चीनी के दाम बढ़ने या घटने पर अक्सर किसानों और चीनी मिलों की नजर सरकार के फैसलों पर रहती है। लेकिन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि आज के वैश्विक बाजार में चीनी की कीमत सिर्फ सरकार तय नहीं कर सकती। दुनिया में मांग और सप्लाई के हिसाब से चीनी के दाम तय होते हैं, इसलिए भारत में भी इसका असर दिखाई देता है।
गडकरी ने यह बात चीनी के MSP बढ़ाने की मांग के बीच कही। उन्होंने बताया कि ब्राजील में चीनी का उत्पादन भारत की तुलना में कम लागत पर होता है। भारत में चीनी उत्पादन की लागत करीब 33-34 रुपये प्रति किलो है, जबकि ब्राजील में यह करीब 23 रुपये प्रति किलो बताई गई। ऐसे में अगर ब्राजील में चीनी का उत्पादन बढ़ता है और वहां ज्यादा सप्लाई होती है, तो इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ सकता है।
सिर्फ चीनी पर निर्भर रहना ठीक नहीं
गडकरी ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सिर्फ चीनी पर निर्भर रहना सही रास्ता नहीं है। गन्ने से निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट, बायोमास, जैविक खाद और Value Addition पर काम करके किसानों और चीनी उद्योग की कमाई बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने खेती को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि जब तक खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं होगी, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान मुश्किल है।
गन्ने की नई किस्मों पर भी होगा काम
देश में गन्ने की बेहतर और नई किस्में विकसित करने के लिए कोयंबटूर में Global Centre of Excellence for Accelerated Sugar Breeding बनाने की दिशा में काम चल रहा है। इसमें NFCSF, ISMA और केंद्रीय कृषि मंत्रालय शामिल हैं। इसका मकसद ऐसी नई गन्ना किस्में विकसित करना है, जिनसे देश में उत्पादन और किसानों की कमाई को बेहतर किया जा सके।





