उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहकारी चीनी मिलों को गन्ना कम मिलने और दूसरी ओर निजी चीनी मिलों को गन्ना आवंटित किए जाने के मामले में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि पिछले तीन साल से गन्ना आवंटन में गड़बड़ी कर सरकारी और सहकारी चीनी मिलों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। यूनियन ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, गन्ना आवंटन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और लंबे समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों को हटाने की मांग की है।
गन्ना आवंटन में गड़बड़ी का आरोप
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग को पत्र लिखकर गन्ना आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि पिछले तीन पेराई सत्रों के गन्ना सुरक्षण आदेशों, मिलों के आरक्षित और आवंटित क्षेत्रों और गन्ना क्रय केंद्रों के वितरण की जांच होनी चाहिए।
यूनियन के मुताबिक, सरकारी और सहकारी चीनी मिलों के आरक्षित क्षेत्रों में भी निजी चीनी मिलों को क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं। वहीं, निजी चीनी मिलों के क्षेत्रों में दूसरी मिलों को गन्ना आवंटित करने के मामले सामने नहीं आने का दावा करते हुए संगठन ने इस प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सरकारी और सहकारी चीनी मिलें क्यों हैं जरूरी?
यूनियन का कहना है कि सरकारी और सहकारी चीनी मिलें किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये मिलें निजी मिलों के बीच प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद करती हैं। साथ ही, जब गन्ने की पैदावार ज्यादा होती है, तब ये लंबे समय तक पेराई करके किसानों का गन्ना खरीदने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
संगठन के मुताबिक, इन मिलों को उनकी पेराई क्षमता के हिसाब से गन्ना नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। इसका असर किसानों पर भी पड़ सकता है। यूनियन ने कहा है कि इन मिलों को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने और उनकी स्थिति की समीक्षा करने की जरूरत है।
मोरना और नजीबाबाद चीनी मिलों का मुद्दा भी उठाया
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने मुजफ्फरनगर की दि गंगा सहकारी चीनी मिल, मोरना और बिजनौर की नजीबाबाद चीनी मिल का मामला भी उठाया है। संगठन का कहना है कि इन मिलों के विस्तारीकरण को मंजूरी मिलने के बाद भी गन्ने की कम उपलब्धता के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया।
यूनियन ने मांग की है कि दोनों मिलों में गन्ने की उपलब्धता, विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण की स्थिति की समीक्षा की जाए। साथ ही, इनके विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।
बकाया भुगतान वाली मिलों को गन्ना देने पर भी सवाल
यूनियन ने बजाज समूह, मोदी समूह और सिंभावली समूह की चीनी मिलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों का लंबे समय से गन्ना मूल्य भुगतान बकाया होने के बावजूद इन मिलों को गन्ना आवंटित किया जाता रहा है।
संगठन की मांग है कि गन्ना आवंटन करते समय मिलों के पुराने भुगतान रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखा जाए। जिन मिलों पर किसानों का भुगतान बकाया है, उनसे वसूली के लिए कार्रवाई की जाए और भुगतान की स्थिति को आवंटन प्रक्रिया का अहम आधार बनाया जाए।
तीन साल से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों को हटाने की मांग
किसान यूनियन ने गन्ना आयुक्त कार्यालय में तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि ऐसे अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और नियमों के मुताबिक उनके पद परिवर्तन और तबादले किए जाने चाहिए।
यूनियन ने मांग की है कि पिछले तीन पेराई सत्रों के गन्ना सुरक्षण आदेशों और क्रय केंद्र आवंटन की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में यह भी देखा जाए कि गन्ना आवंटन के दौरान मिलों की दूरी, परिवहन की सुविधा, पिछले वर्षों में गन्ने की आपूर्ति, पेराई क्षमता, पुराने आवंटन और किसानों के भुगतान जैसे नियमों का पालन हुआ या नहीं।
किसान यूनियन की सरकार से 8 प्रमुख मांगें
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने सरकार से मांग की है कि:
- पिछले तीन पेराई सत्रों के गन्ना आवंटन और क्रय केंद्रों के वितरण की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- सरकारी और सहकारी चीनी मिलों के आरक्षित क्षेत्रों में निजी मिलों को क्रय केंद्र देने के मामलों की जांच हो।
- मोरना और नजीबाबाद चीनी मिलों में गन्ने की उपलब्धता, विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण की समीक्षा कर समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
- किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं करने वाली मिलों के रिकॉर्ड को गन्ना आवंटन में महत्व दिया जाए और बकाया भुगतान की वसूली की जाए।
- गन्ना आयुक्त कार्यालय में तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों के पद परिवर्तन और तबादले किए जाएं।
- जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जांच पूरी करने की समयसीमा तय हो और रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।
- गन्ना आवंटन में उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 और संबंधित नियमों के तहत तय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
यूनियन ने सरकार से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कराने और गन्ना आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।


