उत्तर प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई के बीच खाद का संकट गहराने लगा है। सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल के चलते कई जगहों पर प्रभावित हो रहा है। समितियों के गोदामों में खाद होने के बावजूद किसानों को डीएपी और यूरिया नहीं मिल पा रही है। आलू की बोआई के साथ गेहूं की खेती की तैयारी कर रहे किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, सचिव मानदेय और बकाया वेतन का भुगतान नहीं होने से नाराज हैं। वे पिछले चार दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में अनशन कर रहे हैं।
मानदेय और बकाया वेतन के भुगतान की मांग
सहकारी समितियों के सचिवों के साथ आंकिक, चौकीदार और कंप्यूटर ऑपरेटर भी भुगतान नहीं होने से परेशान हैं। साधन समिति सचिव परिषद के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी का कहना है कि हर जिले में समितियां बंद हैं। सचिवों के हस्ताक्षर से खाद का वितरण होता है, इसलिए उनके कार्य बहिष्कार के कारण किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।
प्रदेश में आठ हजार से अधिक सहकारी समितियां संचालित हैं। सहकारिता विभाग में करीब 2,002 सचिव हैं, जबकि अन्य समितियों में सचिवों की नियुक्ति संबंधित समिति का संचालक मंडल करता है। सचिवों का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें मानदेय और वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
सरकार के सामने रखीं कई मांगें
सचिवों ने सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त एवं निबंधक को पत्र भेजकर नॉन-कैडर सचिवों, लिपिकों, विक्रेताओं और चौकीदारों को उनकी पदगत स्थिति के आधार पर वेतन देने की मांग की है। इसके अलावा बकाया मानदेय और वेतन का तत्काल भुगतान करने, हड़ताल करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ के फैसले का पालन करने की मांग भी की गई है।
एस्मा लागू, सचिवों को कार्रवाई की चेतावनी
सचिवों की हड़ताल को देखते हुए सहकारिता विभाग ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा), 1966 लागू कर दिया है। कानपुर देहात, संत रविदासनगर और श्रावस्ती समेत कई जिलों में जिलाधिकारियों ने सचिवों को चेतावनी पत्र जारी किए हैं। इन पत्रों में खाद वितरण तत्काल शुरू नहीं करने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
वहीं, सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सचिवों के बकाया मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। विभाग की ओर से जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
खाद नहीं मिलने से आलू और गेहूं की खेती पर संकट
सहकारी समितियों में खाद वितरण प्रभावित होने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है। आलू की बोआई के बीच डीएपी नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, निजी दुकानों पर खाद महंगे दामों पर मिलने से किसानों की लागत बढ़ने की आशंका है। खाद की कमी के कारण आलू की बोआई में देरी हो रही है। साथ ही, गेहूं की बुवाई की तैयारी पर भी असर पड़ सकता है।एक तरफ सचिव बकाया भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ किसान समय पर खाद नहीं मिलने से परेशान हैं।


