दुनिया में आज भी करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता। वहीं, हर साल करोड़ों टन भोजन बर्बाद हो जाता है। साल 2025 में दुनिया के 60.8 करोड़ से 69.6 करोड़ लोगों ने भूख का सामना किया। ये आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सामने भूख और खाद्य सुरक्षा की चुनौती अब भी बनी हुई है। इसी समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हर व्यक्ति तक पर्याप्त व पौष्टिक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) मनाया जाता है।
कब और क्यों मनाया जाता है विश्व खाद्य दिवस?
विश्व खाद्य दिवस संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की स्थापना की याद में मनाया जाता है। FAO की स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इसके बाद नवंबर 1979 में हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाने का फैसला लिया गया। पहली बार यह दिवस 1981 में मनाया गया था।
इसका मकसद दुनिया से भूख और कुपोषण की समस्या खत्म करने, सभी लोगों तक पर्याप्त और पौष्टिक भोजन पहुंचाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता फैलाना है। इस दिन दुनिया के कई देशों में सरकारें, सामाजिक संगठन, किसान, शोधकर्ता और आम लोग अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं।
2025 में 60.8 से 69.6 करोड़ लोगों ने झेली भूख
FAO के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया भर में अनुमानित 60.8 करोड़ से 69.6 करोड़ लोगों ने भूख का सामना किया। यानी दुनिया की आबादी का करीब 7.4 से 8.5 फीसदी हिस्सा पर्याप्त भोजन से वंचित रहा। इसके अलावा, करीब 2.69 अरब लोग स्वस्थ आहार खरीदने में सक्षम नहीं थे। इससे पता चलता है कि चुनौती सिर्फ पेट भरने की नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक ऐसा भोजन पहुंचाने की भी है, जो उसे जरूरी पोषण दे सके।
भूख और कुपोषण की वजह केवल भोजन की कमी नहीं है। गरीबी, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और भोजन के वितरण में आने वाली बाधाएं भी लोगों की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। इसलिए जरूरी है कि भोजन का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसे लोगों की पहुंच में भी रखा जाए।
हर साल बर्बाद हो रहा 105 करोड़ टन भोजन
भूख की समस्या के बीच भोजन की बर्बादी भी एक बड़ी चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की Food Waste Index Report 2024 के मुताबिक, साल 2022 में दुनिया भर में करीब 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद हुआ। यह उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कुल भोजन का लगभग 19 फीसदी था। इसमें घरों, रेस्तरां और दुकानों से फेंका गया खाना शामिल है।
इसके अलावा, FAO के अनुमान के अनुसार, खेत से लेकर खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले ही दुनिया में पैदा होने वाले करीब 13 फीसदी भोजन का नुकसान हो जाता है। कटाई, भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने के दौरान होने वाला यह नुकसान किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संसाधनों पर भी असर डालता है।
भोजन की बर्बादी कम करने के लिए फसल की कटाई के बाद बेहतर भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और बाजार की सुविधाएं जरूरी हैं। वहीं, घरों और रेस्तरां में भी जरूरत के मुताबिक भोजन लेना और खाने योग्य भोजन को बर्बाद होने से बचाना अहम है।
World Food Day 2026 की थीम क्या है?
इस साल विश्व खाद्य दिवस की थीम “Innovate Today. Nourish Tomorrow.” है, जिसका अर्थ है- आज नवाचार करें, ताकि कल सभी को बेहतर पोषण मिल सके। इस थीम के जरिए आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सबको साथ लेकर चलने वाले तरीकों से खाद्य व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।
खेती में नई तकनीक, बेहतर बीज, पानी का सही इस्तेमाल, फसल के नुकसान को कम करने के उपाय और बाजार तक किसानों की पहुंच इस दिशा में मददगार हो सकते हैं। इसके साथ ही जमीन, पानी और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाना भी जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भोजन की उपलब्धता बनी रहे।
खाद्य सुरक्षा में किसानों की भूमिका अहम
भोजन की पूरी व्यवस्था की शुरुआत खेत से होती है। किसान अनाज, दालें, फल और सब्जियां उगाकर लोगों की जरूरतें पूरी करते हैं। लेकिन फसल तैयार होने के बाद सही दाम, भंडारण, परिवहन और बाजार की सुविधा नहीं मिलने पर कई बार उपज का नुकसान होता है। इन समस्याओं को दूर करने से किसानों की मेहनत बचाई जा सकती है और भोजन की उपलब्धता भी बढ़ाई जा सकती है।
विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भूख की समस्या का समाधान सिर्फ अधिक भोजन पैदा करने में नहीं है। इसके लिए भोजन की बर्बादी रोकना, किसानों को बेहतर सुविधाएं देना और हर व्यक्ति तक सुरक्षित व पौष्टिक आहार पहुंचाना भी जरूरी है।


