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पंजाब की बाढ़: 40 साल की सबसे बड़ी आपदा, वजह और हालात

पंजाब इस वक्त पिछले चार दशकों की सबसे भयानक बाढ़ झेल रहा है, जिसमें 1300 से ज्यादा गांव डूब गए और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। करीब 3.75 लाख एकड़ फसल नष्ट हुई है। 70% नुकसान भारी बारिश और 30% डैम से छोड़

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Pooja Rai·Correspondent·04 Sep 2025· 3 min read

पंजाब की बाढ़: 40 साल की सबसे बड़ी आपदा, वजह और हालात

पंजाब की बाढ़: 40 साल की सबसे बड़ी आपदा, वजह और हालात

पंजाब इस वक्त पिछले चार दशकों की सबसे भयानक बाढ़ झेल रहा है, जिसमें 1300 से ज्यादा गांव डूब गए और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। करीब 3.75 लाख एकड़ फसल नष्ट हुई है। 70% नुकसान भारी बारिश और 30% डैम से छोड़े गए पानी से हुआ। गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोज़पुर और होशियारपुर सबसे प्रभावित जिले हैं। राज्य को आपदा प्रभावित घोषित कर राहत कार्य तेज किए जा रहे हैं।

पंजाब इस समय ऐसी बाढ़ से जूझ रहा है जिसने पूरे राज्य को गहरे संकट में डाल दिया है। विशेषज्ञ इसे बीते चार दशकों की सबसे भयंकर बाढ़ मान रहे हैं, जिसने 1988 की तबाही को भी पीछे छोड़ दिया है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1300 से ज्यादा गांव जलमग्न हो चुके हैं, लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं और हजारों हेक्टेयर फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। सड़कें, पुल और मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बड़ा सवाल यह है कि इस बार तबाही इतनी बड़ी क्यों साबित हुई?

कैसे शुरू हुआ बाढ़ का संकट?
अगस्त 2025 की शुरुआत में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। लगातार बारिश से सतलुज, ब्यास और रावी जैसी नदियां खतरे के स्तर से ऊपर बहने लगीं। वहीं पोंग, भाखड़ा और रंजीत सागर डैम भर गए, जिससे अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। इसने पंजाब के निचले हिस्सों में तबाही को और बढ़ा दिया।

नुकसान की असली तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि करीब 70% नुकसान अत्यधिक बारिश से और 30% डैम से छोड़े गए पानी की वजह से हुआ। नदियों में 2 से 4 लाख क्यूसेक तक पानी बहने लगा, जो सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा था। क्लाइमेट चेंज की वजह से मानसून का पैटर्न बदल चुका है। बारिश अब अचानक और बहुत ज्यादा होती है, जिससे हालात संभालना मुश्किल हो जाता है।

ये भी पढ़ें - भारी बारिश से पंजाब बेहाल, सरकार ने पूरे राज्य को आपदा क्षेत्र घोषित किया

इंसानी लापरवाही का असर
प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ इंसानी भूलें भी बाढ़ को और खतरनाक बना देती हैं। पंजाब में नालों और नहरों की वर्षों से सफाई नहीं हुई, नदियों में जमी सिल्ट पानी का बहाव रोकती रही। कई तटबंध और बांध जर्जर हालत में हैं, जिनकी समय पर मरम्मत नहीं हुई। अवैध खनन, जंगलों की कटाई और अंधाधुंध निर्माण ने भी पानी का प्राकृतिक रास्ता रोक दिया। कमजोर जल निकासी व्यवस्था के कारण गांवों में दिनों तक पानी भरा रहा।

जमीनी हालात
गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोज़पुर और होशियारपुर जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। करीब 3.75 लाख एकड़ कृषि भूमि पानी में डूबी है, जिसमें धान, मक्का और गन्ना जैसी मुख्य फसलें चौपट हो गई हैं। कई परिवारों का घर में रखा अनाज भी भीगकर खराब हो चुका है। पशुधन की मौत से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

राहत और मदद
बिगड़ते हालात को देखते हुए पंजाब सरकार ने पूरे राज्य को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया है और 7 सितंबर तक स्कूल-कॉलेज बंद करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार ने भी राज्य को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। इसके साथ ही सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय हैं।

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