रबी सीजन की शुरुआत से पहले किसानों के लिए खाद को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दुनियाभर में खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और गैस की कीमत बढ़ने से भारत सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी का खर्च ₹3 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो सकता है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि रबी सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए राज्यों से किसानों को खाद का संतुलित इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।
यूरिया पर सब्सिडी 106% बढ़ी
केंद्रीय उर्वरक सचिव राजत कुमार मिश्रा के मुताबिक, युद्ध से पहले यानी 28 फरवरी 2026 से पहले 45 किलो की एक बोरी यूरिया पर सरकार करीब ₹1,350 की सब्सिडी देती थी। अब यह बढ़कर करीब ₹2,775 प्रति बोरी हो गई है। यानी यूरिया पर सरकार की सब्सिडी का बोझ करीब 106 फीसदी बढ़ गया है।
इसी तरह 50 किलो DAP पर सब्सिडी पहले करीब ₹2,102 प्रति बोरी थी, जो अब बढ़कर करीब ₹3,523 हो गई है। यानी DAP पर भी सरकार का खर्च काफी बढ़ा है।
खाद महंगी होने की बड़ी वजह क्या है?
खाद की बढ़ती कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमत बढ़ना बड़ी वजह है। खासकर सल्फर और फॉस्फोरिक एसिड की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
फरवरी 2026 में सल्फर की कीमत करीब 532 डॉलर प्रति टन थी, जो बढ़कर करीब 1,050 डॉलर प्रति टन हो गई है।
वहीं फॉस्फोरिक एसिड की कीमत भी 1,290 डॉलर से बढ़कर 1,700 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसका सीधा असर DAP और दूसरी फॉस्फेट वाली खाद की लागत पर पड़ रहा है।
DAP और कॉम्प्लेक्स खाद का उत्पादन भी प्रभावित
सरकार के मुताबिक, सल्फर की कमी और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण दुनिया की कई कंपनियों ने फॉस्फोरिक एसिड, DAP और NPK का उत्पादन कम किया है।
भारत में भी पिछले साल के मुकाबले कॉम्प्लेक्स खाद का घरेलू उत्पादन करीब 26 फीसदी कम हुआ है। ऐसे में आयात पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर और बढ़ जाता है।
यूरिया पर गैस की कीमत का असर
यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है। भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी से ज्यादा गैस आयात करता है।
सरकार के अनुसार, युद्ध से पहले गैस की कीमत करीब 10 डॉलर प्रति MMBtu थी, जो अब बढ़कर करीब 28-29 डॉलर हो गई है। इसके अलावा भारत को मिलने वाली गैस की सप्लाई भी पहले के मुकाबले कम हुई है। इससे यूरिया बनाने की लागत बढ़ी है।
रबी के लिए खाद का कितना स्टॉक?
खाद की कीमत बढ़ने के बावजूद सरकार का कहना है कि रबी सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
27 सितंबर तक देश में यूरिया, DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स खाद का करीब 145.46 लाख टन स्टॉक था। इसके अलावा करीब 20.88 लाख टन SSP भी उपलब्ध है।
रास्ते में और बंदरगाहों पर मौजूद खाद को जोड़ने के बाद कुल उपलब्धता करीब 206.35 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
रबी में करीब 381 लाख टन खाद की जरूरत
सरकार ने रबी सीजन के लिए कुल खाद की मांग करीब 380.96 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। इसमें यूरिया की मांग 199.27 लाख टन, DAP 55.07 लाख टन, MOP 16.4 लाख टन, कॉम्प्लेक्स खाद 79.12 लाख टन और SSP की मांग करीब 31.1 लाख टन रहने का अनुमान है।
जरूरत के हिसाब से खाद डालने की अपील
खाद पर बढ़ते सरकारी खर्च को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कहा है कि किसानों को जरूरत से ज्यादा खाद इस्तेमाल करने से रोका जाए।
उन्होंने मिट्टी की स्थिति और Soil Health Card के आधार पर खाद इस्तेमाल करने पर जोर दिया। सरकार का कहना है कि संतुलित मात्रा में खाद डालने से किसानों की लागत कम करने के साथ मिट्टी की सेहत बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
इसके साथ ही राज्यों को सब्सिडी वाली खाद के खेती के अलावा दूसरे कामों में इस्तेमाल या डायवर्जन को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
उन्होंने राज्यों से प्राकृतिक और जैविक खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने की भी अपील की है। सरकार का जोर है कि खाद के संतुलित इस्तेमाल के साथ ऐसे खेती के तरीकों को भी बढ़ावा दिया जाए, जिनसे मिट्टी की सेहत बनी रहे और किसानों की लागत कम हो।





