भारत में गेहूं का उत्पादन बढ़ने और घरेलू स्टॉक की स्थिति बेहतर रहने के बीच केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। अब गेहूं और ड्यूरम गेहूं (यानी सख्त दाने वाला गेहूं, जिसका इस्तेमाल खासकर पास्ता और सूजी जैसे उत्पाद बनाने में होता है) का निर्यात तुरंत प्रभाव से किया जा सकेगा। इसके साथ ही गेहूं के आटे, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दे दी गई है।
गेहूं का उत्पादन बढ़ा
सरकार के इस फैसले के पीछे देश में गेहूं की बेहतर उपलब्धता भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। मई में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 35.7732 करोड़ टन से करीब 5.3% ज्यादा है।
वहीं, गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है। पिछले साल यह 11.7945 करोड़ टन था। यानी गेहूं उत्पादन में करीब 27.12 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है।
फरवरी में मिली थी सीमित निर्यात की अनुमति
इससे पहले फरवरी में सरकार ने बेहतर स्टॉक को देखते हुए 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दी थी। अब सरकार ने गेहूं की निर्यात नीति को ‘प्रतिबंधित’ से ‘मुक्त’ कर दिया है।
आटा, मैदा और सूजी का निर्यात भी खुलेगा
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के मुताबिक, गेहूं के साथ-साथ गेहूं का आटा, मैदा और सूजी भी अब निर्यात किए जा सकेंगे। इससे भारतीय गेहूं और उससे बने उत्पादों के लिए विदेशी बाजार खुलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि सरकार ने मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी। इसके बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे और अन्य उत्पादों के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। इस साल फरवरी में सरकार ने सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देकर इसे धीरे-धीरे खोला था।
अब गेहूं का निर्यात पूरी तरह मुक्त होने से किसानों, व्यापारियों और गेहूं से जुड़े उद्योगों के लिए विदेशी बाजार में कारोबार के नए अवसर बन सकते हैं।





