देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ ही चीनी की कीमतों को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। पिछले महीने चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसे में सरकार ने चीनी मिलों से कहा है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखें और इसे उचित कीमत पर बेचें। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कीमतों में बेवजह बढ़ोतरी होती है तो उसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह मांग में अचानक बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कीमतें और बढ़ने की उम्मीद में की गई जमाखोरी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान चीनी के दाम बढ़ने का कोई कारण नहीं है और कीमतों को स्थिर रखना पूरे चीनी उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और आमतौर पर चीनी का निर्यात करता है। लेकिन इस बार घरेलू सप्लाई को देखते हुए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। करीब एक दशक बाद भारत पहली बार ब्राजील से भी चीनी आयात कर रहा है।
पिछले महीने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद हाल के दिनों में चीनी के दाम कुछ कम हुए हैं, लेकिन अभी भी दो महीने पहले के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा हैं।
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार होते हैं, जिनमें मिठाइयों और दूसरी मीठी चीजों की खपत बढ़ जाती है।
सरकार अब चीनी के उत्पादन और बिक्री पर भी नजर रखेगी। खाद्य मंत्रालय हर महीने चीनी के उत्पादन की निगरानी करेगा ताकि कीमतों को नियंत्रित रखने से जुड़ी नीतियां बेहतर तरीके से बनाई जा सकें। सरकार ने चीनी मिलों से हर महीने उत्पादन और चीनी की बिक्री का सही आंकड़ा देने को कहा है।
अश्विनी श्रीवास्तव के मुताबिक, सरकार को 10 लाख मीट्रिक टन के शुल्क-मुक्त आयात कोटे के तहत अब तक करीब 8 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात के आवेदन मिल चुके हैं।
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