News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. बाजार
  3. क्यों बढ़ रहे हैं अंडे और चिकन के दाम? जानिए कब मिलेगी राहत
बाजार

क्यों बढ़ रहे हैं अंडे और चिकन के दाम? जानिए कब मिलेगी राहत

देश के कई हिस्सों में अंडे और चिकन की कीमतें बढ़ गई हैं। इसकी मुख्य वजह भीषण गर्मी, देर से आया मानसून, उत्पादन में कमी और पशु आहार (फीड) की बढ़ती लागत है। गर्मी के कारण अंडों का उत्पादन 5-7% तक घटा है और चूजों की मृत्यु दर भी बढ़ी है।

Pooja Rai

Pooja Rai·24 Jul 2026

देश के कई हिस्सों में अंडे और चिकन की कीमतें बढ़ गई हैं।

देश के कई हिस्सों में अंडे और चिकन की कीमतें बढ़ गई हैं।

अगर पिछले कुछ दिनों में आपको अंडे और चिकन पहले से महंगे लग रहे हैं, तो इसकी वजह सिर्फ सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है। इस बार भीषण गर्मी, देर से आए मानसून, बढ़ती उत्पादन लागत और पशु आहार (फीड) की महंगाई ने पोल्ट्री सेक्टर पर बड़ा असर डाला है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में अंडे और चिकन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे अंडे के दाम

देश के कई शहरों में अंडे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक पुणे में 22 जुलाई को थोक बाजार में 100 अंडों की कीमत 760 रुपये तक पहुंच गई, जबकि खुदरा बाजार में एक दर्जन अंडे 110 से 120 रुपये तक बिक रहे हैं। मुंबई, चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में भी अंडों की कीमत पिछले महीने की तुलना में बढ़ गई है।

चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि गर्मी के कारण उत्पादन कम हुआ, इसलिए बाजार में सप्लाई घटी और कीमतें बढ़ गईं।

भीषण गर्मी ने घटाया उत्पादन

पोल्ट्री उद्योग के अनुसार, लंबे समय तक चली भीषण गर्मी ने अंडे देने वाली मुर्गियों और ब्रॉयलर (मीट के लिए पाले जाने वाले) मुर्गों दोनों को प्रभावित किया।

गर्मी के कारण:

  • मुर्गियां कम दाना खाती हैं और ज्यादा पानी पीती हैं।
  • अंडे देने वाली मुर्गियां पहले से कम अंडे देती हैं।
  • अंडों का आकार छोटा हो जाता है और उनका छिलका भी कमजोर हो सकता है।
  • ब्रॉयलर मुर्गों का वजन धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे उन्हें बाजार तक पहुंचाने में ज्यादा समय लगता है।
  • चूजों की मृत्यु दर भी बढ़ जाती है।

पोल्ट्री उद्योग के अनुसार, अंडों का उत्पादन करीब 5 से 7 प्रतिशत तक घटा है, जबकि कई इलाकों में चूजों की मौत 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ी है।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर?

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा गया। इन राज्यों में लंबे समय तक तापमान बहुत अधिक रहने से पोल्ट्री फार्मों को भारी नुकसान हुआ।

किसानों की लागत भी बढ़ी

गर्मी के दौरान मुर्गियों को बचाने के लिए पोल्ट्री फार्मों में लगातार पंखे, फॉगिंग सिस्टम और कूलिंग सिस्टम चलाने पड़े। पानी की खपत बढ़ी और दवाइयों व पशु चिकित्सा पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ा। इससे उत्पादन लागत और बढ़ गई।

महंगा हुआ पशु आहार

पोल्ट्री उद्योग में कुल उत्पादन लागत का लगभग 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ फीड पर खर्च होता है।

मुर्गियों के चारे में मुख्य रूप से मक्का और सोयाबीन खली का इस्तेमाल होता है। हाल के महीनों में सोयाबीन और सोयाबीन खली की कीमतें काफी बढ़ी हैं। उद्योग का कहना है कि देश में इस समय करीब 15 लाख टन सोयाबीन खली की कमी है, जिससे फीड और महंगा हो गया है।

मानसून से भी नहीं मिली राहत

उम्मीद थी कि मानसून आने के बाद तापमान कम होगा और उत्पादन सुधरेगा, लेकिन कई राज्यों में मानसून देर से पहुंचा और बारिश भी सामान्य से कम रही। इससे गर्मी का असर लंबे समय तक बना रहा और पोल्ट्री उत्पादन सामान्य नहीं हो सका।

कीमतें कब होंगी कम?

पोल्ट्री उद्योग का कहना है कि अंडे और चिकन की कीमतें तुरंत कम होने की संभावना नहीं है। तापमान सामान्य होने, पक्षियों की मृत्यु दर घटने और उत्पादन बढ़ने में अभी समय लगेगा।

हालांकि श्रावण के दौरान कई इलाकों में अंडे और चिकन की मांग कुछ कम हो सकती है, जिससे कीमतों में हल्की राहत मिल सकती है। लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब उत्पादन पूरी तरह सामान्य होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती उत्पादन लागत अब पोल्ट्री उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते बेहतर कोल्ड चेन, मौसम के अनुसार प्रबंधन और फीड की उपलब्धता पर काम नहीं किया गया, तो भविष्य में भी अंडे और चिकन की कीमतों में ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

News Potli.
Clip & Share
“

— क्यों बढ़ रहे हैं अंडे और चिकन के दाम? जानिए कब मिलेगी राहत

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Egg PricesChicken PricesPoultry FarmingClimate ChangeNews Potli
Pooja Rai

About the Author

Pooja Rai

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर
बाजार

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

मात्रा के लिहाज से भी मसालों का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.99 लाख टन था।

Mithilesh·
रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा
बाजार

रबी फसलों के दाम: गेहूं-चना MSP से नीचे, सरसों किसानों के लिए बनी फायदे का सौदा

एगमार्कनेट के मंडी आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई तक गेहूं को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख रबी फसलों के दाम पिछले तीन महीनों के औसत से ऊपर चल रहे हैं।

Mithilesh·
2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा
बाजार

2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा

चावल उत्पादन रिकॉर्ड 154 मिलियन टन पहुंचा, गेहूं भी 120.66 मिलियन टन के नए शिखर पर।

News Potli·
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs