्धि देखी गई जबकि वर्ष 2014 से 2025 के समय में यह वृद्धि 10.2 मिलियन टन प्रति वर्ष रही। यह आंकडे स्वयं में पिछले 11 वर्षों में उत्पादन क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय उपलब्धि को दर्शाते हैं।

दलहन और तिलहन पर शोध की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, छोटी जोत, वायरस अटैक और पशुपालन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भी वैज्ञानिकों के असाधारण योगदान के कारण उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। जो अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेतों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखना है। केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों से प्राकृतिक खेती के जरिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दलहन और तिलहन में प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाने और बृहद शोध करने की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि वैज्ञानिक इस दिशा में आगे बढेंगे।

ये भी पढ़ें - केंद्र सरकार ने पीएम धन-धान्य कृषि योजना को दी मंजूरी, योजना का उद्देश्य और 100 जिलों के चयन का पैमाना समझिए

कपास पर ये कहा
चौहान ने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ दुनिया का सबसे बड़ा अभियान था। इस अभियान के माध्यम से कई बातें निकलकर सामने आईं। इसके जरिए फसलवार और राज्यवार फसलों पर बैठकें करने और समाधान के प्रयास का मार्ग प्रशस्त हुआ। सोयाबीन और कपास के बाद अब गन्ने व मक्के पर भी बैठक आयोजित की जाएगी। कपास को लेकर सवाल उठा कि इतनी किस्में विकसित होने के बावजूद उत्पादन क्यों घट गया। मैं बताना चाहता हूं कि वायरस अटैक के कारण फसलें प्रभावित हो रही है, बीटी कॉटन भी वायरस अटैक की समस्या से जूझ रहा है। इस अभियान के जरिए शोध के लिए 500 विषय उभरकर हमारे संज्ञान में आए हैं, जिन पर काम किया जाएगा।

छोटी मशीनें बनाने पर जोर
कृषि मंत्री ने किसानों की तरफ से उर्वरक की जांच के उपकरण सहित विभिन्न आधुनिकतम प्रौद्योगिकी के विकास की मांग को लेकर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जोत के आकार छोटे हैं, बड़ी मशीनों की जरूरत नहीं। छोटी मशीनें बनाने पर जोर देना होगा। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की सेल्फ लाइफ बढ़ाने की दिशा में शोध होना चाहिए। जो विषय किसान ने दिए उस पर शोध होना चाहिए। समझौता ज्ञापन करते समय ध्यान दिया जाए कि जिन कंपनियों के साथ समझौता हो रहा है वह किस कीमत पर बीज व उत्पाद बेच रही हैं।

बायोस्टिमुलेंट पर मंत्री ने क्या कहा?
चौहान ने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि अगर आपके साथ किसी भी तरह का धोखा हो रहा है, तो टोल- फ्री नंबर पर जरूर अपनी शिकायत दर्ज करवाइएगा। आधिकारिक तौर पर टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। किसान भाइयों-बहनों के साथ धोखाधड़ी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी ने भी अमानक उर्वरक या बीज बनाया तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि 30 हजार बायोस्टिमुलेंट बेचे जा रहे थे। जिसके संबंध में सख्ती से कदम उठाया गया है। मैंने सारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर इस संबंध में उचित कार्रवाई के लिए भी कहा है। किसी भी किसान को गैर उपयोगी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। चौहान ने कहा कि जिस प्रकार से जन औषधि केंद्रों के रूप में सस्ती दवाइयों की दुकान हैं, समान रूप से वैसे ही सस्ते उर्वरकों के लिए भी केंद्र या दुकान खोलने पर विचार किया जा सकता है।

अंत में चौहान ने वैज्ञानिकों से आह्वान करते हुए कहा कि आईसीएआर के स्थापना दिवस के इस अवसर पर किसान कल्याण के लिए समर्पित होकर काम करने का संकल्प लें। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने उत्कृष्ट योगदान के लिए वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान पुरस्कार भी वितरित किए। उत्कृष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, नवाचार वैज्ञानिक सहित विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार वितरण किए गए। केंद्रीय कृषि मंत्री ने परिसर में आयोजित विकसित कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही विभिन्न कृषि उत्पादों व प्रौद्योगिकी की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में 10 कृषि प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही कृषि क्षेत्र के विभिन्न समझौता ज्ञापनों का विमोचन भी किया गया।

इस कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल जाट सहित देशभर से आए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान शामिल रहें।

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